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Meerut News: मां कूष्मांडा की पूजा से दूर होती है जीवन की सभी बाधाएं
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प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में चल रही नवरात्रि पूजा के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि देवी भागवत पुराण के अनुसार मां कूष्मांडा की पूजा करने से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि होती है और बुद्धि का विकास होता है। साथ ही उनकी पूजा से काम न आने वाली बाधाएं स्वयं ही दूर हो जाती हैं। मां का रूप बहुत ही अलौकिक और दिव्य है। दुर्गा माता के स्वरूपों का वर्णन देवी भागवत पुराण में भी किया गया है। माता के इस रूप की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा मनोकामना पूरी करने वाली हैं।
मंदिर के आचार्य मुकेश शांडिल्य ने कहा कि ऐसी मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। इसी के चलते देवी को कूष्मांडा मां के नाम से जाना जाने लगा। सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ जो अंधकार था मां ने उसे अपनी हंसी से दूर किया। माता के भीतर सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है। माता कूष्मांडा शेर की सवारी करती हैं और उनकी आठ भुजाएं हैं। जिनमें अस्त्र मौजूद हैं। उनकी भुजाओं में कलश, कमल, सुदर्शन चक्र और कमंडल सुशोभित है। मां का चौथा स्वरूप जीवन जातक को शक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। उनका रूप बहुत दिव्य और अलौकिक है।
पूजा की सभी विधि चंद्र प्रकाश शुक्ला ने संपन्न कराई। उन्होंने बताया कि पांचवें दिन स्कंद माता स्वरुप की पूजा अर्चना होगी। इस अवसर पर मंदिर में ज्योति शर्मा, काजल शर्मा, रानी, अमन विनोद उर्फ मुखिया पंडित, रिक्की शर्मा, सुबोध मावी, विशू शर्मा आदि मौजूद रहे।
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हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में चल रही नवरात्रि पूजा के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि देवी भागवत पुराण के अनुसार मां कूष्मांडा की पूजा करने से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि होती है और बुद्धि का विकास होता है। साथ ही उनकी पूजा से काम न आने वाली बाधाएं स्वयं ही दूर हो जाती हैं। मां का रूप बहुत ही अलौकिक और दिव्य है। दुर्गा माता के स्वरूपों का वर्णन देवी भागवत पुराण में भी किया गया है। माता के इस रूप की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा मनोकामना पूरी करने वाली हैं।
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मंदिर के आचार्य मुकेश शांडिल्य ने कहा कि ऐसी मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। इसी के चलते देवी को कूष्मांडा मां के नाम से जाना जाने लगा। सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ जो अंधकार था मां ने उसे अपनी हंसी से दूर किया। माता के भीतर सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है। माता कूष्मांडा शेर की सवारी करती हैं और उनकी आठ भुजाएं हैं। जिनमें अस्त्र मौजूद हैं। उनकी भुजाओं में कलश, कमल, सुदर्शन चक्र और कमंडल सुशोभित है। मां का चौथा स्वरूप जीवन जातक को शक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। उनका रूप बहुत दिव्य और अलौकिक है।
पूजा की सभी विधि चंद्र प्रकाश शुक्ला ने संपन्न कराई। उन्होंने बताया कि पांचवें दिन स्कंद माता स्वरुप की पूजा अर्चना होगी। इस अवसर पर मंदिर में ज्योति शर्मा, काजल शर्मा, रानी, अमन विनोद उर्फ मुखिया पंडित, रिक्की शर्मा, सुबोध मावी, विशू शर्मा आदि मौजूद रहे।

प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद