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Raebareli News: मखाना की खेती से चमकेगी किस्मत
Mon, 10 Aug 2026 01:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:14 AM IST
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रायबरेली। जिले के किसान अब मखाने की फसल भी तैयार करेंगे। पहली बार इसकी खेती करवाने की तैयारी है। इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग दी जाएगी। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि मखाना की खेती के जरिये किसानों की किस्मत चमकेगी। दरअसल, अभी तक जिले में गेहूं व धान समेत अन्य फसलों की ही खेती होती है।
उद्यान विभाग के मुताबिक पहली बार 14 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाना की खेती करने का लक्ष्य मिला है। मखाना की खेती तालाब और खेत विधि से होती है। तालाब विधि का लक्ष्य दो हेक्टेयर रखा गया है। इसमें कुल खर्च एक लाख 79 हजार रुपये आएगा, जबकि विभाग की तरफ से संबंधित किसान को 71,600 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
खेत विधि के जरिये मखाना की खेती करने का लक्ष्य 12 हेक्टेयर रखा गया है। इसमें एक हेक्टेयर पर 1.32 लाख रुपये का खर्च आएगा, जबकि विभाग की तरफ से 52,800 रुपये किसान को अनुदान के रूप में दिया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बाजार में मखाना की अच्छी मांग है। किसानों को अच्छा लाभ दिलाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभाग किसानों को मखाना की उन्नत किस्में, बोआई विधि, देखरेख व अन्य तकनीकी जानकारी देगा।
मखाना की खेती मुख्य रूप से पानी में की जाती है, ठीक उसी तरह जैसे सिंघाड़े की फसल उगाई जाती है। जिन इलाकों में जलभराव रहता है या जहां पारंपरिक फसलें सफल नहीं हो पातीं, वहां मखाना किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित होगा।
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इसलिए बढ़ा मखाने की खेती का महत्व
अफसरों का मानना है कि खेती का महत्व तेजी से इसलिए बढ़ा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसे एक बेहतरीन सुपरफूड और हेल्दी स्नैक माना जाने लगा है। कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन और औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग में भारी उछाल आया है, जिससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिल रहा है। मखाना में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम भरपूर मात्रा में होते हैं। यह वजन घटाने और डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है।
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इच्छुक किसान उद्यान विभाग में कराएं पंजीकरण
प्रदेश सरकार परंपरागत खेती के साथ-साथ वैकल्पिक और लाभकारी फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसी के तहत अब जिले में मखाना की खेती कराई जाएगी। खेती करने वाले इच्छुक किसान उद्यान विभाग में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। खेती करने पर अनुदान भी दिया जाएगा। खेती के जरिये किसान अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं।
-जयराम वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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उद्यान विभाग के मुताबिक पहली बार 14 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाना की खेती करने का लक्ष्य मिला है। मखाना की खेती तालाब और खेत विधि से होती है। तालाब विधि का लक्ष्य दो हेक्टेयर रखा गया है। इसमें कुल खर्च एक लाख 79 हजार रुपये आएगा, जबकि विभाग की तरफ से संबंधित किसान को 71,600 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
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खेत विधि के जरिये मखाना की खेती करने का लक्ष्य 12 हेक्टेयर रखा गया है। इसमें एक हेक्टेयर पर 1.32 लाख रुपये का खर्च आएगा, जबकि विभाग की तरफ से 52,800 रुपये किसान को अनुदान के रूप में दिया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बाजार में मखाना की अच्छी मांग है। किसानों को अच्छा लाभ दिलाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभाग किसानों को मखाना की उन्नत किस्में, बोआई विधि, देखरेख व अन्य तकनीकी जानकारी देगा।
मखाना की खेती मुख्य रूप से पानी में की जाती है, ठीक उसी तरह जैसे सिंघाड़े की फसल उगाई जाती है। जिन इलाकों में जलभराव रहता है या जहां पारंपरिक फसलें सफल नहीं हो पातीं, वहां मखाना किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित होगा।
इसलिए बढ़ा मखाने की खेती का महत्व
अफसरों का मानना है कि खेती का महत्व तेजी से इसलिए बढ़ा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसे एक बेहतरीन सुपरफूड और हेल्दी स्नैक माना जाने लगा है। कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन और औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग में भारी उछाल आया है, जिससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिल रहा है। मखाना में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम भरपूर मात्रा में होते हैं। यह वजन घटाने और डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है।
इच्छुक किसान उद्यान विभाग में कराएं पंजीकरण
प्रदेश सरकार परंपरागत खेती के साथ-साथ वैकल्पिक और लाभकारी फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसी के तहत अब जिले में मखाना की खेती कराई जाएगी। खेती करने वाले इच्छुक किसान उद्यान विभाग में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। खेती करने पर अनुदान भी दिया जाएगा। खेती के जरिये किसान अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं।
-जयराम वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी