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Muzaffarnagar News: बारिश से 10.3 डिग्री गिरा पारा...गेहूं और सरसों की फसल में नुकसान
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चरथावल के बधाई कलां में बारिश और हवा में गिरी गेहूं की फसल: संवाद
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मुजफ्फरनगर। बेमौसम और तेज हवा के साथ बारिश के कारण आमजनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। दिन के तापमान में 10.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 17.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जिले में 13.5 मिमी बारिश हुई। कोल्हू का संचालन थम गया और चीनी मिलों में नो-केन की स्थिति रही। गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है।
बृहस्पतिवार रात से ही जिले में बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। रात का न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। दिन और रात का तापमान लगभग एक जैसा रहा। बृहस्पतिवार का अधिकतर तापमान 28.1 डिग्री रहा था लेकिन बारिश के कारण शुक्रवार को 10.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
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सब्जियों की फसलों में भी नुकसान
जानसठ/तितावी। बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल गिरने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ेगा। भूसे की मात्रा और गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। सरसों कटाई के लिए तैयार खड़ी है, वह गिर सकती है। कटी हुई सरसों बारिश में भीगने से उसमें फंगस और सड़न पैदा हो जाएगी। सब्जी की फसलों के खेतों में पानी भरने से फफूंदी लगने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे सब्जियां खराब हो सकती हैं। किसानों को खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। चित्तौड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस बारिश से सबसे ज्यादा सरसों और आलू की फसलों को नुकसान पहुंचा है। पशुओं के लिए चारे की समस्या हो सकती है। संवाद
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वसंतकालीन गन्ने की बुवाई प्रभावित
पुरकाजी। किसान सुशील चौधरी और चौधरी प्रताप सिंह ने कहा कि गन्ने की बुआई का कार्य प्रभावित हुआ है। बारिश के कारण अब फसल चक्र प्रभावित होगा। गेहूं की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। संवाद
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फाल्ट ठीक करने में जुटे कर्मी
फोटो
चरथावल। हवा और बारिश के कारण विद्युत निगम के कर्मचारियों ने बिजली आपूर्ति सुचारु रखने के लिए फाल्ट ठीक किया। कस्बे में थाने के पीछे ट्रांसफार्मर में आए फॉल्ट को लाइनमैन ने मौके पर पहुंचकर ठीक किया और आपूर्ति सुचारु कराई। संवाद
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बारिश से मौसम बदला, नजला-खांसी के मरीज बढ़े
मुजफ्फरनगर। तापमान में गिरावट आने से नजला, खांसी और बुखार सहित गले संबंधी बीमारियां बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ देखी गई। इनमें अधिकतर इन्हीं बीमारियों से पीड़ित थे। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि मौसम में इस बदलाव से वायरल बुखार लोगों को जकड़ सकता है। अचानक तापमान गिरने से सांस और अस्थमा रोगियों की परेशानी भी बढ़ी है। उन्होंने संक्रामक रोगों से बचने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने, हाथ धोने और पोषण युक्त आहार लेने की सलाह दी। डॉ. त्रिखा ने कहा कि बुखार, गले में खराश या नजला-खांसी होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। ब्यूरो
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जनवरी जैसा तापमान...बढ़ गई ठंड
मुजफ्फरनगर। बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले 27 जनवरी को जिले का तापमान 16 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। बाद में मौसम गर्म होता चला गया। लेकिन बारिश के कारण तापमान शुक्रवार को एक बार फिर 20 डिग्री से नीचे पहुंच जाने से ठंड का प्रकोप रहा। ब्यूरो
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बंद हुए पंखे...निकला छाता, ढूंढे गए गर्म कपड़े
भोपा बाईपास। मौसम का मिजाज बदलते ही ठंड का अहसास हुआ। गर्मी के कारण घरों और कार्यालयों में चल रहे पंखें बंद करने पड़े। लोग सड़कों पर छाता लेकर चलते हुए नजर आए। यही नहीं ठंड का अहसास होने पर दोबारा गर्म कपड़े भी ढूंढे गए। संवाद
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सब्जियों की फसलों में भी नुकसान
जानसठ/तितावी। बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल गिरने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ेगा। भूसे की मात्रा और गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। सरसों कटाई के लिए तैयार खड़ी है, वह गिर सकती है। कटी हुई सरसों बारिश में भीगने से उसमें फंगस और सड़न पैदा हो जाएगी। सब्जी की फसलों के खेतों में पानी भरने से फफूंदी लगने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे सब्जियां खराब हो सकती हैं। किसानों को खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। चित्तौड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस बारिश से सबसे ज्यादा सरसों और आलू की फसलों को नुकसान पहुंचा है। पशुओं के लिए चारे की समस्या हो सकती है। संवाद
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फोटो
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बारिश से मौसम बदला, नजला-खांसी के मरीज बढ़े
मुजफ्फरनगर। तापमान में गिरावट आने से नजला, खांसी और बुखार सहित गले संबंधी बीमारियां बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ देखी गई। इनमें अधिकतर इन्हीं बीमारियों से पीड़ित थे। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि मौसम में इस बदलाव से वायरल बुखार लोगों को जकड़ सकता है। अचानक तापमान गिरने से सांस और अस्थमा रोगियों की परेशानी भी बढ़ी है। उन्होंने संक्रामक रोगों से बचने के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने, हाथ धोने और पोषण युक्त आहार लेने की सलाह दी। डॉ. त्रिखा ने कहा कि बुखार, गले में खराश या नजला-खांसी होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। ब्यूरो
जनवरी जैसा तापमान...बढ़ गई ठंड
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बंद हुए पंखे...निकला छाता, ढूंढे गए गर्म कपड़े
भोपा बाईपास। मौसम का मिजाज बदलते ही ठंड का अहसास हुआ। गर्मी के कारण घरों और कार्यालयों में चल रहे पंखें बंद करने पड़े। लोग सड़कों पर छाता लेकर चलते हुए नजर आए। यही नहीं ठंड का अहसास होने पर दोबारा गर्म कपड़े भी ढूंढे गए। संवाद

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