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Pratapgarh News: ढिबरी जलाकर सीखा था ककहरा...अब फैला रहीं शिक्षा का उजियारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 01:39 AM IST
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Munni Begum completed her high school and post-graduation studies after marriage.
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पट्टी तहसील की मुन्नी बेगम का जीवन महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। शादी के वक्त अशिक्षित थीं। ससुराल में पढ़ाई के लिए कोई सहयोग नहीं मिला। लेकिन उनके मन में शिक्षा की लौ जल रही थी। घरेलू काम के बाद रात में ढिबरी की रोशनी में चुपके से पढ़ना शुरू किया। धीरे-धीरे हाईस्कूल, इंटर, बीए और एमए, सब पास कर डाला। अब तक 1400 महिलाओं को साक्षर बना शिक्षा मसाल ले आगे बढ़ रही हैं।
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जौनपुर जिले के पहाड़पुर की मुन्नी बेगम तीन भाई और तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने बताया कि पिता अब्दुल अजीज ने कम उम्र में 1988 में उनका निकाह पट्टी के बंधवा बाजार निवासी वहीद अंसारी से कर दिया। सास कभी पढ़ाई की पक्षधर नहीं रहीं और ताने मारती थीं, जिसकी चुभन से आजिज आकर उन्होंने खुद से पढ़ाई करने का संकल्प लिया।
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मुन्नी बताती हैं कि वह घर का कामकाज निपटाने के बाद रात में ढिबरी जलाकर ककहरा लिखना शुरू किया। सास की चोरी से पढ़ाई करती रहीं। कभी स्कूल नहीं गई, घर से पढ़ाई कर हाईस्कूल की परीक्षा पास की। इंटर के बाद स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। वह कहती हैं कि उन्हें हमेशा लगता था कि शिक्षा खुद तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने तरुण चेतना संस्था के साथ 1998 में जुड़कर काम किया। वहां से उन्हें हर महीने 25 सौ रुपये मिलते थे।
रात में कपड़ों की सिलाई से करीब तीन हजार रुपये कमा लेती थीं। खेती से भी कुछ रकम जुटाई। 2003 में उन्होंने प्रौढ़ महिलाओं को शिक्षित करने का जिम्मा उठाया। नारी चेतना फाउंडेशन की नींव रखी। महिलाओं के सहयोग से घर-घर जाकर प्रौढ़ महिलाओं को शिक्षित करने का प्रयास शुरू किया।
21 महिलाएं 3000 को कर रहीं शिक्षित
मुन्नी बेगम की उपलब्धि पर आठ अप्रैल 2018 को तत्कालीन उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने महिला सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किया था। उन्होंने बताया कि शुरू में महिलाओं को समझाना काफी मुश्किल रहा। लेकिन धीरे-धीरे शिक्षा का महत्व और उससे होने वाले लाभ को प्रौढ़ महिलाएं समझने लगीं। इस वक्त संगठन से जुड़ीं 21 महिलाएं गांवों में जाकर 3000 प्रौढ़ महिलाओं को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
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