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Pilibhit News: काश, रास्ते से न लिया होता बेटे को
Sun, 09 Aug 2026 11:47 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:47 PM IST
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बीसलपुर। वीरपाल को इसका बेहद मलाल है कि काश, कांवड़ यात्रा से लौटते वक्त बेटे चिराग को अपने साथ न लिया होता तो उसकी जान बच जाती।
वीरपाल बताते हैंं कि उनका पुत्र चिराग जयंती देवी संस्कृत विद्यालय चौबारी में पढ़ता था। उसे कांवड़ लेने जाने के लिए पहले ही बता दिया था। ऐसे में जब वह अपने काफिले के साथ गुजरे तो विद्यालय के गेट पर उनका पुत्र अपने अन्य साथियों के साथ इंतजार करता मिला। चिराग ने अपने साथियों के साथ कांवड़ यात्रा का स्वागत किया। कांवड़ यात्रा जाते समय चिराग की आंखों में आंसू देख वह समझ गए कि वह घर आना चाहता है। इसी कारण उसे अपने साथ ले लिया। सोचा था कि अगले दिन रविवार का अवकाश है। उनका बच्चा रविवार को परिवार के साथ रह लेगा। चिराग ने चलते समय अपने शिक्षकों और साथियों से यह भी कहा था कि सोमवार को वह जल्दी विद्यालय आ जाएगा। वीरपाल को क्या पता था कि हादसे में बेटे को खो देंगे। मां सोनी मिश्रा चिराग के कपड़ों को सीने से लगाकर बिलखती रहीं। वीरपाल के दो बेटे थे। चिराग बड़ा था। संवाद
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वीरपाल बताते हैंं कि उनका पुत्र चिराग जयंती देवी संस्कृत विद्यालय चौबारी में पढ़ता था। उसे कांवड़ लेने जाने के लिए पहले ही बता दिया था। ऐसे में जब वह अपने काफिले के साथ गुजरे तो विद्यालय के गेट पर उनका पुत्र अपने अन्य साथियों के साथ इंतजार करता मिला। चिराग ने अपने साथियों के साथ कांवड़ यात्रा का स्वागत किया। कांवड़ यात्रा जाते समय चिराग की आंखों में आंसू देख वह समझ गए कि वह घर आना चाहता है। इसी कारण उसे अपने साथ ले लिया। सोचा था कि अगले दिन रविवार का अवकाश है। उनका बच्चा रविवार को परिवार के साथ रह लेगा। चिराग ने चलते समय अपने शिक्षकों और साथियों से यह भी कहा था कि सोमवार को वह जल्दी विद्यालय आ जाएगा। वीरपाल को क्या पता था कि हादसे में बेटे को खो देंगे। मां सोनी मिश्रा चिराग के कपड़ों को सीने से लगाकर बिलखती रहीं। वीरपाल के दो बेटे थे। चिराग बड़ा था। संवाद