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Muzaffarnagar News: बाबा के बताए रास्ते पर चल रहा किसानों का कारवां
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खेत में बैठे किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो
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सिसौली(मुजफ्फरनगर)। किसानों के मसीहा और भाकियू के संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि शुक्रवार को जल, जंगल, जमीन पर्यावरण बचाओ संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाएगी। किसान मसीहा ने अपना पूरा जीवन किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। करमूखेड़ी से शुरू हुए आंदोलन का लंबा इतिहास रहा और सरकारों को किसान हितों में झुकाया।
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म छह अक्तूबर 1935 को बालियान खाप के गांव हरसौली में हुआ था। असल में उनके किसान पिता चौहल सिंह ने हरसौली क्षेत्र में कुछ जमीन बंटाई पर ली थी, जिस कारण परिवार अपनी खाप के थांबेदार के घर पर रहकर ही खेती करता था। कुछ दिन बाद ही परिवार अपने घर सिसौली लौट गया था।
उन्होंने बचपन से ही किसानों की समस्याओं को करीब से देखा। वर्ष 1987 में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन का गठन किया और किसानों के लिए बड़े आंदोलन शुरू किए।
उनका मानना था कि देश की अर्थव्यवस्था का आधार किसान है और उनके खुशहाल हुए बिना देश तरक्की नहीं कर सकता। भाकियू नेता दरियाव सिंह कहते हैं कि उन्होंने फसलों के उचित मूल्य, बिजली दरों में राहत, सिंचाई व्यवस्था और कृषि ऋण जैसे मुद्दों पर संघर्ष किया।
वर्ष 1988 में दिल्ली के बोट क्लब पर हुआ किसान आंदोलन और मेरठ कमिश्नरी पर किसानों का धरना उनके नेतृत्व के सबसे बड़े और ऐतिहासिक आंदोलनों में से एक माने जाते हैं। इन आंदोलनों ने किसानों की समस्याओं की ओर सरकारों का ध्यान आकर्षित किया। सिसौली स्थित किसान भवन पर शुक्रवार को कार्यक्रम होगा। किसान उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करेंगे।
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इस पंचायत के बाद घेरा गया बिजलीघर
17 जनवरी 1987 सिसौली में। मांग रखी गई कि बिजली की बढ़ी दरें वापस ली जाए। गन्ने का मूल्य 48 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। गेहूं का मूल्य 292 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। इसी पंचायत में शामली के खेड़ी करमू बिजली पर 27 जनवरी 1987 को घेराव का फैसला हुआ था। चार दिन धरना चला, नतीजा नहीं निकला। 17 फरवरी 1987 को सिसौली पंचायत में तय हुआ कि एक मार्च 1987 को खेड़ी करमू बिजलीघर का घेराव होगा। प्रशासन की उम्मीद से ज्यादा यहां लाखों किसान एकत्र हो गए। पुलिस ने गोली चला दी, जिसमें गठवाला खाप के लिसाढ़ गांव के जयपाल सिंह और सिंभालका गांव के अकबर अली शहीद हो गए थे। एक पीएसी के जवान की भी मौत हो गई थी। एक अप्रैल 1987 को शामली में ऐतिहासिक रैली की गई। इस रैली के बाद ही तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने बिजली के दामों में पांच रुपये की कमी की थी।
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इस तरह बनीं और छा गई भाकियू
- वर्ष 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में पश्चिम के खाप चौधरियों की बैठक। अध्यक्ष पद पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर विचार।
- 17 अक्तूबर 1986 सिसौली में खाप चौधरी और किसानों की बैठक। बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भाकियू का अध्यक्ष बनाया।
- 17 जनवरी 1987 को सिसौली में मासिक पंचायत। 27 जनवरी को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का फैसला। चार दिन धरना चला।
- 17 फरवरी 1987 को सिसौली में पंचायत। एक मार्च को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर महापंचायत का एलान किया।
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।
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किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म छह अक्तूबर 1935 को बालियान खाप के गांव हरसौली में हुआ था। असल में उनके किसान पिता चौहल सिंह ने हरसौली क्षेत्र में कुछ जमीन बंटाई पर ली थी, जिस कारण परिवार अपनी खाप के थांबेदार के घर पर रहकर ही खेती करता था। कुछ दिन बाद ही परिवार अपने घर सिसौली लौट गया था।
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उन्होंने बचपन से ही किसानों की समस्याओं को करीब से देखा। वर्ष 1987 में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन का गठन किया और किसानों के लिए बड़े आंदोलन शुरू किए।
उनका मानना था कि देश की अर्थव्यवस्था का आधार किसान है और उनके खुशहाल हुए बिना देश तरक्की नहीं कर सकता। भाकियू नेता दरियाव सिंह कहते हैं कि उन्होंने फसलों के उचित मूल्य, बिजली दरों में राहत, सिंचाई व्यवस्था और कृषि ऋण जैसे मुद्दों पर संघर्ष किया।
वर्ष 1988 में दिल्ली के बोट क्लब पर हुआ किसान आंदोलन और मेरठ कमिश्नरी पर किसानों का धरना उनके नेतृत्व के सबसे बड़े और ऐतिहासिक आंदोलनों में से एक माने जाते हैं। इन आंदोलनों ने किसानों की समस्याओं की ओर सरकारों का ध्यान आकर्षित किया। सिसौली स्थित किसान भवन पर शुक्रवार को कार्यक्रम होगा। किसान उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करेंगे।
इस पंचायत के बाद घेरा गया बिजलीघर
17 जनवरी 1987 सिसौली में। मांग रखी गई कि बिजली की बढ़ी दरें वापस ली जाए। गन्ने का मूल्य 48 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। गेहूं का मूल्य 292 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। इसी पंचायत में शामली के खेड़ी करमू बिजली पर 27 जनवरी 1987 को घेराव का फैसला हुआ था। चार दिन धरना चला, नतीजा नहीं निकला। 17 फरवरी 1987 को सिसौली पंचायत में तय हुआ कि एक मार्च 1987 को खेड़ी करमू बिजलीघर का घेराव होगा। प्रशासन की उम्मीद से ज्यादा यहां लाखों किसान एकत्र हो गए। पुलिस ने गोली चला दी, जिसमें गठवाला खाप के लिसाढ़ गांव के जयपाल सिंह और सिंभालका गांव के अकबर अली शहीद हो गए थे। एक पीएसी के जवान की भी मौत हो गई थी। एक अप्रैल 1987 को शामली में ऐतिहासिक रैली की गई। इस रैली के बाद ही तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने बिजली के दामों में पांच रुपये की कमी की थी।
इस तरह बनीं और छा गई भाकियू
- वर्ष 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में पश्चिम के खाप चौधरियों की बैठक। अध्यक्ष पद पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर विचार।
- 17 अक्तूबर 1986 सिसौली में खाप चौधरी और किसानों की बैठक। बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भाकियू का अध्यक्ष बनाया।
- 17 जनवरी 1987 को सिसौली में मासिक पंचायत। 27 जनवरी को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का फैसला। चार दिन धरना चला।
- 17 फरवरी 1987 को सिसौली में पंचायत। एक मार्च को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर महापंचायत का एलान किया।
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।

खेत में बैठे किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो

खेत में बैठे किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो