{"_id":"6a74ec3632f0098b030a628a","slug":"injured-tigers-will-no-longer-be-helpless-their-new-home-is-ready-pilibhit-news-c-121-1-pbt1009-165998-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: अब घायल बाघ नहीं होंगे बेबस, तैयार हुआ उनका नया आशियाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: अब घायल बाघ नहीं होंगे बेबस, तैयार हुआ उनका नया आशियाना
विज्ञापन
वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में तैयार किया बाड़ा। स्रोत विभाग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। जंगल में घायल होने, बीमारी की चपेट में आने या आबादी में भटककर पहुंचने वाले बाघ और तेंदुए अब इलाज और सुरक्षित पुनर्वास के लिए दूसरे जनपदों पर निर्भर नहीं रहेंगे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की पूरनपुर रेंज के गोपालपुर क्षेत्र में करीब 14.33 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर अंतिम चरण में पहुंच गया है। निर्माण कार्य के इस माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि अक्तूबर के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाले वन्यजीव सप्ताह के दौरान इसका लोकार्पण किए जाने की संभावना है।
पीटीआर में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और घायल और भटके हुए बाघ-तेंदुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इस रेस्क्यू सेंटर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित की गई है। यहां वन्यजीवों के उपचार, निगरानी और पुनर्वास के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। संवाद
-- --
चार चरणों में कराया जा रहा कार्य
रेस्क्यू सेंटर का निर्माण चार चरणों में कराया जा रहा है। वर्ष 2022-23 से शुरू हुए पहले तीन चरणों में क्वारंटीन सेल, अत्याधुनिक अस्पताल, नाइट सेल, बाड़े, बाउंड्री वॉल, सब स्टेशन, गार्ड रूम, पोस्टमाॅर्टम रूम और अन्य आवश्यक ढांचों का निर्माण पूरा हो चुका है। जनवरी में शासन ने चौथे और अंतिम चरण के लिए 90.43 लाख रुपये जारी किए थे। वर्तमान में अंतिम फिनिशिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन को भी शासन से मंजूरी मिल चुकी है।
विज्ञापन
-- --
पहले क्वारंटीन, फिर इलाज और उसके बाद सुरक्षित नाइट सेल
रेस्क्यू कर लाए गए प्रत्येक वन्यजीव को सबसे पहले क्वारंटीन सेल में रखा जाएगा, जहां संक्रमण और बीमारी की जांच की जाएगी। यदि वन्यजीव घायल या बीमार होगा तो उसे तत्काल सेंटर के अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार दिया जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे नाइट सेल में स्थानांतरित किया जाएगा। यदि प्रारंभिक जांच में वन्यजीव स्वस्थ पाया जाता है तो उसे सीधे नाइट सेल में भेज दिया जाएगा। नाइट सेल में एक समय में छह बाघ और तीन तेंदुओं को रखने की क्षमता होगी। सुरक्षा के लिहाज से नाइट सेल के बाहर दो अतिरिक्त सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं, जिससे वन्यजीवों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
-- -
वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था को इस माह के अंत तक सभी शेष कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां वन्यजीवों के क्वारंटीन, जांच और त्वरित इलाज की आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है। निर्माण पूरा होते ही सेंटर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
विज्ञापन
पीटीआर में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और घायल और भटके हुए बाघ-तेंदुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इस रेस्क्यू सेंटर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित की गई है। यहां वन्यजीवों के उपचार, निगरानी और पुनर्वास के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। संवाद
विज्ञापन
चार चरणों में कराया जा रहा कार्य
रेस्क्यू सेंटर का निर्माण चार चरणों में कराया जा रहा है। वर्ष 2022-23 से शुरू हुए पहले तीन चरणों में क्वारंटीन सेल, अत्याधुनिक अस्पताल, नाइट सेल, बाड़े, बाउंड्री वॉल, सब स्टेशन, गार्ड रूम, पोस्टमाॅर्टम रूम और अन्य आवश्यक ढांचों का निर्माण पूरा हो चुका है। जनवरी में शासन ने चौथे और अंतिम चरण के लिए 90.43 लाख रुपये जारी किए थे। वर्तमान में अंतिम फिनिशिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन को भी शासन से मंजूरी मिल चुकी है।
विज्ञापन
पहले क्वारंटीन, फिर इलाज और उसके बाद सुरक्षित नाइट सेल
रेस्क्यू कर लाए गए प्रत्येक वन्यजीव को सबसे पहले क्वारंटीन सेल में रखा जाएगा, जहां संक्रमण और बीमारी की जांच की जाएगी। यदि वन्यजीव घायल या बीमार होगा तो उसे तत्काल सेंटर के अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार दिया जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे नाइट सेल में स्थानांतरित किया जाएगा। यदि प्रारंभिक जांच में वन्यजीव स्वस्थ पाया जाता है तो उसे सीधे नाइट सेल में भेज दिया जाएगा। नाइट सेल में एक समय में छह बाघ और तीन तेंदुओं को रखने की क्षमता होगी। सुरक्षा के लिहाज से नाइट सेल के बाहर दो अतिरिक्त सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं, जिससे वन्यजीवों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था को इस माह के अंत तक सभी शेष कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां वन्यजीवों के क्वारंटीन, जांच और त्वरित इलाज की आधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है। निर्माण पूरा होते ही सेंटर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर