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Pilibhit News: मजदूर की बेटी अक्षरा जिले में तीसरे स्थान पर रही, अब यूपीएससी का सपना
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अक्षरा को मिठाई खिलाते परिजन संवाद
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अक्षरा ने रोजाना सात से आठ घंटे की पढ़ाई, सोशल मीडिया के सही उपयोग की दी सीख
पीलीभीत। तंगहाली अगर इरादों को रोक पाती, तो अक्षरा आज इस मुकाम पर नहीं होतीं। सनातन धर्म बांके बिहारी इंटर कॉलेज की इस छात्रा ने 94 प्रतिशत अंक हासिल कर हाईस्कूल में जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया और यह साबित कर दिया कि मेहनत और जज्बे के आगे हालात भी झुक जाते हैं।
अक्षरा के पिता मोहम्मद इकबाल खां मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद 300 से 500 रुपये तक की आमदनी में पूरे परिवार का खर्च चलता है, मगर उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई को बोझ नहीं बनने दिया। तीन बहनों में सबसे बड़ी अक्षरा अपने छोटे भाई-बहनों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। उनकी बहन हिना कक्षा नौ और नायरा कक्षा छह में पढ़ती है। भाई फैज अभी कक्षा एक में है। पिता बताते हैं कि वे कई बार जरूरी काम भी टाल देते हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। यही त्याग आज अक्षरा की सफलता में झलक रहा है।
अक्षरा रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करती हैं। उनका मानना है कि आज के समय में सोशल मीडिया को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो यह पढ़ाई का बड़ा साधन बन सकता है। उन्होंने यू-ट्यूब के माध्यम से कई विषयों को बेहतर तरीके से समझा और अपनी तैयारी को मजबूत किया। विद्यालय में उनकी क्लास टीचर प्रेमवती और प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र गंगवार ने उनकी लगन और अनुशासन की सराहना की है। अक्षरा का सपना सिर्फ अच्छे अंक तक सीमित नहीं है। वह आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं, ताकि अपने परिवार और समाज के लिए कुछ बड़ा कर सकें। संवाद
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पीलीभीत। तंगहाली अगर इरादों को रोक पाती, तो अक्षरा आज इस मुकाम पर नहीं होतीं। सनातन धर्म बांके बिहारी इंटर कॉलेज की इस छात्रा ने 94 प्रतिशत अंक हासिल कर हाईस्कूल में जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया और यह साबित कर दिया कि मेहनत और जज्बे के आगे हालात भी झुक जाते हैं।
अक्षरा के पिता मोहम्मद इकबाल खां मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद 300 से 500 रुपये तक की आमदनी में पूरे परिवार का खर्च चलता है, मगर उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई को बोझ नहीं बनने दिया। तीन बहनों में सबसे बड़ी अक्षरा अपने छोटे भाई-बहनों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। उनकी बहन हिना कक्षा नौ और नायरा कक्षा छह में पढ़ती है। भाई फैज अभी कक्षा एक में है। पिता बताते हैं कि वे कई बार जरूरी काम भी टाल देते हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। यही त्याग आज अक्षरा की सफलता में झलक रहा है।
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अक्षरा रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करती हैं। उनका मानना है कि आज के समय में सोशल मीडिया को सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो यह पढ़ाई का बड़ा साधन बन सकता है। उन्होंने यू-ट्यूब के माध्यम से कई विषयों को बेहतर तरीके से समझा और अपनी तैयारी को मजबूत किया। विद्यालय में उनकी क्लास टीचर प्रेमवती और प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र गंगवार ने उनकी लगन और अनुशासन की सराहना की है। अक्षरा का सपना सिर्फ अच्छे अंक तक सीमित नहीं है। वह आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं, ताकि अपने परिवार और समाज के लिए कुछ बड़ा कर सकें। संवाद

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