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Mirzapur News: 704 वक्फ संपत्तियों में से 91 के डेटा में मेल नहीं
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- उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का विवरण हुआ था दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। उम्मीद पोर्टल पर दर्ज जिले की वक्फ संपत्तियों के डाटा में एकरूपता नहीं मिली है। 704 में से 91 वक्फ के डाटा मिसमैच हैं। इन्हें ठीक कराने को कहा गया है। इसके लिए सभी से कहा गया वे पांच जून तक डाटा को दुरुस्त करा लें। इसके साथ ही इसकी एक प्रति सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ के कार्यालय में जमा करा दें।
छह जून 2025 से छह दिसंबर 2025 तक अभियान चलाकर पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को विवरण दर्ज कराया गया था। जिले में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे कराया गया तो कई संपत्तियां सरकारी मिलीं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जब जांच की तो पता चला कि 704 में से 598 सरकारी हैंं। यह संपत्तियां खतौनी में दर्ज हैं। वहीं, 83 संपत्तियों की जांच चल रही थी। वक्फ बोर्ड की ओर से सदर तहसील में 244, चुनार में सबसे ज्यादा 430, मड़िहान में 25 और लालगंज तहसील क्षेत्र में पांच संपत्तियों का दावा किया गया था। जिला प्रशासन की जांच हुई तो सदर तहसील में 154, चुनार में 416 व मड़िहान में 24 और लालगंज में चार संपत्ति सरकारी खतौनी में दर्ज मिलीं। इसी प्रकार सदर तहसील में सात, चुनार में 14, मड़िहान में एक और लालगंज में एक संपत्ति निजी पाई गई। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 697 संपत्तियों और उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड ने सात संपत्तियों की सूची दी थी। 23 संपत्तियां निजी हैं।
पोर्टल पर शुद्धिकरण के बाद होगा निर्णय
उम्मीद पोर्टल पर जो डाटा मिसमैच मिले हैं, उन्हें शुद्ध करने के लिए समय दिया गया है। साथ ही इस बार उसकी हार्ड कॉपी भी सर्वे कमिश्नर के कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। ताकि अगली बार जब जांच हो तो संबंधित पक्ष अपने अभिलेखों को पुष्ट कर सके। इसके बाद ही माना जा रहा है कि सरकार कोई कार्रवाई करेगी। अभी तो यह माना जा रहा है कि फीडिंग में कोई गड़बड़ी हो सकती है। इसीलिए हार्ड कॉपी भी मांगी गई है। इसके बाद में कोई पक्ष मुकर न सके।
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कोट
शासन का जो निर्देश आया है। उसी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
रामदत्त प्रजापत,जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। उम्मीद पोर्टल पर दर्ज जिले की वक्फ संपत्तियों के डाटा में एकरूपता नहीं मिली है। 704 में से 91 वक्फ के डाटा मिसमैच हैं। इन्हें ठीक कराने को कहा गया है। इसके लिए सभी से कहा गया वे पांच जून तक डाटा को दुरुस्त करा लें। इसके साथ ही इसकी एक प्रति सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ के कार्यालय में जमा करा दें।
छह जून 2025 से छह दिसंबर 2025 तक अभियान चलाकर पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को विवरण दर्ज कराया गया था। जिले में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे कराया गया तो कई संपत्तियां सरकारी मिलीं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जब जांच की तो पता चला कि 704 में से 598 सरकारी हैंं। यह संपत्तियां खतौनी में दर्ज हैं। वहीं, 83 संपत्तियों की जांच चल रही थी। वक्फ बोर्ड की ओर से सदर तहसील में 244, चुनार में सबसे ज्यादा 430, मड़िहान में 25 और लालगंज तहसील क्षेत्र में पांच संपत्तियों का दावा किया गया था। जिला प्रशासन की जांच हुई तो सदर तहसील में 154, चुनार में 416 व मड़िहान में 24 और लालगंज में चार संपत्ति सरकारी खतौनी में दर्ज मिलीं। इसी प्रकार सदर तहसील में सात, चुनार में 14, मड़िहान में एक और लालगंज में एक संपत्ति निजी पाई गई। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 697 संपत्तियों और उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड ने सात संपत्तियों की सूची दी थी। 23 संपत्तियां निजी हैं।
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पोर्टल पर शुद्धिकरण के बाद होगा निर्णय
उम्मीद पोर्टल पर जो डाटा मिसमैच मिले हैं, उन्हें शुद्ध करने के लिए समय दिया गया है। साथ ही इस बार उसकी हार्ड कॉपी भी सर्वे कमिश्नर के कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। ताकि अगली बार जब जांच हो तो संबंधित पक्ष अपने अभिलेखों को पुष्ट कर सके। इसके बाद ही माना जा रहा है कि सरकार कोई कार्रवाई करेगी। अभी तो यह माना जा रहा है कि फीडिंग में कोई गड़बड़ी हो सकती है। इसीलिए हार्ड कॉपी भी मांगी गई है। इसके बाद में कोई पक्ष मुकर न सके।
कोट
शासन का जो निर्देश आया है। उसी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
रामदत्त प्रजापत,जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी