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Muzaffarnagar News: यूट्यूब से सीखा ठगी का तरीका, ठगे 13 लाख रुपये व 14.97 लाख डमी नोट बरामद
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मुजफ्फरनगर। शहर कोतवाली और एसओजी की संयुक्त टीम ने व्यापारी से 13 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के राजस्थान निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो आरोपी रिश्ते के भाई हैं। उनसे ठगी के 13 लाख रुपये नकद और 14.97 लाख डमी नोट बरामद किए हैं। गिरोह ने यूट्यूब से ठगी का तरीका सीख कर ठगी की। यह गिरोह लोगों का विश्वास जीतकर ठगी की वारदात को अंजाम देता था।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता कर बताया कि नावल्टी चौक के पास उत्तर प्रदेश मशीनरी स्टोर के नाम से दुकान करने वाले नॉर्थ सिविल लाइन निवासी संदीप कुच्छल ने शिकायत की थी कि दिल्ली से सामान खरीदने के कारण दिल्ली निवासी व्यापारी विपुल से उनका लेन-देन चलता है।
कई दिन पहले आरके शर्मा नामक के व्यक्ति ने वॉट्सएप कॉल से संपर्क कर कहा कि यदि उन्हें दिल्ली या अन्य किसी स्थान पर नगद पैसे भिजवाने हों तो हम लोग कमीशन पर पैसे भेज देते हैं। इसके बाद उन्होंने आरके शर्मा के माध्यम से 2-3 बार दो से ढाई लाख रुपये भिजवाए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया।
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संदीप ने दिल्ली में विपुल को 13 लाख रुपये भिजवाने के लिए आरके शर्मा के पास रुपये भिजवा दिए। लेकिन दिल्ली में विपुल को असली नोट की जगह डमी 15 लाख रुपये दिए। इनमें छह हजार रुपये असली थे। घर जाकर देखने पर व्यापारी को ठगी का पता चला। तो उसने संदीप कुच्छल को बताया।
एसएसपी ने बताया कि शहर कोतवाली व एसओजी टीम ने इस गिरोह के नगर के न्याजूपुरा में वारदात करने आने की सूचना पर पहुंच कर तीन आरोपियों राजस्थान के बीकानेर थाना नापासर के गांव शरेरा निवासी श्रीराम उर्फ सुनील, थाना लूणकरणसर के गांव बामनवाली निवासी प्रदीप व जनपद श्रीगंगानगर के थाना राजियासर के गांव देईदासपुरा निवासी ब्रहमदेव को गिरफ्तार किया गया। उनसे ठगी के 13 लाख रुपये नकद और 14.97 लाख डमी नोट बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी ब्रहमदेव बुआ व प्रदीप मामा का बेटे हैं। गिरफ्तार आरोपी युवा हैं और कक्षा बारह तक शिक्षित हैं। आरोपियों का चालान कर दिया गया।
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एक आरोपी का पिता करता था हवाला का काम
आरोपियों ने बताया कि श्रीराम के पिता महावीर पूर्व समय में हवाला के माध्यम से रुपये भेजने का काम करते थे। इस बारे में श्रीराम जानता था। इसके बाद श्रीराम ने अपने दोस्त प्रदीप के साथ मिलकर शॉर्टकट से रुपये कमाने के लिए यूट्यूब से ठगी का तरीका सीखा। दोनों ने मिलकर यमुनानगर हरियाणा में कार्यालय खोल लिया। श्रीराम के पिता के पास संदीप कुच्छल का मोबाइल नंबर था, क्योंकि उसने पहले भी रुपये भिजवाए थे। प्रदीप व श्रीराम उर्फ सुनील ने फर्जी आईडी पर सिम लेकर व आरके शर्मा बनकर संदीप कुच्छल से संपर्क किया। 13 लाख रुपये ठगने के लिए उन्होंने कागज को काटकर नोट के आकार वाली पांच सौ के नोटों वाली पांच-पांच लाख रुपये की तीन गड्डियां तैयार की। उन पर आईसीआईसीआई बैंक की चिट भी लगाई ताकि वह नोट असली जैसे लगे। यह गड्डियां दिल्ली में व्यापारी विपुल को पहुंचाई। 15 लाख रुपये की गड्डियां दी गईं। संदीप को बताया कि 15 लाख रुपये का भुगतान किया है। वह दो लाख रुपये बाद में उन्हें दे दें। ठगी का पता चला तो मामला पुलिस तक पहुंचा था।
