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Muzaffarnagar: अदालत में पेश हुए दिल्ली की जामा मस्जिद के पूर्व शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी, ये है मामला
Fri, 24 Jul 2026 07:56 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 24 Jul 2026 07:56 PM IST
सार
साल 2007 में सैयद अहमद बुखारी खतौली में यूडीएफ प्रत्याशी साबिर अली के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। यहां बिना अनुमति उनका हेलीकॉप्टर उतारा गया था। इसी मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी किए गए थे।
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अदालत में पेश होने के लिए जाते दिल्ली की जामा मस्जिद के पूर्व इमाम अहमद बुखारी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली की जामा मस्जिद के पूर्व शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी 19 साल पहले बिना अनुमति के हेलीकॉप्टर उतारने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने उनके जमानती वारंट जारी किए थे। अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त नियत की गई। उधर, बुखारी ने कहा कि उन्हें प्राथमिकी की जानकारी नहीं थी।
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साल 2007 के विधानसभा चुनाव में तब जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी 10 मार्च को खतौली में यूडीएफ प्रत्याशी साबिर अली के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। उनके हेलीकॉप्टर उतारने का स्थान सीताशरण इंटर कॉलेज का मैदान निर्धारित था लेकिन बिना अनुमति के हेलीकॉप्टर केके जैन कॉलेज के मैदान पर सभास्थल के पास उतरवाया था।
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खतौली थाने में शाही इमाम अहमद बुखारी, यूडीएफ प्रत्याशी साबिर अली, यूडीएफ जिला चुनाव प्रभारी मोहम्मद इनाम कुरैशी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
अदालत में करीब 19 साल तक हाजिर नहीं होने पर बुखारी के वारंट जारी कर दिए गए थे। शुक्रवार को सुरक्षा के बीच वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट पहुंचे और अपने वारंट रिकॉल कराए। अदालत से उन्हें जमानत मिल गई।
बुखारी की पत्रावली कर दी गई थी अलग
प्रकरण में तीन आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज थी लेकिन साल 2016 में अहमद बुखारी की पत्रावली अलग कर दी गई। सीजेएम कोर्ट से उनके गैर जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बाद बुखारी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से करीब 15 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग दाखिल करते हुए कहा कि इस मामले में गैर जमानत वारंट जारी नहीं हो सकते। अभियोजन अधिकारी एके मौर्य ने बताया कि इसके बाद जमानत वारंट जारी किए गए थे।
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प्रकरण में तीन आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज थी लेकिन साल 2016 में अहमद बुखारी की पत्रावली अलग कर दी गई। सीजेएम कोर्ट से उनके गैर जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बाद बुखारी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से करीब 15 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग दाखिल करते हुए कहा कि इस मामले में गैर जमानत वारंट जारी नहीं हो सकते। अभियोजन अधिकारी एके मौर्य ने बताया कि इसके बाद जमानत वारंट जारी किए गए थे।
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