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प्रबल हत्याकांड: 14 साल और 352 तारीख... बहन प्राची ने ऐसे लड़ी इंसाफ की लड़ाई; धरा रह गया रसूख और पैसा

Sat, 01 Aug 2026 12:03 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर Published by: Mohd Mustakim Updated Sat, 01 Aug 2026 12:03 AM IST
सार

Bijnor News: प्रबल अग्रवाल की हत्या में शुक्रवार को कोर्ट ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही तत्कालीन एसपी, एएसपी सिटी, सीओ और विवेचकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं। वहीं सजा होने के बाद दोषियों के पक्ष में नारेबाजी भी की गई। 

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Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
प्रबल की फाइल फोटो और इंसाफ मिलने पर छलके प्राची के आंसू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

14 साल पहले अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान हुए प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महिला आयोग की सदस्य के पति और पुत्र समेत सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 1.25 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। समारोह में एक युवती से बात करने के आरोप में प्रबल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और शव गंगा में फेंक दिया था। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजाद अली ने दिया।
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Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
सजा होने के बाद जेल जाते हत्यारे और नारे लगाते उनके परिजन। - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2012 में हुई प्रबल की हत्या में सजा पाने वालों में महिला आयोग की सदस्य संगीता अग्रवाल के पति विनय अग्रवाल और पुत्र अपूर्व अग्रवाल भी शामिल हैं। दोषियों पर लगाए गए अर्थदंड की धनराशि में 90 फ़ीसदी रकम प्रबल की बहन को दी जाएगी। अभियोजन के मुताबिक आलोक अग्रवाल की ओर से शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 
बताया था कि 19 दिसंबर 2012 की रात आठ बजे बिजनौर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित अग्रसेन जयंती समारोह में उनका बेटा प्रबल अग्रवाल शहर के ही आशीष अग्रवाल और सचिन अग्रवाल के साथ गया था। वहां एक युवती से बात करने का आरोप लगाते हुए प्रबल को पीटा गया। कुछ लोगों ने बीच-बचाव करते हुए छुड़ाने का प्रयास भी किया। लेकिन आरोपी शराब के नशे में थे और वे प्रबल से पीटते हुए कहीं ले गए। 
 
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Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
रोने लगा दोषी अनुज गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
जांच में सामने आया कि प्रबल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना छिपाने के लिए शव गंगा में फेंक दिया गया। 15 जनवरी 2013 को प्रबल का शव मेरठ के हस्तिनापुर स्थित गंगा खादर क्षेत्र में मिला था। इस मामले में पुलिस ने 18 मई 2013 को आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। इसके बाद आशु अग्रवाल के खिलाफ 26 जुलाई 2013 को दूसरा आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान सात आरोपियों को दोषी पाया। शुक्रवार को इन सभी सातों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और जेल भेज दिया गया। इससे पूर्व सभी आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे थे।
 
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Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
दोषियों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
इन्हें हुई सजा
संजय गुप्ता पुत्र एसके गुप्ता निवासी मोहल्ला बाजार संभा
विनय अग्रवाल पुत्र सुरेंद्र प्रसाद अग्रवाल निवासी कृष्ण प्लाजा मार्केट
अपूर्व अग्रवाल पुत्र विनय अग्रवाल निवासी कृष्ण प्लाजा मार्केट
निखिल अग्रवाल पुत्र रविंद्र कुमार अग्रवाल निवासी मोहल्ला जाटान
राहुल गुप्ता पुत्र राजवीर गुप्ता निवासी मोहल्ला खत्रियान
अनुज गुप्ता पुत्र घनश्याम दास गुप्ता निवासी नई बस्ती बिजनौर
आशीष उर्फ आशु अग्रवाल पुत्र राजेंद्र अग्रवाल निवासी मोहल्ला जाटान
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
सजा होने के बाद दोषियों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट की टिप्पणी: केस को कमजोर करने के लिए पुलिस ने सही तरीके से विवेचना नहीं की
अदालत ने फैसले में पुलिस की विवेचना पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि केस को कमजोर करने के लिए पुलिस ने सही तरीके से विवेचना नहीं की। इसके चलते अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक सिटी, क्षेत्राधिकारी और तीन विवेचकों के खिलाफ विभागीय जांच, कानूनी कार्रवाई करने तथा उक्त कार्रवाई से अदालत को छह महीने के अंदर अवगत कराने के आदेश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। उधर एक बाल अपचारी की पत्रावली को किशोर न्याय बोर्ड में भेज दिया गया था।
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
नाराजगी जताते दोषियों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
सजा सुनाते ही एक तरफ गम तो दूसरी ओर आंखों से छलके खुशी के आंसू
फैसला आते ही कोर्ट परिसर में मायूसी, राहत और न्याय मिलने की संतुष्टि के भाव एक साथ नजर आए। सात दोषियों की आंखों से आंसू झलक पड़े। प्रबल की बहन प्राची की आंखों से भाई को इंसाफ मिलने की खुशी आंसू बनकर छलक पड़ी।
शुक्रवार दोपहर दो बजे प्रबल की हत्या के दोषियों को सजा सुनाई जानी थी। करीब सवा दो बजे सभी सातों दोषियों को कोर्ट में पेश किया गया। सभी दोषियों और उनके परिजनों के चेहरे पर सजा से पहले ही डर साफ नजर आया। कुछ देर बाद ही जज ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
जेल जाता दोषी संजय गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
दोषी और परिजनों ने लगाए अंधा कानून के नारे
सजा के बाद कोर्ट से बाहर निकले दोषियों और उनके परिजनों में रोष नजर आया। दोषी विनय अग्रवाल, उनकी पुत्रवधू सहित अन्य लोगों ने कानून अंधा है जैसे नारे लगाए। उसकी पुत्रवधू ने कहा कि घटना के समय दो हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे, कहां हैं वो लोग। सिर्फ इन लोगों को ही सजा सुनाई गई है।
कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल रहा मुस्तैद
दोषियों को सजा सुनाए जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत से बाहर निकालकर पुलिस वाहन तक पहुंचाया गया।
लोग बोले, भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती
सजा होने के बाद कोर्ट परिसर में लोग चर्चा करते दिखे। बोले, भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती है। आदमी को ज्यादा बढ़कर बात नहीं करनी चाहिए। भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। आखिर प्रबल को इंसाफ मिल ही गया।
 

