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Pilibhit News: माला रेंज से सटे गांवों में हाथियों की दहशत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 11 Jan 2026 11:31 PM IST
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गजरौला क्षेत्र में हाथियों द्वारा उजाड़ी गई गेहूं की फसल। स्रोत ग्रामीण
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गजरौला। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज से सटे गांवों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते कई महीनों से हाथियों के झुंड किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं, लेकिन न तो वन विभाग की ओर से ठोस सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही अब तक पीड़ित किसानों को मुआवजा मिल सका है। इससे ग्रामीणों में गुस्सा है।
पीटीआर की माला रेंज से सटे गोयल कॉलोनी, महुआ, रामनगरिया और सिरसा सरदाह समेत कई गांवों में हाथियों के झुंड ने गन्ना, गेहूं, सरसों और मसूर की कई बीघा फसलें रौंदकर बर्बाद कर दी हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसल को बचाने के लिए उन्हें रात-रात भर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। इसके बावजूद हाथियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है।
बताया जा रहा है कि पड़ोसी देश नेपाल की गौरीफंटा सेंचुरी से निकला हाथियों का झुंड लग्गा-भग्गा जंगल के रास्ते पीटीआर में प्रवेश कर गया है। यह झुंड पिछले कई महीनों से माला रेंज को ही अपना ठिकाना बनाए हुए है। दो दिन पूर्व महुआ गांव में करीब 12 बजे दिन में हाथियों ने किसान श्रीकृष्ण और प्रेम प्रकाश के खेत में लगे इंजन पंपसेट को पलट दिया और करीब 40 मीटर तक घसीट ले गए। इसके अलावा जगन्नाथ, गौरीशंकर, लाल बहादुर सहित कई अन्य किसानों की फसलें भी पूरी तरह नष्ट कर दी गईं।
सबसे गंभीर स्थिति मुआवजे को लेकर बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि लेखपाल ने अब तक फसल नुकसान की सर्वे रिपोर्ट नहीं सौंपी है। वन विभाग की ओर से दो बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद सर्वे न होने से मुआवजा प्रक्रिया अटक गई है। इससे किसानों में रोष और गहराता जा रहा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने के साथ-साथ हाथियों से स्थायी सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है। रेंजर रोबिन सिंह का कहना है कि टीमें लगातार हाथियों की चहलकदमी पर नजर बनाए हैं। क्षेत्रीय लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
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पीटीआर की माला रेंज से सटे गोयल कॉलोनी, महुआ, रामनगरिया और सिरसा सरदाह समेत कई गांवों में हाथियों के झुंड ने गन्ना, गेहूं, सरसों और मसूर की कई बीघा फसलें रौंदकर बर्बाद कर दी हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसल को बचाने के लिए उन्हें रात-रात भर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। इसके बावजूद हाथियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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बताया जा रहा है कि पड़ोसी देश नेपाल की गौरीफंटा सेंचुरी से निकला हाथियों का झुंड लग्गा-भग्गा जंगल के रास्ते पीटीआर में प्रवेश कर गया है। यह झुंड पिछले कई महीनों से माला रेंज को ही अपना ठिकाना बनाए हुए है। दो दिन पूर्व महुआ गांव में करीब 12 बजे दिन में हाथियों ने किसान श्रीकृष्ण और प्रेम प्रकाश के खेत में लगे इंजन पंपसेट को पलट दिया और करीब 40 मीटर तक घसीट ले गए। इसके अलावा जगन्नाथ, गौरीशंकर, लाल बहादुर सहित कई अन्य किसानों की फसलें भी पूरी तरह नष्ट कर दी गईं।
सबसे गंभीर स्थिति मुआवजे को लेकर बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि लेखपाल ने अब तक फसल नुकसान की सर्वे रिपोर्ट नहीं सौंपी है। वन विभाग की ओर से दो बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद सर्वे न होने से मुआवजा प्रक्रिया अटक गई है। इससे किसानों में रोष और गहराता जा रहा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने के साथ-साथ हाथियों से स्थायी सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है। रेंजर रोबिन सिंह का कहना है कि टीमें लगातार हाथियों की चहलकदमी पर नजर बनाए हैं। क्षेत्रीय लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।