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Muzaffarnagar News: करोड़ों रुपये के जीएसटी गड़बड़ी में जुनैद सैफी की जमानत खारिज

Sun, 09 Aug 2026 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:24 PM IST
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Junaid Saifi's bail rejected in multi-crore rupee GST fraud case.
अदालत से
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- बोगस फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग का मामला

अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। बोगस फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के आरोपी जुनैद सैफी की जमानत याचिका सत्र अदालत ने खारिज कर दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी कबाड़ का वास्तविक कारोबार नहीं करता। उसने कागजों पर फर्जी बिलिंग का नेटवर्क चलाकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया है।
वाणिज्य कर विभाग के उपायुक्त एलएस शरण की रिपोर्ट पर 31 मार्च 2021 को मंसूरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच में सामने आया कि मैसर्स राजकमल ट्रेडर्स के मालिक जुनैद सैफी ने कर चोरी के लिए एक बोगस फर्म बनाई। इस फर्म ने वर्ष 2019-20 में 2461.96 लाख रुपये की इनवार्ड आपूर्ति प्रदर्शित की।
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जबकि 2020-21 (नवंबर तक) में 3120.06 लाख रुपये की आपूर्ति दिखाई गई। कुल मिलाकर, फर्म ने लगभग 55.82 करोड़ रुपये की इनवार्ड आपूर्ति दिखाई।
आंकड़ा विश्लेषण से पता चला कि आपूर्ति श्रृंखला में शामिल अंतिम आपूर्तिकर्ताओं की ओर से न तो कोई वास्तविक माल भेजा गया और न ही कोई कर जमा किया गया। आरोपी ने फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये का अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया। विभाग ने तत्काल 17.12 लाख रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक कर दी थी।
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वाणिज्य कर विभाग ने 22 दिसंबर 2020 को छापेमारी की थी। व्यापार स्थल पर कोई स्टॉक रजिस्टर या वैध लेखा-पुस्तकें नहीं मिलीं। जांच में एक ही नंबर वाली दो समानांतर बिल बुक जब्त की गईं, जिनमें प्रविष्टियों पर ओवरराइटिंग थी। माल परिवहन के लिए पेश की गईं परिवहन कंपनियों की बिल्टियां भी फर्जी पाई गईं।

तिवारी ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक जितेंद्र तिवारी ने ऐसी कोई बिल्टी जारी करने से इन्कार किया, यह कहते हुए कि वह केवल सब्जी ढोते हैं और कबाड़ नहीं।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि जीएसटी पोर्टल पर सभी जीएसटीआर-3बी और जीएसटीआर-1 विवरण नियमानुसार अपलोड किए गए थे। आरोपी को संदेह के आधार पर पांच साल बाद इसी साल 11 जून को गिरफ्तार किया गया।
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