संभल में पुनर्वास की पहल: 1978 के दंगा पीड़ित परिवार को मिली जमीन, 46 साल बाद मंदिर में फिर गूंजी घंटियां
संभल में 1978 को अफवाह के बाद भीषण दंगा भड़क गया था।दंगे में लूटपाट, आगजनी और हिंसा की घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई थी तथा 169 मुकदमे दर्ज किए गए थे। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन पर दंगा पीड़ित परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
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संभल में 29 मार्च 1978 को एक अफवाह के कारण दंगा भड़क उठा था। इससे पूरा शहर जल गया था और दो महीने तक कर्फ्यू लगा रहा था। इस दंगे की चर्चा 2024 में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल के बाद फिर से शुरू हुई थी। इसके बाद ही पीड़ित परिवार सामने आए थे। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों की मदद करने का आश्वासन दिया था।
इसी क्रम में एक परिवार को आवासीय भूमि का पट्टा दिया गया है। बताते हैं 1978 के दंगे की शुरुआत मुस्लिम लीग के नेता मंजर शफी के हंगामा करने पर हुई थी। वह उस समय के एसडीएम की किसी बात पर नाखुश था और उसने इसी बात पर बाजार में हंगामा करते हुए दुकानों को बंद कराना चाहा था।
हिंदू व्यापारी मंजर शफी के विरोध में खड़े हो गए थे। इस दौरान खूब मारपीट हुई थी। मंजर शफी के जो साथी मौके से भागे उन्होंने मंजर शफी के मारे जाने की अफवाह फैला दी थी। इसके बाद ही पहले बाजार और फिर पूरे शहर में दंगा भड़क गया था। दुकानों में लूटपाट, पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। इसमें कई लोगों की मौत हुई थी। दंगे के बाद 169 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। जिनमें से तीन पुलिस ने दर्ज कराई थीं।
1978 के दंगे के बाद बंद हुआ मंदिर 46 वर्ष बाद खुला था
शहर के खग्गू सराय में स्थित प्राचीन शिव मंदिर का ताला 46 वर्ष बाद पुलिस-प्रशासन ने खोला था। यह मंदिर 1978 के दंगों के बाद से बंद था। दंगे में दर्ज 16 प्राथमिकी में हत्या, लूट, आगजनी और बलवा जैसे गंभीर आरोप थे। 1993 में आठ मुकदमे वापस हो गए थे। जबकि बाकी आठ की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं है। पीड़ित परिवार न्याय नहीं मिलने का हवाला देते हैं। वर्ष 2024 में ही कई परिवार सामने आए थे। 2024 के बवाल की जांच के लिए गठित हुए न्यायिक जांच आयोग के सामने भी इन पीड़ित परिवारों ने आवाज उठाई थी।
प्रभारी मंत्री ने दंगा पीड़ितों के पुनर्वास को बताया ऐतिहासिक
जिले के प्रभारी मंत्री जेपीएस. राठौर ने कहा कि वर्ष 1978 के दंगों से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का यह पल भावुक है। कहा कि यह एक एेतिहासिक कदम भी है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में शांतिपूर्ण वातावरण है। शासन, प्रशासन और पुलिस ने सभी वर्गों को न्याय दिलाने का कार्य किया है।
प्रदेश अब दंगामुक्त वातावरण की ओर बढ़ रहा है। कानून का राज स्थापित हुआ है। दंगा पीड़ित परिवारों ने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। अब उनके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का नया अध्याय शुरू हो रहा है।
राठौर ने अधिकारियों को अन्य दंगा प्रभावित परिवारों के मामलों का भी शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि इन परिवार को अब आजादी मिली है। वैसे तो देश 1947 में आजाद हो चुका है लेकिन दंगा पीड़ित परिवारों को संभल में अब आजादी मिली है।
1978 के दंगा पीड़ित परिवार को दिया भूमि का पट्टा
संभल शहर में 1978 के दंगे से पीड़ित परिवार के साथ न्याय हुआ। 48 वर्ष बाद पीड़ित परिवार को 100 वर्गमीटर का आवासीय भूमि का पट्टा आवंटित किया गया है। इस आवंटन के अभिलेख जिले के प्रभारी मंत्री जेपीएस राठौर ने पीड़ित परिवार को सौंपे। साथ ही भूमि पूजन कर नींव भी रखी गई है। इस दाैरान पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी व भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह मौजूद रहे।
बृहस्पतिवार को जिले के प्रभारी मंत्री ने शेरखां सराय में रुक्मन रस्तोगी को भूमि का पट्टाभिलेख सौंपा। यह पट्टा दिवंगत रामशरण रस्तोगी के बेटे सुभाष चंद्र की पत्नी रुक्मनी रस्तोगी को सौंपा गया है। वर्ष 1978 में 29 मार्च के दंगे में रामशरण रस्तोगी की हत्या हो गई थी। उनके बेटे सुभाष चंद्र रस्तोगी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला था।
इसके बाद परिवार संभल से पलायन कर गया था। पिछले वर्ष रामशरण रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने अपनी माता के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर रामशरण की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी को यह भूमि आवंटित की गई है।
डीएम ने कहा कि पुनर्वास की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। डीएम ने बताया कि आवंटित भूमि पर पहले कब्रिस्तान की भूमि बताकर अवैध कब्जा कर लिया था, जिसे कब्जामुक्त कराया गया था।