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UP: जिंदगी फिर से मुस्कराने लगी है, भाईचारे से मिसाल बन रहा कवाल गांव, कभी हुआ था ऐसा मंजर, सिहर उठे थे लोग

अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 27 Aug 2022 08:42 AM IST
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Where the spark of riots had erupted, now the sprouts of harmony are bursting there
गांव कवाल में आपस में एक साथ बैठे बातचीत करते दोनों समुदाय के लोग - फोटो : amar ujala

नौ साल पहले कवाल से उठी नफरत की चिंगारी से मुजफ्फरनगर जल उठा था। घर छूटे और भाईचारा टूटा, लेकिन यहां जिंदगी फिर मुस्कुराने लगी है। कवाल में फिलहाल किसी तरह का विवाद नजर नहीं आता। दोनों समुदाय के धार्मिक कार्यक्रम धूमधाम से होते हैं। ग्रामीण आपस में बिना भेदभाव के बातचीत करते दिखाई देते हैं। गांव का माहौल सौहार्दपूर्ण है। ग्रामीण अब उस घटना को धीरे धीरे भूलने लगे हैं।



कवाल में 27 अगस्त 2013 को पास के ही मजरे मलिकपुरा के ममेरे-फुफेरे भाई सचिन और गौरव से हुए झगड़े में शाहनवाज की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने बाजार के चौराहे पर सचिन और गौरव की नृशंस हत्या कर दी थी। यही वारदात मुजफ्फरनगर दंगे की वजह बनी। अब इस वारदात को नौ साल बीत चुके हैं। गांव में अमन कायम है, फिर कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। गांव के बाहर का मुख्य द्वार कवाल की पहचान है, जहां पर प्रतिदिन ग्रामीणों की आवाजाही रहती है। बाजारों में दुकानदार समय पर अपनी दुकानें खोलते हैं। हालांकि जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया है, उसका गम उन्हें ताउम्र सालता रहेगा।

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कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

उस दिन को याद नहीं करना चाहते
कवाल के पूर्व प्रधान महेंद्र सैनी का कहना है कि गांव में सभी ग्रामीण आपस में भाईचारे से रह रहे हैं। आपस में बातचीत करते हैं। कोई भी ग्रामीण कवाल कांड को याद नहीं करता। ग्रामीण उस घटना को भुलाते जा रहे हैं।

बदल गया है मेरा गांव : इस्लाम
ग्राम प्रधान मोहम्मद इस्लाम का कहना है कि गांव में ग्रामीण सभी त्योहार मनाते हैं। सभी एक-दूसरे के त्योहारों में शरीक होते हैं। वह दूसरी योजना में भी प्रधान बने हैं। रामलीला के मंचन का उद्घाटन करते हैं। कांवड़ यात्रा में शिविर भी लगाते हैं। आपस में ग्रामीण खुशी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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मुजफ्फरनगर कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

हम उस दिन को याद नहीं करना चाहते : रौनक
रौनक अली का कहना है कि गांव में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन बड़े ही धूमधाम से होते हैं। सभी ग्रामीण धार्मिक कार्यक्रमों में अपना सहयोग देते हैं। ग्रामीण कवाल की उस घटना को अब याद नहीं करना चाहते हैं।

कवाल में भाईचारे का माहौल : प्रदीप
प्रदीप का कहना है कि सभी ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। आपस में हंसी खुशी से बातचीत करते हैं। गांव में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। ग्रामीण कवाल की घटना को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं।

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कवाल कांड
सचिन और गौरव की हत्या में सात आरोपी काट रहे उम्रकैद की सजा
सचिन और गौरव की हत्या में आठ फरवरी 2019 को कोर्ट ने सात आरोपी मुजस्सिम, फुरकान मुजम्मिल, जहांगीर, नदीम, अफजाल व इकबाल को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। ये सभी आरोपी आगरा जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।

शाहनवाज की हत्या के छह आरोपी जमानत पर
कवाल के शाहनवाज के पिता सलीम ने भी अदालत में परिवाद दायर किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। मुकदमे में मृतक सचिन व गौरव के परिवार से रविंद्र, बिशन, प्रहृलाद, तहेंद्र, जितेंद्र और देवेंद्र नामजद हुए थे। फिलहाल सभी जमानत पर बाहर हैं। फिलहाल जिला जज कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है। मुकदमे की अगली तारीख छह सितंबर है।
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कवाल कांड

उम्र भर सताता रहेगा बेटों के खोने का गम
मलिकपुरा के रहने वाले रविंद्र के पुत्र गौरव और बिशन के पुत्र सचिन की हत्या हुई थी। रविंद्र अपनी पत्नी सुरेश के साथ मुजफ्फरनगर में रह रहे हैं। सचिन के पिता बिशन, उसकी पत्नी मुनेश और छोटा बेटा राहुल मलिकपुरा में ही रहते हैं। मां मुनेश कहती हैं, दो बेटों के खोने का गम उम्र भर सताता रहेगा। जख्म आज भी ताजा हैं। बताया कि बहू स्वाति पौत्र गगन को लेकर अपने मायके पुरबालियान में चली गई थी, उसे सरकारी नौकरी भी मिल गई थी। बेटे के जाने के बाद हमारी दुनिया लुट गई।

अल्लाह पर भरोसा, इंसाफ जरूर मिलेगा
शाहनवाज के पिता सलीम (80) कहते हैं कि उन्हें आज भी अल्लाह पर भरोसा है, बेटे की हत्या का इंसाफ जरूर मिलेगा। बताया कि दो बेटे आगरा जेल में सजा काट रहे हैं। आंखों से कम दिखाई देने से वह बेटों से मिलने आगरा जेल भी नहीं जा सकते। शाहनवाज हत्याकांड की छह सितंबर को तारीख है। अब उनके कोर्ट में बयान दर्ज होने हैं।

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