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फैसले के दौरान कचहरी परिसर में लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल हत्याकांड टाइमलाइन
-19 दिसंबर 2012 की रात बिजनौर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में प्रबल की हत्या
-15 जनवरी 2013 को हस्तिनापुर गंगा क्षेत्र से मिला प्रबल का शव
-16 जनवरी 2013 को मेरठ में हुआ प्रबल का पोस्टमार्टम
-19 जनवरी 2013 को मुख्य आरोपी संजय गुप्ता की गिरफ्तारी हुई
-26 जुलाई 2013 को पुलिस ने केस में आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया
-29 जुलाई 2026 को मुकदमे में सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया
-31 जुलाई 2026 को सातों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
कचहरी में कोर्ट के बाहर लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
दोष सिद्ध होने के बाद चेहरे पर मुस्कान थी, सजा मिलते ही नम हो गईं आंखें
प्रबल की हत्या में कोर्ट ने 29 जुलाई को दोषी ठहराया। उस दिन दोष सिद्ध पर दोषी संजय गुप्ता मुस्कुराते हुए नजर आया था लेकिन जब 31 जुलाई को सजा सुनाई गई तो उसके चेहरे से मुस्कान गायब हो गई और आंखें नम दिखाई दीं। अन्य दोषियों और उनके परिजनों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। 

इन 17 गवाहों की हुई गवाही
कोर्ट में प्राची अग्रवाल, प्रवीण कुमार, अनुराग रस्तोगी, मुकेश कुमार, अतुल कुमार अग्रवाल, स्वराज सिंह, मदन, सोनू शर्मा, डॉ. प्रमोद कुमार, सेवानिवृत्त सिपाही किशोरीलाल, राजकुमार अग्रवाल अरविंद कुमार, सेवानिवृत्त सीओ सुनील कुमार, सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अब्दुल सलाम, सेवानिवृत्त सीओ सूर्यनाथ यादव, डीसीपी गिरीश चंद्र शर्मा, सीओ ट्रैफिक राकेश वशिष्ठ के बयान दर्ज कराए गए। 

मेरठ में हुआ था पोस्टमार्टम, स्पष्ट नहीं हुआ था मौत का कारण
16 जनवरी 2013 को मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल संयुक्त चिकित्सालय में प्रबल का पोस्टमार्टम किया गया था। 15 जनवरी 2013 को हस्तिनापुर गंगा क्षेत्र में प्रबल का शव वहां एक स्थानीय व्यक्ति को मिला था। 26 दिन गंगा के पानी में शव पड़ा रहने से बुरी तरह क्षतविक्षत हो गया था। इस कारण डॉक्टर तत्काल मौत का कारण तय नहीं कर सके थे और विसरा जांच के लिए भेज दिया था। 
केस डायरी में मौजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, शव तीन सप्ताह से ज्यादा पुराना बताया गया था। शव में सड़न इतनी अधिक थी कि शरीर का रंग हरा-काला पड़ चुका था। त्वचा कई स्थानों से उधड़ चुकी थी और चेहरा, गर्दन व शरीर के अन्य हिस्सों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। आंखें, जीभ और कई मुलायम ऊतक पूरी तरह नष्ट हो चुके थे।
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
फैसले पर नाराजगी जताती एक दोषी की परिजन। - फोटो : अमर उजाला
केस लड़ने को तैयार नहीं थे वकील, बहन ने वकालत में लिया दाखिला
शुरुआत में प्रबल का केस लड़ने को वकील तैयार नहीं थे तो बहन प्राची ने वकालत की पढ़ाई करने की ठानी और एलएलबी में दाखिला लिया। हालांकि शादी होने के बाद वकालत की पढ़ाई बीच में छूट गई। सिर्फ दो साल तक ही एलएलबी की पढ़ाई कर सकीं। प्राची ने गणित से एमएससी, बीएड और एमफिल की डिग्री हासिल कर रखी है।
उधर प्रबल भी बीकॉम करने के बाद सीए की तैयारी में लगा था। प्राची ने बताया कि शुरुआत में प्रबल का केस लड़ने के लिए वकील तैयार नहीं हुए। बाद में सत्यपाल जंघाला ने केस लड़ने पर हामी भरी। इसी बीच एमएससी, एमफिल होने के बाद भी प्राची ने खुद वकील बनने का मन बनाया। 2014 में कृष्णा कॉलेज में दाखिला भी लिया और दो साल तक वकालत की पढ़ाई। 2016 में शादी और ससुराल चले जाने की वजह से वकालत की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी। उधर प्रबल का केस लड़ रहे अधिवक्ता सत्यपाल जंघाला की कोरोना काल में मृत्यु हो गई। इसके बाद प्राची को इस केस में कोई वकील नहीं मिला। अमरोहा और मेरठ से भी वकील बुलाए गए। प्राची बताती हैं कि दूसरे जिलों से वकील बुलाने के लिए खर्च ज्यादा आ रहा था। कोरोनाकाल के बाद अहमद जखावत ने इस केस को लड़ने की जिम्मेदारी ली।
 

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जेल जाते हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
मुकर गए थे 12 गवाह, पांच गवाही से सजा के अंजाम तक पहुंचा मुकदमा
प्राची ने बताया कि इस केस में 17 गवाह थे, जिनमें से 12 मुकर गए। सिर्फ पांच ने ही पक्ष में गवाही दी। प्रबल के मामा राजकुमार, रिश्ते के चाचा अनुराग रस्तोगी और प्राची की गवाही अहम रही। वहीं हस्तिनापुर के रहने वाले प्रवीण कुमार और अरविंद कुमार ने भी गवाही दी। बता दें कि हस्तिनापुर के पास गंगा नदी के तट पर झाड़ियों में सबसे पहले शव प्रवीण कुमार और अरविंद कुमार ने ही देखा था। 

ये है दोषियों की प्रोफाइल
विनय अग्रवाल- महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन अग्रवाल का पति है और इलेक्ट्रिक स्कूटी का शोरूम है।
अपूर्व अग्रवाल- महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन अग्रवाल का बेटा है और ज्वैलरी की दुकान खोल रखी है।
संजय गुप्ता- रामलीला सेवा समिति का संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता
राहुल गुप्ता- लोहा सरिया, सीमेंट का कारोबारी
अनुज गुप्ता- घनश्याम गुप्ता चक्की वालो का बेटा है और एक निजी कंपनी में जॉब भी की
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
14 साल पहले परिजनों ने इंसाफ के लिए किया था हंगामा। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रबल हत्याकांड में 13 अन्य बनाए जा सकते हैं आरोपी
प्रबल हत्याकांड में सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस केस में 13 अन्य लोगों को आरोपी बनाया जा सकता है। हाईकोर्ट में इससे संबंधित याचिका दाखिल की गई थी। अब इस मामले में चार अगस्त को सुनवाई होनी है। अधिवक्ता अहमद जकावत ने बताया प्राथमिक में पांच लोगों पर आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रार्थना पत्र के जरिए अन्य लोगों के नाम भी पुलिस को बताए गए। पुलिस ने अपनी विवेचना में उक्त नाम को शामिल भी किया लेकिन बाद में निकाल भी दिया। पुलिस की ओर से सात आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में सचिन अग्रवाल, रविंद्र अग्रवाल, दिपांशु उर्फ दीपू, संजीव सिंघल, अर्पित, अरविंद अग्रवाल, अजय अग्रवाल उर्फ राजू, रजनीश अग्रवाल, मोनू, घनश्यामदास गुप्ता, संजू, राजू, अक्षत अग्रवाल का नाम शामिल कर बाद में निकाल दिए थे। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। उक्त याचिका पर अगली सुनवाई चार अगस्त को होनी है।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने सभी दोषियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 364 (अपहरण), 147 (दंगा करने), 201 (साक्ष्य मिठाने) में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक धारा के तहत अलग-अलग सजा निर्धारित की, जो नियमानुसार साथ-साथ चलेगी। 
 

Prabal Murder Case: 14 years and 352 hearings... How sister Prachi fought for justice
लोगों ने मांगा था प्रबल के लिए इंसाफ। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
28 पन्नों में आया आदेश, अपर अदालत में 122 महीना 22 दिन चला केस
कोर्ट का आदेश 28 पन्नों में आया। तीन साल तक निचली अदालत में चलने के बाद अपर अदालत में 122 महीना और 22 दिन सुनवाई हुई और फैसला सुनाया गया। प्रबल की हत्या का मामला अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में नौ मई 2016 को पहुंचा। अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में यह मामला दस साल, दो महीना 22 दिन चला। 

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UP: बिजनौर में किशोरी से छेड़छाड़ के मामले में महज 15 दिन में आया फैसला, दोषी को चार साल की सजा
 
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