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Moradabad News: नौ घंटे अंधेरे में रहा सरोवर नगर, पानी को तरस गए लोग

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:16 AM IST
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Sarovar Nagar remained in darkness for nine hours, people were thirsty for water.
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मुरादाबाद। भीषण गर्मी के बीच बुधवार को सरोवर नगर, शास्त्री नगर और मानसरोवर कॉलोनी के हजारों लोगों को बिजली संकट ने बेहाल कर दिया। सुबह सात बजे आंधी के बाद से लेकर शाम चार बजे तक पूरे इलाके में बिजली गुल रही। लोगों का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया। सबसे ज्यादा परेशानी पानी को लेकर हुई, क्योंकि बिजली न होने से मोटरें बंद रहीं और घरों में एक बूंद पानी तक नहीं पहुंच सका।
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हालात इतने खराब रहे कि इनवर्टर भी जवाब दे गए और मोबाइल चार्ज करने के लिए लोग इधर-उधर भटकते नजर आए। लोगों ने जब विद्युत निगम के जेई और सहायक अभियंता को फोन मिलाया तो या तो कॉल उठाई ही नहीं गई या फिर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बिजलीघर से बार-बार थोड़ी देर में आपूर्ति बहाल होगी का रटा-रटाया जवाब मिलता रहा, लेकिन यह थोड़ी देर पूरे नौ घंटे में बदल गई।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इलाके में बार-बार लंबी कटौती होती रही है। विद्युत निगम न तो पहले सूचना देता है और न ही समस्या का समय पर समाधान करता है। हैरानी की बात यह रही कि सहायक अभियंता तक को यह जानकारी नहीं थी कि बिजली आखिर क्यों गई है।

मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि दो स्थानों पर हाईटेंशन लाइन टूटने के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी। शाम चार बजे बिजली आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन व्यवस्था के प्रति गुस्सा साफ नजर आया। एई संजय शर्मा ने बताया कि हाईटेंशन लाइन टूटने के कारण बिजली बाधित रही।



लोगों की बात

सुबह से बच्चे और बुजुर्ग पानी के लिए परेशान रहे। एक बाल्टी पानी तक नहीं मिला। विद्युत निगम को कई बार फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। इतनी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यह जनता के साथ अन्याय है।
- राहुल पाल


हर बार यही होता है, बिना सूचना के घंटों बिजली गायब रहती है। इनवर्टर भी जवाब दे गया। मोबाइल चार्ज करने के लिए बाहर जाना पड़ा। अधिकारी फोन नहीं उठाते, ऐसे में जनता आखिर किससे अपनी समस्या बताए, समझ नहीं आता।
- मयंक वर्मा


भीषण गर्मी में नौ घंटे बिजली कटौती किसी सजा से कम नहीं है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हुए। विभाग को पहले से सूचना देनी चाहिए थी और मरम्मत भी जल्दी करनी चाहिए थी, लेकिन यहां सब कुछ लापरवाही से चलता है।
- विनोद कुमार


हमने बिजलीघर पर कई बार कॉल की। हर बार कहा गया कि बस थोड़ी देर में लाइट आ जाएगी। यह थोड़ी देर पूरे दिन में बदल गई। अगर सही जानकारी दे देते तो लोग वैकल्पिक व्यवस्था कर लेते, लेकिन यहां सिर्फ बहानेबाजी होती है।
- आयुष यादव


पानी की सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। मोटर नहीं चला, टंकी खाली हो गई। पड़ोस से पानी मांगकर काम चलाना पड़ा। इतनी बड़ी कॉलोनी में यह हाल है तो छोटे इलाकों में क्या होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
- विमल डे

अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। फोन नहीं उठाना उनकी आदत बन गई है। जनता परेशान होती रहे, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर यही हाल रहा तो लोगों का गुस्सा कभी भी सड़कों पर फूट सकता है।
- जीवन सिंह
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