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Raebareli News: बिच्छू कोड वर्ड से सक्रिय था वाहन चोरों का गिरोह
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:33 AM IST
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रायबरेली। अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह ने लग्जरी वाहन चुराने के लिए बिच्छू नाम का कोड वर्ड बना रखा था। मोबाइल से जो बातचीत होती थी, उसमें बिच्छू कोड वर्ड से ही बात होती है। शातिर जब बातचीत तय करते थे तो बोलते थे कि बिच्छू देख लिया है। बिच्छू की बिक्री हुई तो अच्छा मुनाफा होगा। इसके बाद तय योजना के तहत वाहनों को चुराया जाता था।
पुलिस के हत्थे चढ़े वाहन चोरों की पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पकड़े गए आरोपियों का यूपी के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, मणिपुर, दिल्ली प्रांतों में नेवटर्क फैले होने की बात सामने आई है। यह सभी कई बार जेल भी जा चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद वाहन चोरी के कार्य में लिप्त हो गए।
एसओजी, सर्विलांस टीम और पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के आठ शातिरों अनिल उर्फ अनीश, रिंकू उर्फ राहुल उर्फ हेडन, जितेंद्र गुप्ता उर्फ जीतू, प्रदीप सिंह उर्फ पिंटू, अरविंद, राकेश कुमार उर्फ छोटू, नौशाद उर्फ फईम उर्फ राजू, राजू सिंह उर्फ योगेश को पकड़कर जेल भेजा है।
इन सभी की निशानदेही पर पुलिस ने एक करोड़ कीमत की छह चोरी की गाड़ियां बरामद की हैं। एक वाहन रायबरेली के बछरावां इलाके, जबकि अन्य पांच वाहनों के दिल्ली, एनसीआर से चोरी की होने की बात सामने आई थी। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, मणिपुर, बिहार से करीब एक हजार चार पहिया वाहन चुराए हैं।
पुलिस से बचने के लिए मोबाइल फोन पर सभी बॉस या फिर गुरु कहकर बातचीत करते थे। कोई आरोपी किसी का नाम नहीं लेता था। आपस में यह तय कर रखा था कि यदि कोई किसी का नाम लेकर बात करने लगे तो समझ लेना कि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है। वाहन चोरों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई मामले दर्ज हैं, जिनका ब्योरा पुलिस जुटा रही है।
एसपी रवि कुमार कहते हैं कि गिरोह शातिर है। काफी समय से कई राज्यों में वाहन चोरी कर रहा था। गिरोह से संबंधित अन्य जानकारियों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
जितेंद्र और नौशाद गिरोह के सरगना
पुलिस की जांच में पता चला है कि एटा जिले का जितेंद्र गुप्ता उर्फ जीतू और पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी नौशाद उर्फ फईम उर्फ राजू गिरोह के सरगना हैं। सभी 2008 से वाहन चोर गिरोह में शामिल हुए। बताते हैं कि जितेंद्र बेहद शातिर है। वह गाड़ियों के नंबर के अलावा जाली दस्तावेज तैयार कर लेता था।
वाहन चोरी होने के बाद तय स्थान पर उन्हें पहुंचाने का काम जितेंद्र गुप्ता करता था। इसके बाद चोरी किए गए वाहनों को बिक्री काम नौशाद करता था। वाहनों की बिक्री से जो रुपये मिलते थे, उसे सभी आपस में बांट लेते थे।
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पुलिस के हत्थे चढ़े वाहन चोरों की पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पकड़े गए आरोपियों का यूपी के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, मणिपुर, दिल्ली प्रांतों में नेवटर्क फैले होने की बात सामने आई है। यह सभी कई बार जेल भी जा चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद वाहन चोरी के कार्य में लिप्त हो गए।
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एसओजी, सर्विलांस टीम और पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के आठ शातिरों अनिल उर्फ अनीश, रिंकू उर्फ राहुल उर्फ हेडन, जितेंद्र गुप्ता उर्फ जीतू, प्रदीप सिंह उर्फ पिंटू, अरविंद, राकेश कुमार उर्फ छोटू, नौशाद उर्फ फईम उर्फ राजू, राजू सिंह उर्फ योगेश को पकड़कर जेल भेजा है।
इन सभी की निशानदेही पर पुलिस ने एक करोड़ कीमत की छह चोरी की गाड़ियां बरामद की हैं। एक वाहन रायबरेली के बछरावां इलाके, जबकि अन्य पांच वाहनों के दिल्ली, एनसीआर से चोरी की होने की बात सामने आई थी। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, मणिपुर, बिहार से करीब एक हजार चार पहिया वाहन चुराए हैं।
पुलिस से बचने के लिए मोबाइल फोन पर सभी बॉस या फिर गुरु कहकर बातचीत करते थे। कोई आरोपी किसी का नाम नहीं लेता था। आपस में यह तय कर रखा था कि यदि कोई किसी का नाम लेकर बात करने लगे तो समझ लेना कि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है। वाहन चोरों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई मामले दर्ज हैं, जिनका ब्योरा पुलिस जुटा रही है।
एसपी रवि कुमार कहते हैं कि गिरोह शातिर है। काफी समय से कई राज्यों में वाहन चोरी कर रहा था। गिरोह से संबंधित अन्य जानकारियों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
जितेंद्र और नौशाद गिरोह के सरगना
पुलिस की जांच में पता चला है कि एटा जिले का जितेंद्र गुप्ता उर्फ जीतू और पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी नौशाद उर्फ फईम उर्फ राजू गिरोह के सरगना हैं। सभी 2008 से वाहन चोर गिरोह में शामिल हुए। बताते हैं कि जितेंद्र बेहद शातिर है। वह गाड़ियों के नंबर के अलावा जाली दस्तावेज तैयार कर लेता था।
वाहन चोरी होने के बाद तय स्थान पर उन्हें पहुंचाने का काम जितेंद्र गुप्ता करता था। इसके बाद चोरी किए गए वाहनों को बिक्री काम नौशाद करता था। वाहनों की बिक्री से जो रुपये मिलते थे, उसे सभी आपस में बांट लेते थे।