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Mirzapur News: परगना वार न्यायालय कक्ष की व्यवस्था कराने की मांग
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- हवेली, कृयात, सक्तेशगढ़, अहरौरा व भुईली परगने के न्यायालय संचालन के लिए अलग-अलग कक्ष की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चुनार। तहसील में नायब तहसीलदार न्यायालय के संचालन की व्यवस्था अलग-अलग कक्ष में सुनिश्चित कराने की अधिवक्ताओं ने मांग की है। इस ओर राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
तहसील में एसडीएम न्यायालय और तहसीलदार न्यायालय के संचालन के लिए अलग-अलग कक्ष बने हुए हैं। न्यायिक अधिकारी अपने निर्धारित कक्ष में ही बैठकर मुकदमों की सुनवाई करते हैं। इन न्यायालयों के साथ ही परगनावार नायब तहसीलदार न्यायालय भी संचालित होता है। तहसील में हवेली, कृयात, सक्तेशगढ़, भुईली और अहरौरा कुल पांच परगने हैं, लेकिन इन पांचों परगनों से संबंधित वादों की सुनवाई के लिए न्यायालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। एक कक्ष में ही बारी-बारी से परगनावार मुकदमों की सुनवाई होती है।
न्यायालय कक्ष की पर्याप्त व्यवस्था न होने से न्यायालय का संचालन तहसील स्थित सभागार में बैठकर न्यायिक अधिकारियों को करना पड़ रहा है। इस दौरान तमाम तहसील कर्मियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों का सभागार में आना-जाना लगा रहता है। शोर-शराबा भी होता रहता है। इससे अधिवक्ता न्यायालय के समक्ष अपनी बातों को अच्छी तरह प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं। कभी-कभी शोर-शराबे के चलते मुकदमे की पैरवी करने आने वाले वादी-प्रतिवादी को भी पुकार के दौरान उनकी पत्रावली न्यायालय के समक्ष आने की बात सुनाई नहीं देती है। मुकदमा एकपक्षीय या फिर उभय पक्षों की अनुपस्थिति में खारिज कर दिया जाता है।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि परगनावार नायब तहसीलदार न्यायालय के संचालन के लिए अलग-अलग कक्ष की व्यवस्था हो जाए तो न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को बैठकर न्यायालय संबंधी कार्य करने में काफी सहूलियत होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र नाथ द्विवेदी, बार के अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह, मुन्नू गुप्ता, महेंद्र सिंह, अनमोल सिंह, जंग बहादुर सिंह, राजेश मिश्रा आदि ने मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चुनार। तहसील में नायब तहसीलदार न्यायालय के संचालन की व्यवस्था अलग-अलग कक्ष में सुनिश्चित कराने की अधिवक्ताओं ने मांग की है। इस ओर राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
तहसील में एसडीएम न्यायालय और तहसीलदार न्यायालय के संचालन के लिए अलग-अलग कक्ष बने हुए हैं। न्यायिक अधिकारी अपने निर्धारित कक्ष में ही बैठकर मुकदमों की सुनवाई करते हैं। इन न्यायालयों के साथ ही परगनावार नायब तहसीलदार न्यायालय भी संचालित होता है। तहसील में हवेली, कृयात, सक्तेशगढ़, भुईली और अहरौरा कुल पांच परगने हैं, लेकिन इन पांचों परगनों से संबंधित वादों की सुनवाई के लिए न्यायालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। एक कक्ष में ही बारी-बारी से परगनावार मुकदमों की सुनवाई होती है।
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न्यायालय कक्ष की पर्याप्त व्यवस्था न होने से न्यायालय का संचालन तहसील स्थित सभागार में बैठकर न्यायिक अधिकारियों को करना पड़ रहा है। इस दौरान तमाम तहसील कर्मियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों का सभागार में आना-जाना लगा रहता है। शोर-शराबा भी होता रहता है। इससे अधिवक्ता न्यायालय के समक्ष अपनी बातों को अच्छी तरह प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं। कभी-कभी शोर-शराबे के चलते मुकदमे की पैरवी करने आने वाले वादी-प्रतिवादी को भी पुकार के दौरान उनकी पत्रावली न्यायालय के समक्ष आने की बात सुनाई नहीं देती है। मुकदमा एकपक्षीय या फिर उभय पक्षों की अनुपस्थिति में खारिज कर दिया जाता है।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि परगनावार नायब तहसीलदार न्यायालय के संचालन के लिए अलग-अलग कक्ष की व्यवस्था हो जाए तो न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को बैठकर न्यायालय संबंधी कार्य करने में काफी सहूलियत होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र नाथ द्विवेदी, बार के अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह, मुन्नू गुप्ता, महेंद्र सिंह, अनमोल सिंह, जंग बहादुर सिंह, राजेश मिश्रा आदि ने मांग की है।