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Pilibhit News: मानसून नजदीक... फिर भी 13 नालों की सफाई तक शुरू नहीं हो पाई
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:23 PM IST
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पीलीभीत। बारिश के मौसम के दौरान पिछले साल ही जलभराव की मार झेल चुके शहर को इस बार भी बचाने के इंतजाम समय से नहीं किए गए। शहर के 34 में से 13 नालों की अब तक सफाई शुरू नहीं हो सकी है, यह बात नगर पालिका के अफसर खुद स्वीकार करते हैं। इन नालों पर स्थायी और अस्थायी कब्जे देखकर पीछे हटने वाली नगर पालिका को अब समझ आया कि ऐसे लोगों को नोटिस देकर पहले कब्जे हटाए जाएं और फिर नालों की सफाई की जाए। ये नोटिस सोमवार से देने की बात अफसर कह रहे हैं।
शहर में कुल 34 छोटे-बड़े नालों की सफाई के लिए इस वर्ष 32 लाख रुपये से अधिक की लागत से टेंडर कराया गया है। नगर पालिका के अनुसार करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन पड़ताल में कई ऐसे नाले सामने आए, जहां सफाई कार्य या तो हुआ ही नहीं या फिर अधूरा छोड़ दिया गया। इन नालों पर अतिक्रमण और स्ट्रीट वेंडर्स का कब्जा सफाई कार्य में बड़ी बाधा बना हुआ है।
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गांधी स्टेडियम मार्ग का नाला बना कूड़ाघर
फोटो 15
ड्रमंड कॉलेज गेट से गौहनियां चौराहे तक जाने वाला मुख्य नाला लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। नाले के ऊपर और आसपास स्ट्रीट वेंडर्स का कब्जा होने के कारण सफाई कर्मचारी यहां तक पहुंच ही नहीं पाते। नतीजतन नाला कूड़े-कचरे और सिल्ट से भरकर लगभग बंद हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इस नाले की समुचित सफाई नहीं हुई थी और बारिश में आसपास के इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हुई थी।
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स्टेशन रोड पर स्थायी पटलों से रुकी सफाई
फोटो 16
रामा गार्डन से विशाल टॉकीज तक स्थित बड़े नाले की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। वर्षों से नाले के ऊपर स्थायी पटले और अतिक्रमण होने के कारण पालिका यहां मशीन या श्रमिकों के जरिए प्रभावी सफाई नहीं करा पाती। इसका असर हर बरसात में देखने को मिलता है, जब गैस चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में पानी भर जाता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते नाले की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो इस बार भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
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बेनी चौधरी मोहल्ले में नाले में पटी गंदगी
फोटो 25
मोहल्ला बेनी चौधरी में नाला सफाई की समस्या और भी गंभीर है। यहां कई स्थानों पर लोगों ने नाले के ऊपर चबूतरे और निर्माण कर रखे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जब पालिका की टीम सफाई के लिए आती है तो कब्जाधारी लोग सफाई होने की औपचारिक संस्तुति कर देते हैं, जबकि नाले के अंदर वर्षों से जमी गाद और कूड़ा जस का तस बना रहता है। इसका खामियाजा पूरे मोहल्ले को बरसात में जलभराव के रूप में भुगतना पड़ता है।
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सफाई की धीमी रफ्तार ने बढ़ाई चिंता
नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार शहर के 34 नालों में से अब तक केवल 21 नालों की सफाई पूरी हो सकी है, जबकि चार नालों पर बंधा लगाकर कार्य कराया जा रहा है। मानसून के बेहद करीब पहुंच जाने के बावजूद सफाई कार्य की धीमी रफ्तार लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
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बोले लोग, नालों से हटाया जाए कब्जा
फोटो 17
नाले के ऊपर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं, ऐसे में सफाई ठीक से नहीं हो पाती। बरसात में पानी भर जाता है। इसलिए कब्जा हटवाकर नाला सफाई कराने की जरूरत है।- इकराम
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फोटो 18
नालों पर अस्थायी कब्जे से सफाई प्रभावित होती है, लेकिन नगर पालिका का इस पर ध्यान ही नहीं जाता। इस पर काम होना जरूरी है- नईम
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वर्जन-
शहर में जहां नालों पर अस्थायी कब्जा है, वहां नाला सफाई की इस बार योजना बनाई गई है। दो स्थानों पर अतिक्रमण करने वालों को नोटिस जारी किए गए हैं। दो दिन का समय अतिक्रमण हटाने के लिए दिया गया है। पालिका प्रशासन नालों की सफाई प्राथमिकता के आधार पर करा रही है। - संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद
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शहर में कुल 34 छोटे-बड़े नालों की सफाई के लिए इस वर्ष 32 लाख रुपये से अधिक की लागत से टेंडर कराया गया है। नगर पालिका के अनुसार करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन पड़ताल में कई ऐसे नाले सामने आए, जहां सफाई कार्य या तो हुआ ही नहीं या फिर अधूरा छोड़ दिया गया। इन नालों पर अतिक्रमण और स्ट्रीट वेंडर्स का कब्जा सफाई कार्य में बड़ी बाधा बना हुआ है।
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गांधी स्टेडियम मार्ग का नाला बना कूड़ाघर
फोटो 15
ड्रमंड कॉलेज गेट से गौहनियां चौराहे तक जाने वाला मुख्य नाला लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। नाले के ऊपर और आसपास स्ट्रीट वेंडर्स का कब्जा होने के कारण सफाई कर्मचारी यहां तक पहुंच ही नहीं पाते। नतीजतन नाला कूड़े-कचरे और सिल्ट से भरकर लगभग बंद हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इस नाले की समुचित सफाई नहीं हुई थी और बारिश में आसपास के इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हुई थी।
स्टेशन रोड पर स्थायी पटलों से रुकी सफाई
फोटो 16
रामा गार्डन से विशाल टॉकीज तक स्थित बड़े नाले की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। वर्षों से नाले के ऊपर स्थायी पटले और अतिक्रमण होने के कारण पालिका यहां मशीन या श्रमिकों के जरिए प्रभावी सफाई नहीं करा पाती। इसका असर हर बरसात में देखने को मिलता है, जब गैस चौराहे और आसपास के क्षेत्रों में पानी भर जाता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते नाले की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो इस बार भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
बेनी चौधरी मोहल्ले में नाले में पटी गंदगी
फोटो 25
मोहल्ला बेनी चौधरी में नाला सफाई की समस्या और भी गंभीर है। यहां कई स्थानों पर लोगों ने नाले के ऊपर चबूतरे और निर्माण कर रखे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जब पालिका की टीम सफाई के लिए आती है तो कब्जाधारी लोग सफाई होने की औपचारिक संस्तुति कर देते हैं, जबकि नाले के अंदर वर्षों से जमी गाद और कूड़ा जस का तस बना रहता है। इसका खामियाजा पूरे मोहल्ले को बरसात में जलभराव के रूप में भुगतना पड़ता है।
सफाई की धीमी रफ्तार ने बढ़ाई चिंता
नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार शहर के 34 नालों में से अब तक केवल 21 नालों की सफाई पूरी हो सकी है, जबकि चार नालों पर बंधा लगाकर कार्य कराया जा रहा है। मानसून के बेहद करीब पहुंच जाने के बावजूद सफाई कार्य की धीमी रफ्तार लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
बोले लोग, नालों से हटाया जाए कब्जा
फोटो 17
नाले के ऊपर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं, ऐसे में सफाई ठीक से नहीं हो पाती। बरसात में पानी भर जाता है। इसलिए कब्जा हटवाकर नाला सफाई कराने की जरूरत है।- इकराम
फोटो 18
नालों पर अस्थायी कब्जे से सफाई प्रभावित होती है, लेकिन नगर पालिका का इस पर ध्यान ही नहीं जाता। इस पर काम होना जरूरी है- नईम
वर्जन-
शहर में जहां नालों पर अस्थायी कब्जा है, वहां नाला सफाई की इस बार योजना बनाई गई है। दो स्थानों पर अतिक्रमण करने वालों को नोटिस जारी किए गए हैं। दो दिन का समय अतिक्रमण हटाने के लिए दिया गया है। पालिका प्रशासन नालों की सफाई प्राथमिकता के आधार पर करा रही है। - संजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद