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Bareilly News: चांद से धरती पर लाई जाएगी मिट्टी, एनआरएससी के निदेशक बोले- चंद्रयान 4 मिशन पर काम जारी

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 18 Apr 2026 03:01 AM IST
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Work on Chandrayaan-4 mission continues says Dr. Prakash Chauhan
एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान - फोटो : अमर उजाला
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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चंद्रयान मिशन तीन ने कीर्तिमान रचा था। चंद्रयान-4 रोबोटिक मिशन में चंद्रमा की सतह से मिट्टी डॉकिंग के जरिये पृथ्वी पर लाई जाएगी। चंद्रयान-5 में भारत का लैंडर और जापान का रोवर साथ भेजे जाएंगे। रोटरी क्लब ऑफ बरेली की ओर से शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने ये जानकारी दी। 

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डॉ. प्रकाश चौहान ने बताया कि दोनों मिशन जटिल हैं। संभावित जटिलताओं का आकलन कर उन्हें दूर करने के लिए शोधकार्य जारी है। जापान के साथ ड्यूप्लेक्स मिशन के दौरान चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर लैंड किया जाएगा। पानी और बर्फ की खोज की जाएगी। इसके बाद शुक्रयान मिशन पर कार्य किया जाएगा। भारत अब मेक इन इंडिया के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। स्पेस सेक्टर में 2023 में सुधार से निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ी है। देश में सक्रिय दो सौ से अधिक स्पेस स्टार्टअप किट, सेटेलाइट, डेटा सेवा पर काम कर रहे हैं।
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प्रदेश में सर्वाधिक गिरती है बिजली, अंकुश की तैयारी 
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने की सर्वाधिक मौतें होती हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए सेटेलाइट के जरिये ऐसे ब्लॉक को चिह्नित कर रहे हैं, जहां सर्वाधिक बिजली गिरती है। फिर वहां सुरक्षा के इंतजाम होंगे। ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय के कई ग्लेशियर पिघल रहे हैं। असम में आई बाढ़ इसी का नतीजा थी। इस पर अंकुश लगाने, वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में कार्य हो रहा है। सेटेलाइट से फसल के रकबे, उत्पादन  का अनुमान, पराली जलाने की निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण, जल संसाधन प्रबंधन का कार्य हो रहा है। बाढ़, सूखा, वनाग्नि घकी त्वरित निगरानी भी मुमकिन है। 

सेटेलाइट कम्युनिकेशन, नेविगेशन अर्थ ऑब्जर्वेशन से बदलेगी तस्वीर
डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक भारत के विकास का इंजन बन रही है। खेती से रक्षा सेवा तक को बेहतर बनाने के तीन स्तंभ सेटेलाइट कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन हैं। जिन ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट नहीं है, वहां बैंकिंग, एटीएम, मोबाइल कनेक्टिविटी, रक्षा संचार सेटेलाइट से मुमकिन है। स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक से पोजीशन, नेविगेशन, टाइमिंग (पीएनटी) सेवाएं मिलती हैं। मोबाइल लोकेशन, स्टॉक मार्केट टाइमिंग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम में इसका प्रयोग हो रहा है। देश की सीमा की निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर और रणनीतिक योजना में भी सेटेलाइट की अहम भूमिका है। 

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन
रोटरी क्लब ऑफ बरेली ने शुक्रवार को 75वें चार्टर दिवस समारोह का आयोजन किया। क्लब ने इस वर्ष 75 सामाजिक परियोजनाओं को पूरा करने की उपलब्धि साझा की। कार्यक्रम में नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान मुख्य अतिथि रहे। डॉ. चौहान ने विकसित भारत हेतु भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम विषय पर व्याख्यान दिया। कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अब केवल अन्वेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समावेशी और सतत विकास का सशक्त माध्यम बन चुकी है। 

रोटरी क्लब ऑफ बरेली के अध्यक्ष डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि केरल के छोटे से गांव थुम्बा से शुरू हुई भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंच गई है। विशिष्ट अतिथि डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजेन विद्यार्थी ने रोटरी के 75 वर्षों को ऐतिहासिक बताया। इस दौरान सृष्टिपूर्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष शिल्पी शर्मा ने 15 मेधावी विद्यार्थियों को इसरो के शैक्षिक भ्रमण के लिए प्रतीकात्मक छात्रवृत्ति प्रदान की। अरविंद गुप्ता, नरेश मलिक, डॉ. जितेंद्र मौर्या, प्रधीर गुप्ता, सुमित अरोरा, संचित अग्रवाल, कुश सक्सेना, राजेश टंडन, एएस अग्रवाल आदि मौजूद रहे। 

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