{"_id":"6a6e4fcc81188c4bae08df5e","slug":"the-pain-of-not-being-able-to-scale-mount-everest-due-to-financial-constraints-lingers-even-today-mirzapur-news-c-192-1-svns1034-158610-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: तंगी के कारण माउंट एवरेस्ट फतह न कर सकने का आज भी है दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: तंगी के कारण माउंट एवरेस्ट फतह न कर सकने का आज भी है दर्द
विज्ञापन
पर्वतारोही काजल पटेल।- सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस पर विशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
अदलहाट। क्षेत्र के हिनौती गांव की होनहार पर्वतारोही काजल पटेल को तंगी के कारण आज भी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह न कर पाने का गहरा दर्द है। लद्दाख की 18 हजार फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने वाली काजल का सपना आर्थिक तंगी और पैसों के अभाव के कारण आज भी अधूरा है।
एक अगस्त को राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस के मौके पर उसने अपना दर्द बयां किया। जमालपुर ब्लॉक के हिनौती माफी गांव निवासी काजल के पिता संतराम एक साधारण किसान हैं। एनसीसी कैडेट काजल पटेल ने लद्दाख की बेहद कठिन 18,000 फीट ऊंची चोटी फतह करने के साथ हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध संस्थान से एडवांस माउंटेनियरिंग का सफल प्रशिक्षण भी पूरा किया है।
माउंट एवरेस्ट फतह के लिए लाखों रुपये की आवश्यकता होने के कारण बेटी के सपनों को पंख नहीं मिल सके। काजल ने अपने इस सपने को पूरा करने और देश का तिरंगा एवरेस्ट पर लहराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद की कई बार गुहार लगाई, लेकिन सरकारी मदद नहीं मिलने से एवरेस्ट फतह का सपना अधूरा रह गया।
विज्ञापन
पूर्व जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने शासन को मदद के लिए 25 लाख रुपये का पत्र भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से सपना पूरा नहीं हो सका। काजल पटेल ने राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस पर बातचीत में बताया कि एवरेस्ट फतह कर भारतीय तिरंगा नहीं फहरा पाने का दर्द उन्हें आज भी है। यदि सरकार से आर्थिक मदद मिली होती तो निश्चित रूप से सपना पूरा कर देश का तिरंगा विश्व के ऊंचे शिखर पर लहराने का अवसर मिलता।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अदलहाट। क्षेत्र के हिनौती गांव की होनहार पर्वतारोही काजल पटेल को तंगी के कारण आज भी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह न कर पाने का गहरा दर्द है। लद्दाख की 18 हजार फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने वाली काजल का सपना आर्थिक तंगी और पैसों के अभाव के कारण आज भी अधूरा है।
एक अगस्त को राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस के मौके पर उसने अपना दर्द बयां किया। जमालपुर ब्लॉक के हिनौती माफी गांव निवासी काजल के पिता संतराम एक साधारण किसान हैं। एनसीसी कैडेट काजल पटेल ने लद्दाख की बेहद कठिन 18,000 फीट ऊंची चोटी फतह करने के साथ हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध संस्थान से एडवांस माउंटेनियरिंग का सफल प्रशिक्षण भी पूरा किया है।
विज्ञापन
माउंट एवरेस्ट फतह के लिए लाखों रुपये की आवश्यकता होने के कारण बेटी के सपनों को पंख नहीं मिल सके। काजल ने अपने इस सपने को पूरा करने और देश का तिरंगा एवरेस्ट पर लहराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री से आर्थिक मदद की कई बार गुहार लगाई, लेकिन सरकारी मदद नहीं मिलने से एवरेस्ट फतह का सपना अधूरा रह गया।
विज्ञापन
पूर्व जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने शासन को मदद के लिए 25 लाख रुपये का पत्र भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से सपना पूरा नहीं हो सका। काजल पटेल ने राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस पर बातचीत में बताया कि एवरेस्ट फतह कर भारतीय तिरंगा नहीं फहरा पाने का दर्द उन्हें आज भी है। यदि सरकार से आर्थिक मदद मिली होती तो निश्चित रूप से सपना पूरा कर देश का तिरंगा विश्व के ऊंचे शिखर पर लहराने का अवसर मिलता।