{"_id":"697bb28c622a3567ba030aed","slug":"rampur-tiraha-kand-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1001-164011-2026-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामपुर तिराहा कांड : फोटोकॉपी के मामले में सीबीआई को चार फरवरी तक का समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामपुर तिराहा कांड : फोटोकॉपी के मामले में सीबीआई को चार फरवरी तक का समय
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर अदालत में सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान सीबीआई को दावा प्रस्तुत करने के लिए चार फरवरी तक का समय दिया गया।सीबीआई बनाम राधा मोहन की पत्रावली में सुनवाई चल रही है।
मूल दस्तावेज गुम होने की स्थिति में फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर अदालत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे है। सीबीआई की ओर से साक्ष्य सूची भी दी गई थी। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या नौ ने सुनवाई के लिए चार फरवरी नियत कर दी है। बचाव पक्ष का कहना है कि फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए।
-- -- -- --
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
-- --
Trending Videos
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर अदालत में सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान सीबीआई को दावा प्रस्तुत करने के लिए चार फरवरी तक का समय दिया गया।सीबीआई बनाम राधा मोहन की पत्रावली में सुनवाई चल रही है।
मूल दस्तावेज गुम होने की स्थिति में फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने को लेकर अदालत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे है। सीबीआई की ओर से साक्ष्य सूची भी दी गई थी। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या नौ ने सुनवाई के लिए चार फरवरी नियत कर दी है। बचाव पक्ष का कहना है कि फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
