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Raebareli News: बेतहाशा गर्मी में फुंक रहे हैं ओवरलोड ट्रांसफार्मर
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 25 Jun 2026 01:01 AM IST
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त्रिपुला पावर हाउस स्थित वर्कशॉप में रिपेयर किए गए ट्रांसफार्मर।
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रायबरेली। भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। ट्रांसफार्मरों पर बढ़ते लोड का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। जिले में हर दिन औसतन 10 से 12 ट्रांसफार्मर खराब होकर मरम्मत के लिए पहुंच रहे हैं। जून माह में अब तक 240 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं, जिससे उपभोक्ताओं को लगातार बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लाइन फॉल्ट और ओवरलोडिंग ट्रांसफार्मर खराब होने की प्रमुख वजह हैं।
भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग 325 मेगावाट के पार पहुंच गई है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों पर दबाव बढ़ गया है। कहीं तार टूटने तो कहीं लाइनों में फॉल्ट की वजह से ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। प्रतिदिन 10 से 12 खराब ट्रांसफार्मर त्रिपुला स्थित वर्कशॉप में मरम्मत के लिए पहुंच रहे हैं। ट्रांसफार्मर खराब होने से कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक बिजली संकट झेलना पड़ रहा है।
हालांकि विभागीय निर्देशों के अनुसार शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के भीतर फुंके ट्रांसफार्मर को बदलकर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाना चाहिए, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कई बार यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा और रखरखाव पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके बावजूद इनके खराब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है।
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वर्कशॉप में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का कार्य लगातार चल रहा है, लेकिन उन्हें ढोने के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्तमान में 15 वाहनों की आवश्यकता है, जबकि केवल आठ वाहन ही कार्यरत हैं। इसके चलते खराब ट्रांसफार्मरों को समय पर बदलने में दिक्कतें आ रही हैं।
मुख्य अभियंता रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि खराब ट्रांसफार्मरों को समय से बदलने के निर्देश दिए गए हैं। वर्कशॉप में भी मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है। कोशिश रहती है कि ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद निर्धारित समय के भीतर संबंधित क्षेत्र में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाए।
गर्मी के कारण गर्म हो रहे ट्रांसफार्मर, बारिश हो तो मिले राहत
भीषण गर्मी और बढ़ी बिजली खपत का असर ट्रांसफार्मरों के तापमान पर भी पड़ रहा है। बिजली विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक ट्रांसफार्मरों का सामान्य तापमान करीब 60 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकांश ट्रांसफार्मरों का तापमान 65 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। तापमान बढ़ने से उनके फुंकने की आशंका भी बढ़ जाती है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि बारिश होती है तो तापमान में कमी आएगी और ट्रांसफार्मरों पर पड़ने वाला तापीय दबाव भी घटेगा। इससे ट्रांसफार्मर खराब होने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग 325 मेगावाट के पार पहुंच गई है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों पर दबाव बढ़ गया है। कहीं तार टूटने तो कहीं लाइनों में फॉल्ट की वजह से ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। प्रतिदिन 10 से 12 खराब ट्रांसफार्मर त्रिपुला स्थित वर्कशॉप में मरम्मत के लिए पहुंच रहे हैं। ट्रांसफार्मर खराब होने से कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक बिजली संकट झेलना पड़ रहा है।
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हालांकि विभागीय निर्देशों के अनुसार शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के भीतर फुंके ट्रांसफार्मर को बदलकर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाना चाहिए, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कई बार यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा और रखरखाव पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके बावजूद इनके खराब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है।
वर्कशॉप में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का कार्य लगातार चल रहा है, लेकिन उन्हें ढोने के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्तमान में 15 वाहनों की आवश्यकता है, जबकि केवल आठ वाहन ही कार्यरत हैं। इसके चलते खराब ट्रांसफार्मरों को समय पर बदलने में दिक्कतें आ रही हैं।
मुख्य अभियंता रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि खराब ट्रांसफार्मरों को समय से बदलने के निर्देश दिए गए हैं। वर्कशॉप में भी मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है। कोशिश रहती है कि ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद निर्धारित समय के भीतर संबंधित क्षेत्र में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाए।
गर्मी के कारण गर्म हो रहे ट्रांसफार्मर, बारिश हो तो मिले राहत
भीषण गर्मी और बढ़ी बिजली खपत का असर ट्रांसफार्मरों के तापमान पर भी पड़ रहा है। बिजली विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक ट्रांसफार्मरों का सामान्य तापमान करीब 60 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकांश ट्रांसफार्मरों का तापमान 65 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। तापमान बढ़ने से उनके फुंकने की आशंका भी बढ़ जाती है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि बारिश होती है तो तापमान में कमी आएगी और ट्रांसफार्मरों पर पड़ने वाला तापीय दबाव भी घटेगा। इससे ट्रांसफार्मर खराब होने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।