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता कर बताया कि नावल्टी चौक के पास उत्तर प्रदेश मशीनरी स्टोर के नाम से दुकान करने वाले नॉर्थ सिविल लाइन निवासी संदीप कुच्छल ने शिकायत की थी कि दिल्ली से सामान खरीदने के कारण दिल्ली निवासी व्यापारी विपुल से उनका लेन-देन चलता है।
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कई दिन पहले आरके शर्मा नामक के व्यक्ति ने वॉट्सएप कॉल से संपर्क कर कहा कि यदि उन्हें दिल्ली या अन्य किसी स्थान पर नगद पैसे भिजवाने हों तो हम लोग कमीशन पर पैसे भेज देते हैं। इसके बाद उन्होंने आरके शर्मा के माध्यम से 2-3 बार दो से ढाई लाख रुपये भिजवाए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया।
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संदीप ने दिल्ली में विपुल को 13 लाख रुपये भिजवाने के लिए आरके शर्मा के पास रुपये भिजवा दिए। लेकिन दिल्ली में विपुल को असली नोट की जगह डमी 15 लाख रुपये दिए। इनमें छह हजार रुपये असली थे। घर जाकर देखने पर व्यापारी को ठगी का पता चला। तो उसने संदीप कुच्छल को बताया।
एसएसपी ने बताया कि शहर कोतवाली व एसओजी टीम ने इस गिरोह के नगर के न्याजूपुरा में वारदात करने आने की सूचना पर पहुंच कर तीन आरोपियों राजस्थान के बीकानेर थाना नापासर के गांव शरेरा निवासी श्रीराम उर्फ सुनील, थाना लूणकरणसर के गांव बामनवाली निवासी प्रदीप व जनपद श्रीगंगानगर के थाना राजियासर के गांव देईदासपुरा निवासी ब्रहमदेव को गिरफ्तार किया गया। उनसे ठगी के 13 लाख रुपये नकद और 14.97 लाख डमी नोट बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी ब्रहमदेव बुआ व प्रदीप मामा का बेटे हैं। गिरफ्तार आरोपी युवा हैं और कक्षा बारह तक शिक्षित हैं। आरोपियों का चालान कर दिया गया।
एक आरोपी का पिता करता था हवाला का काम
आरोपियों ने बताया कि श्रीराम के पिता महावीर पूर्व समय में हवाला के माध्यम से रुपये भेजने का काम करते थे। इस बारे में श्रीराम जानता था। इसके बाद श्रीराम ने अपने दोस्त प्रदीप के साथ मिलकर शॉर्टकट से रुपये कमाने के लिए यूट्यूब से ठगी का तरीका सीखा। दोनों ने मिलकर यमुनानगर हरियाणा में कार्यालय खोल लिया। श्रीराम के पिता के पास संदीप कुच्छल का मोबाइल नंबर था, क्योंकि उसने पहले भी रुपये भिजवाए थे। प्रदीप व श्रीराम उर्फ सुनील ने फर्जी आईडी पर सिम लेकर व आरके शर्मा बनकर संदीप कुच्छल से संपर्क किया। 13 लाख रुपये ठगने के लिए उन्होंने कागज को काटकर नोट के आकार वाली पांच सौ के नोटों वाली पांच-पांच लाख रुपये की तीन गड्डियां तैयार की। उन पर आईसीआईसीआई बैंक की चिट भी लगाई ताकि वह नोट असली जैसे लगे। यह गड्डियां दिल्ली में व्यापारी विपुल को पहुंचाई। 15 लाख रुपये की गड्डियां दी गईं। संदीप को बताया कि 15 लाख रुपये का भुगतान किया है। वह दो लाख रुपये बाद में उन्हें दे दें। ठगी का पता चला तो मामला पुलिस तक पहुंचा था।