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Raebareli News: मूल मालिक को भूमि वापस करने का आदेश, आरडीए को झटका

संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Wed, 18 Mar 2026 01:33 AM IST
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Order to return land to original owner, shock to RDA
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रायबरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) के खिलाफ दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में मूल संपत्ति धारक को भूमि वापस करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ब्रजराज सिंह और संगीता चंद्रा की पीठ ने प्राधिकरण द्वारा एकता विहार कॉलोनी में संबंधित भूमि के अधिग्रहण, आवंटन, बैनामा और दो मंजिला निर्माण के बाद जमीन मूल संपत्ति धारक को वापस करने का निर्देश दिया है।
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अधिग्रहण के समय आरडीए की ओर से बरती गई लापरवाही का खामियाजा अब उक्त भूमि के आवंटियों को भुगतना पड़ेगा। कोर्ट के इस फैसले को नजीर बनाकर अन्य मूल संपत्ति धारक भी कोर्ट का रुख कर सकते हैं। इससे एकता विहार कॉलोनी के डेढ़ सौ आवंटियों को भी अपना आशियाना छिन जाने की चिंता सताने लगी है।
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लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर शहर के अख्तियारपुर में माता बख्श की भूमि को आरडीए ने 30 मई 2009 को अधिग्रहीत किया था। भूमि अधिग्रहण के बाद माता बख्श ने वर्ष 2010 में और मुआवजा दिलाने के लिए जिलाधिकारी से अनुरोध किया था। इसके बाद वर्ष 2015 में उन्होंने आरडीए से जमीन वापसी के लिए दीवानी कोर्ट में वाद दाखिल किया था। इसके बाद वर्ष 2022 में माता बख्श ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कोर्ट से अधिग्रहीत भूमि को वापस दिलाने की गुहार लगाई थी।

इस बीच आरडीए ने सात जुलाई 2023 को संबंधित भूमि के साथ अन्य प्लॉटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी। दो नवंबर 2023 को हाईकोर्ट ने माता बख्श को जमीन के लिए सरकार के पास जाने का आदेश दिया। हालांकि 20 फरवरी 2024 को सरकार ने जमीन वापस करने से इन्कार कर दिया।

आरडीए ने आवंटन प्रक्रिया पूरी करते हुए आवंटी आदिल खान के पक्ष में दो मार्च 2024 को बैनामा कर 22 मार्च 2024 को आवंटी को कब्जा भी दे दिया। आवंटी आदिल खान ने 28 मार्च 2024 को आरडीए से मैप पास कराकर भूमि पर दो मंजिला भवन का निर्माण कार्य भी पूरा करा लिया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 10 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने भूमि पर स्थगन आदेश पारित किया। अब कोर्ट ने संबंधित भूमि को मूल संपत्ति धारक को वापस करने का फैसला सुनाया है।

डेढ़ सौ आवंटियों के लिए खतरा
आरडीए के स्तर से भूमि के अधिग्रहण और आवंटन में बरती गई लापरवाही खामियाजा अब आवंटी आदिल को भुगतना पड़ेगा। कोर्ट का यह फैसला एकता विहार कॉलोनी में अधिगृहीत किए गए अन्य भूखंडों के मूल स्वामियों के लिए भी एक नजीर बन सकता है। कोर्ट के इस आदेश की जानकारी के बाद से कॉलोनी के करीब डेढ़ सौ आवंटियों को अपना आशियाना छिन जाने की चिंता भी सताने लगी है। आरडीए इस स्थिति से निपटने के लिए अब आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
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