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Muzaffarnagar News: सूक्ष्म पोषक तत्वों के उत्पादन पर संकट
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बैगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित हिमगिरी मेटल की उत्पादन यूनिट। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। ईरान-इस्राइल युद्ध के चलते फसलों के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक सल्फेट उत्पादन पर संकट गहराने के आसार पैदा हो गए हैं। जिंक सल्फेट बनाने में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होने वाली गंधक की आपूर्ति में दिक्कत आ रही है। जबकि देश में उपलब्ध जिंक ऐश के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। नुकसान को देख खाद बनाने वाली इकाइयां उत्पादन घटा रही हैं।
फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) जैसे जिंक सल्फेट पौधों के बेहतर विकास एवं फूल-फल की वृद्धि सहित और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये पोषक तत्व मिट्टी से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे मुख्य पोषक तत्वों के अवशोषण को आसान बनाते हैं।
जनपद में सूक्ष्म पोषक तत्व उत्पादन की तीन इकाइयां संचालित हो रही हैं। इनके निर्माण में गंधक अहम भूमिका निभाती है। लेकिन ईरान-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से गंधक (सल्फर) के दाम में तेजी से उछाल आया है।
यह तेल और गैस शोधन का प्रमुख उप-उत्पाद माना जाता है। पश्चिमी एशिया में युद्ध से इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। जिससे उर्वरक उद्योग पर संकट मंडरा रहा। nलागत के सापेक्ष नहीं बढ़ रही मांग : चक्रधर केमिकल्स के प्रबंधक अजय कपूर का कहना है कि जिंक सल्फेट के निर्माण में आवश्यक कच्चे माल के दाम में वृद्धि हो रही है। सूक्ष्म पोषक तत्व तैयार करने में सल्फ्यूरिक एसिड की आवश्यकता होती है। जो गंधक से बनता है। गंधक के दाम भी बढ़ रहे हैं, जबकि निर्माण में काम आने वाली जिंक ऐश का दाम भी 25 प्रतिशत बढ़ गया है। लागत बढ़ गई है, लेकिन उसके सापेक्ष मांग नहीं बढ़ रही।
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फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) जैसे जिंक सल्फेट पौधों के बेहतर विकास एवं फूल-फल की वृद्धि सहित और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये पोषक तत्व मिट्टी से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे मुख्य पोषक तत्वों के अवशोषण को आसान बनाते हैं।
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जनपद में सूक्ष्म पोषक तत्व उत्पादन की तीन इकाइयां संचालित हो रही हैं। इनके निर्माण में गंधक अहम भूमिका निभाती है। लेकिन ईरान-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से गंधक (सल्फर) के दाम में तेजी से उछाल आया है।
यह तेल और गैस शोधन का प्रमुख उप-उत्पाद माना जाता है। पश्चिमी एशिया में युद्ध से इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। जिससे उर्वरक उद्योग पर संकट मंडरा रहा। nलागत के सापेक्ष नहीं बढ़ रही मांग : चक्रधर केमिकल्स के प्रबंधक अजय कपूर का कहना है कि जिंक सल्फेट के निर्माण में आवश्यक कच्चे माल के दाम में वृद्धि हो रही है। सूक्ष्म पोषक तत्व तैयार करने में सल्फ्यूरिक एसिड की आवश्यकता होती है। जो गंधक से बनता है। गंधक के दाम भी बढ़ रहे हैं, जबकि निर्माण में काम आने वाली जिंक ऐश का दाम भी 25 प्रतिशत बढ़ गया है। लागत बढ़ गई है, लेकिन उसके सापेक्ष मांग नहीं बढ़ रही।

बैगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित हिमगिरी मेटल की उत्पादन यूनिट। संवाद