UP: पुल बना लेकिन बस स्टैंड नहीं, एयरपोर्ट भी तैयार, न बसें चलीं न प्लेन उड़ा, विकास के इंतजार में चार कस्बे
सहारनपुर के नानौता, सरसावा, लखनौती और नागल में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। कहीं बस स्टैंड नहीं है, कहीं पुल बनने के बाद भी बस सेवा शुरू नहीं हुई, तो कहीं एयरपोर्ट तैयार होने के बावजूद उड़ानें शुरू होने का इंतजार है।
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सहारनपुर जिले के कई कस्बों में विकास की तस्वीर आज भी अधूरी दिखाई देती है। कहीं वर्षों बाद भी बस स्टैंड नहीं बन सका, कहीं पुल बनने के बावजूद रोडवेज बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो कहीं एयरपोर्ट तैयार होने के डेढ़ वर्ष बाद भी उड़ानें शुरू होने का इंतजार है। वहीं एक प्रमुख पार्क भी बदहाली का शिकार बना हुआ है। स्थानीय लोग वर्षों से इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं।
नानौता में बस स्टैंड का इंतजार खत्म नहीं हुआ
नानौता कस्बे में आज तक बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो पाया है। यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी, सर्दी और बरसात के दौरान उन्हें किसी प्रकार की छाया या शेड की सुविधा भी नहीं मिलती। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से बस स्टैंड की मांग उठाई जा रही है, लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी।
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पुल बन गया, लेकिन बस सेवा अब भी बंद
दौलतपुर-शेरगढ़ टापू घाट पर यमुना नदी पर बना पुल उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच आवागमन को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इससे तीन राज्यों के बीच दूरी भी कम हुई, लेकिन पुल बनने के वर्षों बाद भी इस मार्ग पर रोडवेज बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इससे सहारनपुर और करनाल के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
एयरपोर्ट तैयार, उड़ानों का अब भी इंतजार
सरसावा में क्षेत्र का बहुप्रतीक्षित एयरपोर्ट तैयार होकर उद्घाटन भी हो चुका है। उद्घाटन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक यहां से नियमित हवाई सेवा शुरू नहीं हो सकी। इसके साथ ही कस्बे में आज भी स्थायी बस स्टैंड नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से आम लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है।
चेतना पार्क की बदहाली बनी चिंता
नागल का चेतना पार्क कभी लोगों के घूमने और सुबह की सैर का प्रमुख स्थान हुआ करता था, लेकिन आज वहां गंदगी और झाड़ियों का कब्जा है। पार्क का निर्माण वर्ष 1992 में हुआ था, लेकिन रखरखाव के अभाव में इसकी हालत लगातार खराब होती गई। स्थानीय लोगों ने कई बार इसके सुंदरीकरण की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जिलाधिकारी बोले- समाधान का करेंगे प्रयास
जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने कहा कि बस स्टैंड और बसों के संचालन की समस्या गंभीर है। संबंधित विभागों के अधिकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।