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Raebareli News: फ्रिज के 16 हजार रुपये के विवाद में मारपीट, परिवाद दर्ज
Sat, 18 Jul 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 18 Jul 2026 12:55 AM IST
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रायबरेली। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने एक दलित व्यक्ति के साथ मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और जानलेवा हमले के आरोप से जुड़े मामले में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला रतापुर चौराहे पर फ्रिज के 16 हजार रुपये के भुगतान को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, राम खिलावन ने प्रमोद कुमार को 16 हजार रुपये में एक फ्रिज दिलाया था। आरोप है कि प्रमोद भुगतान टालता रहा। 25 मई 2026 की शाम करीब सात बजे राम खिलावन अपने कारीगर नीरज के साथ रुपये मांगने उसकी दुकान पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान प्रमोद ने जातिसूचक शब्द कहे और रुपये या फ्रिज वापस करने से इनकार कर दिया। विरोध करने पर उसने लात-घूंसों से मारपीट की और सरिया से हमला कर दिया। बीच-बचाव के लिए पहुंचे राम खिलावन के पुत्र महेश ने उन्हें बचाया।
राम खिलावन का आरोप है कि घटना की सूचना डायल-112 पर दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और न ही उनका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि घटना की तिथि, समय और आरोपी की पहचान स्पष्ट है। ऐसे में पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए मामले में अगली सुनवाई के लिए पांच अगस्त 2026 की तिथि बयान दर्ज करने के लिए नियत की है।
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प्रार्थना पत्र के अनुसार, राम खिलावन ने प्रमोद कुमार को 16 हजार रुपये में एक फ्रिज दिलाया था। आरोप है कि प्रमोद भुगतान टालता रहा। 25 मई 2026 की शाम करीब सात बजे राम खिलावन अपने कारीगर नीरज के साथ रुपये मांगने उसकी दुकान पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान प्रमोद ने जातिसूचक शब्द कहे और रुपये या फ्रिज वापस करने से इनकार कर दिया। विरोध करने पर उसने लात-घूंसों से मारपीट की और सरिया से हमला कर दिया। बीच-बचाव के लिए पहुंचे राम खिलावन के पुत्र महेश ने उन्हें बचाया।
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राम खिलावन का आरोप है कि घटना की सूचना डायल-112 पर दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और न ही उनका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि घटना की तिथि, समय और आरोपी की पहचान स्पष्ट है। ऐसे में पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए मामले में अगली सुनवाई के लिए पांच अगस्त 2026 की तिथि बयान दर्ज करने के लिए नियत की है।