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Pilibhit News: तराई में महिलाओं ने अपने हुनर से समाज में जमाई धाक

संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Sun, 08 Mar 2026 12:09 AM IST
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In the Terai region, women have established their dominance in society through their skills.
ममता।
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पीलीभीत। तराई के इस जिले में महिलाएं अपने हुनर की बदौलत समाज में धाक जमाए हुए हैं। बात, अगर पुलिस विभाग की करें तो जिले में विभिन्न पदों पर तैनात महिला कर्मी न सिर्फ सफलता पूर्वक अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों तक तत्परता से मदद पहुंचाने का काम भी कर रहीं हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ीं एक चिकित्सक ने जिले में पहली बार बोन मैरो की जांच शुरू कर जिले के मरीजों को बढ़ी राहत दी है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह बनाकर कई महिलाएं जलकुंभी से ऐसे उत्पाद तैयार कर रहीं हैं, जिनकी महानगरों तक मांग है।
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पावरलिफ्टिंग में महिला आरक्षी उर्वशी ने जीते कई पदक



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मुख्य आरक्षी उर्वशी ने खेल के क्षेत्र में जिले को नई पहचान दिलाई है। पावरलिफ्टिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई पदक अपने नाम किए। पुलिस खेल महाकुंभ में पावरलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही 10वीं अखिल भारतीय पुलिस जूडो क्लस्टर प्रतियोगिता 2025-26 में 69 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। उर्वशी ने 144 किलोग्राम स्क्वाट, 150 किलोग्राम डेड लिफ्ट और 60 किलोग्राम बेंच प्रेस जैसे प्रभावशाली रिकॉर्ड भी बनाए हैं। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें विभागीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। खेलों में बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया। अब वह मुख्य आरक्षी बन गई हैं। वर्तमान में पुलिस लाइन में तैनाती चल रही है।
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अनु और ममता की मेहनत की दिल्ली तक धमक

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शहर से सटे मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत सैदपुर की ममता और अनु शक्ति स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़कर पिछले करीब पांच सालों से कार्य कर रही है। दोनों महिलाओं की ओर से जलकुंभी से उत्पाद बनाए जा रहे हैं। यह महिलाएं जलकुंभी से साज-सज्जा, शीशे के फ्रेम, बैग सहित अन्य उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। जगह-जगह होने वाली प्रदर्शनी में भी यह दोनों महिलाएं अपने उत्पादों के स्टॉल को लगाकर वहां पर बेच रही हैं। वहीं दोनों महिलाओं की ओर से बनाए जा रहे उत्पाद मुरादाबाद के एक सप्लायर के जरिये भी अपने उत्पादों की बिक्री कर रही है। इसके साथ ही गुडगांव, नोएडा, गाजियाबाद सहित अन्य जगह बन रहे होटलों में साज सज्जा के लिए उनकी उत्पादों की मांग की जा रही है। पांच सौ रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक के उत्पाद बना रही है। बेहतर कार्य करने के चलते दोनों महिलाओं को लखनऊ में सम्मानित भी किया जाएगा।
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बैक साइड बोन मैरो जांच कर डॉ. विभूति ने बचाई दो जिंदगियां
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पीलीभीत। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग में सरकारी चिकित्सकों पर आए दिन गंभीर लापरवाही, मरीजों को समय से इलाज नहीं देना जैसे आरोप लगते रहते हैं, लेकिन पीलीभीत मेडिकल कॉलेज की पैथाेलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति गोयल ने इस सब आरोपों के बीच दो जिंदगियां बचाईं। गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज लाए गए मरीज, जो बेड से पैथालॉजी जाने में असमर्थ थे व जिंदगी मौत से लड़ रहे थे। ऐसे मरीजों की बैक साइड बोन मैरो जांच कर उनमें बीमारी की पहचान कर उपचार के साथ उनकी जिंदगी बचा ली। बता दें बैक साइड बोन मैरो एक जटिल जांच प्रक्रिया है जो आम निजी अस्पतालों में तक नहीं होती है।

ममता।

ममता।

ममता।

ममता।

ममता।

ममता।

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