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Raebareli News: ओई की सुरंग व प्राचीन टीले की हुई जांच
Sun, 02 Aug 2026 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:04 AM IST
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हरचंदपुर के ओई गांव में सुरंग में सीढ़ी लगाकर उतरने का प्रयास करती पुरातत्व विभाग की टीम।
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हरचंदपुर। क्षेत्र के ओई गांव में बारिश के बाद 22 जुलाई को जमीन धंसने से सामने आई सुरंग और प्राचीन अवशेषों की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने लगातार तीसरे दिन भी जांच अभियान जारी रखा। शनिवार को अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजेंद्र यादव के नेतृत्व में सात सदस्यीय विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरंग के भीतर उतरकर निरीक्षण किया। टीम ने पास स्थित प्राचीन टीले का भी सर्वेक्षण किया। कई महत्वपूर्ण पुरावशेषों को कब्जे में लेकर जांच के लिए सुरक्षित किया।
एएसआई टीम ने सुरंग के अंदर मिट्टी की विभिन्न परतों, ईंटों और अन्य संरचनाओं का सूक्ष्म परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम को मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, प्राचीन ईंटें और अन्य अवशेष मिले, जिनके संबंध में विशेषज्ञों ने प्रारंभिक तौर पर इस स्थल की प्राचीनता कुषाणकालीन होने की संभावना व्यक्त की है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण और रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
जांच के दौरान एसडीएम महाराजगंज चंद्र प्रकाश गौतम, सीओ महाराजगंज प्रदीप कुमार, राजस्व विभाग की टीम तथा पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। एएसआई टीम ने गांव निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर वर्ष 1985 से सुरक्षित रखे गए प्राचीन अवशेषों का भी दोबारा निरीक्षण किया। टीम ने उन अवशेषों का अध्ययन कर आवश्यक अभिलेख तैयार किए और उनकी तस्वीरें भी संकलित कीं। अधिकारियों का मानना है कि ये अवशेष भी ओई गांव के प्राचीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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शनिवार को निरीक्षण करने वाली टीम में अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. महेंद्र पाल, उप अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. निकिता चंद्रा, डॉ. सौरभ, डॉ. निधि वर्मा, विभा पांडे, रामनरेश यादव (मानचित्रकार) तथा योगेश पाल (छायाचित्रकार) शामिल रहे। टीम ने स्थल का विस्तृत सर्वेक्षण कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए।
एएसआई अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण और विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्थल के ऐतिहासिक महत्व पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो बारिश समाप्त होने के बाद वैज्ञानिक विधि से उत्खनन कराया जाएगा।
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एएसआई टीम ने सुरंग के अंदर मिट्टी की विभिन्न परतों, ईंटों और अन्य संरचनाओं का सूक्ष्म परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम को मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, प्राचीन ईंटें और अन्य अवशेष मिले, जिनके संबंध में विशेषज्ञों ने प्रारंभिक तौर पर इस स्थल की प्राचीनता कुषाणकालीन होने की संभावना व्यक्त की है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण और रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
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जांच के दौरान एसडीएम महाराजगंज चंद्र प्रकाश गौतम, सीओ महाराजगंज प्रदीप कुमार, राजस्व विभाग की टीम तथा पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। एएसआई टीम ने गांव निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर वर्ष 1985 से सुरक्षित रखे गए प्राचीन अवशेषों का भी दोबारा निरीक्षण किया। टीम ने उन अवशेषों का अध्ययन कर आवश्यक अभिलेख तैयार किए और उनकी तस्वीरें भी संकलित कीं। अधिकारियों का मानना है कि ये अवशेष भी ओई गांव के प्राचीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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शनिवार को निरीक्षण करने वाली टीम में अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. महेंद्र पाल, उप अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. निकिता चंद्रा, डॉ. सौरभ, डॉ. निधि वर्मा, विभा पांडे, रामनरेश यादव (मानचित्रकार) तथा योगेश पाल (छायाचित्रकार) शामिल रहे। टीम ने स्थल का विस्तृत सर्वेक्षण कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए।
एएसआई अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण और विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्थल के ऐतिहासिक महत्व पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो बारिश समाप्त होने के बाद वैज्ञानिक विधि से उत्खनन कराया जाएगा।