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Moradabad News: ट्रॉमा सेंटर नौ साल बाद भी अधूरा, न्यूरो सर्जन की नहीं हुई नियुक्ति
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल में बनाया गया ट्रॉमा सेंटर नौ साल बाद भी अधूरा है। यहां न तो पर्याप्त मशीनें हैं और न ही अब तक न्यूरो सर्जन की तैनाती की गई है। जिसके कारण सिर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट वाले मरीजों को तत्काल विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पाता है। जिस कारण इन घायलों को रेफर कर दिया जाता है।
मुरादाबाद जिले से लखनऊ- दिल्ली हाईवे गुजर रहा है। जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और सिर की चोटों के घायलों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। इन घायलों को तत्काल अच्छा और बेहतर इलाज मिल सके और इनकी जान बचाई जा सके। इसी मकसद के साथ नौ साल पहले लाखों की कीमत में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया था लेकिन अब तक न तो पर्याप्त मशीन यहां लगी हैं और न ही न्यूरो सर्जन की तैनाती हुई है। जिस कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ट्रॉमा सेंटर में जरूरी चिकित्सा मशीनें और उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। मशीनों की कमी के कारण भी कई महत्वपूर्ण जांच और उपचार संभव नहीं हो पाते हैं।
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मेडिकल वार्ड बनकर रह गया ट्रॉमा सेंटर
मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में सालों पहले ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया था। योजना यह थी कि मंडल के रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर के गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए यहां भेजा जाएगा लेकिन जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर केवल मेडिकल वार्ड बनकर रह गया है।
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ट्रॉमा सेंटर के लिए न्यूरो सर्जन के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर न्यूरो सर्जन की तैनाती होगी।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
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मुरादाबाद जिले से लखनऊ- दिल्ली हाईवे गुजर रहा है। जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और सिर की चोटों के घायलों को जिला अस्पताल भेजा जाता है। इन घायलों को तत्काल अच्छा और बेहतर इलाज मिल सके और इनकी जान बचाई जा सके। इसी मकसद के साथ नौ साल पहले लाखों की कीमत में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया था लेकिन अब तक न तो पर्याप्त मशीन यहां लगी हैं और न ही न्यूरो सर्जन की तैनाती हुई है। जिस कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ट्रॉमा सेंटर में जरूरी चिकित्सा मशीनें और उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। मशीनों की कमी के कारण भी कई महत्वपूर्ण जांच और उपचार संभव नहीं हो पाते हैं।
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मेडिकल वार्ड बनकर रह गया ट्रॉमा सेंटर
मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय के जिला अस्पताल में सालों पहले ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया था। योजना यह थी कि मंडल के रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर के गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए यहां भेजा जाएगा लेकिन जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर केवल मेडिकल वार्ड बनकर रह गया है।
ट्रॉमा सेंटर के लिए न्यूरो सर्जन के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर न्यूरो सर्जन की तैनाती होगी।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक