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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   :Sambhal Violence and Jauhar University Row Set to Dominate Western UP Poll Battle

UP: चुनावी रण में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं संभल हिंसा, जौहर विवि; चुनाव में बर्क या इकबाल परिवार का ही वर्चस्व

Thu, 06 Aug 2026 04:26 PM IST
Sharukh Khan मृगांक पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
मृगांक पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 06 Aug 2026 04:26 PM IST
सार

पश्चिमी यूपी के चुनावी रण में संभल हिंसा और जौहर विवि बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। भाजपा संभल बवाल की रिपोर्ट से घेरेगी तो सपा जौहर यूनिवर्सिटी के हवाले से पलटवार करेगी। चुनाव के लिहाज से संभल मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट की सदन में प्रस्तुति का समय महत्वपूर्ण है।
 

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:Sambhal Violence and Jauhar University Row Set to Dominate Western UP Poll Battle
योगी आदित्यानाथ और अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी विधानसभा के चुनाव में भले वक्त है लेकिन इसे लेकर जमीनी स्तर पर राजनीतिक हलचल दिनों दिन तेज होती जा रही है। सूबे के प्रमुख दल भाजपा और सपा मतदाताओं का रुख अपनी ओर करने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। 
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आने वाले चुनाव में जहां राम मंदिर का चंदा-चढ़ावा चोरी प्रमुख विपक्षी दल सपा और कांग्रेसियों की जुबान पर रहेंगे तो भाजपा संभल में 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल की याददाश्त ताजा कराके सपा को घेरेगी। रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी का विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनना भी तय माना जा रहा है।
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सपा छात्रों के भविष्य और शिक्षा का हवाला देकर यूनिवर्सिटी को अपनी तकरीरों में पेश करेगी तो भाजपा इस यूनिवर्सिटी की संग-ए-बुनियाद पड़ने से लेकर अल्पसंख्यक दर्जे के साथ इसके चालू होने पर सपा की तत्कालीन सरकार और पार्टी के दिग्गज आजम खां के अनूठे फैसलों से सपा को काउंटर करेगी। सियासी संकेत इशारा दे रहे हैं कि पश्चिमी यूपी के चुनावी रण में मुरादाबाद मंडल के दोनों विषय (संभल हिंसा और जौहर विवि) बड़ा मुद्दा बनेंगे।
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राजनीति में गहराई से दिलचस्पी रखने वाले मान रहे हैं कि संभल हिंसा मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर पेश होने का वक्त चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। जांच आयोग ने न सिर्फ संभल हिंसा को सोची-समझी साजिश बताया है बल्कि संभल के दो सियासी दिग्गज सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। 

न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट में शामिल तथ्यों पर सदन में पक्ष-विपक्ष की गर्मागर्म बहस होना तय है। माना जा रहा है कि सदन से निकलकर यह बहस संभल के स्थानीय नेताओं और फिर पश्चिमी यूपी के आम लोगों के बीच की चर्चा बनेगी। इसके साथ ही शुरू हो जाएगा मतदाताओं के दो विचारों में बंटने और जुटने का दौर।

 

संभल के दंगों के इतिहास का हवाला भी दिया
जानकार बताते हैं कि न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 के बवाल के अलावा संभल के दंगों के इतिहास का हवाला भी दिया है। बताया है कि पुराने दौर में कैसे संभल में समय-समय पर दंगे कराके हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर किया गया था। साथ ही हिंदू-मुस्लिम आबादी के समीकरण बदलकर चुनावी लाभ लिया गया था। 

 

पुराने दंगों की ये यादें और बातें निश्चिततौर पर अरसे से प्रभावित रहे हिंदू समाज को गैरभाजपाई दलों से दूर करेंगी। अगर यह हुआ तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। साथ ही नवंबर 2024 के बवाल में सपा सांसद बर्क और सपा विधायक इकबाल के बेटे सुहेल की भूमिका का हवाला चुनाव के समय दोनों नेताओं की घेराबंदी का बड़ा आधार बनेगा।

चुनाव में बर्क या इकबाल परिवार का ही वर्चस्व आता है नजर
संभल के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि चुनाव कोई भी हो लेकिन हर नतीजे में बर्क या इकबाल परिवार का ही वर्चस्व नजर आता है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों सियासी दिग्गज सपा के होने के बाद भी एक-दूसरे से दूरी बनाए रहते हैं लेकिन दोनों के मतभेद के बाद भी अक्सर चुनाव के नतीजे सपा के पक्ष में ही आते हैं। 

 

इसका कारण वहां मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता है। हिूंद-मुस्लिम अनुपात का संदर्भ न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में है, जिसमें पुराने दंगों से घबराकर हिंदुओं के पलायन का हवाला दिया गया है। आने वाले चुनाव के प्रचार में मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिशों के बीच यह बात प्रमुखता से उठना तय माना जा रहा है।
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