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Raebareli News: बाजार की ऑक्सीजन पर अटकी मरीजों की सांसें
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:32 AM IST
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जिला अस्पताल में वाहन से उतरते बाजार से भरवाकर मंगवाए गए ऑक्सीजन सिलिंडर।
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रायबरेली। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों की सांस बाजार की ऑक्सीजन पर अटकी है। 60 लाख की लागत से स्थापित प्लांट से अब तक ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू नहीं हुआ, तो दूसरा प्लांट छह माह से बेकार पड़ा है। यह दीगर बात है कि प्लांट को ठीक कराने के लिए राज्य सरकार से मिले 11 लाख रुपये काे चार माह तक दबाए रखने के बाद वापस कर दिया गया। प्लांटों से ऑक्सीजन उत्पादन में नाकाम जिला अस्पताल प्रशासन हर माह बाजार से करीब चार हजार लीटर प्राणवायु खरीद रहा है।
कोरोना काल में ऑक्सीजन की किल्लत के बाद पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल में 1000 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) ऑक्सीजन तैयार करने का प्लांट स्थापित किया गया था। इस प्लांट से अस्पताल के सभी 300 बेडों पर सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही थी। अक्तूबर 2025 में अचानक प्लांट के कंप्रेशर ने काम करना बंद करा दिया।
शासन ने दिसंबर 2025 में खराब प्लांट को ठीक कराने के लिए 11 लाख रुपये से अधिक की धनराशि जिला अस्पताल को दी थी। प्लांट को ठीक कराकर सभी बेडों पर ऑक्सीजन की आपूर्ति के आदेश दिए गए थे, लेकिन चार माह तक बजट को दबाए रखने के बाद बीती 31 मार्च को सरकार को वापस कर दिया गया। बजट मिलने के बाद भी प्लांट को ठीक नहीं कराकर बाजार से धड़ल्ले से ऑक्सीजन की खरीद की जा रही है। हर माह 100 से अधिक छोटे और 40 से अधिक बड़े ऑक्सीजन सिलिंडरों को बाजार से भरवाया जा रहा है। पिछले मार्च माह में करीब चार हजार लीटर ऑक्सीजन बाजार से खरीदी गई।
इनसेट
हर रोज भर्ती होते सांस की समस्या के 25 से 30 मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोज सांस की समस्या के करीब 25 से 30 मरीजों को भर्ती कराना पड़ता है। मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर या कंसंट्रेटर के भरोसे रखा जा रहा है। अस्पताल में भर्ती होने वाले सांस की समस्या के कम से कम एक मरीज की रोज मौत हो रही है।
इनसेट
आखिर साइरेक्स वाले क्यों नहीं सुनते
अस्पताल में लगे प्लांट को ठीक करने की जिम्मेदारी शासन स्तर से साइरेक्स कंपनी को दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि साइरेक्स वाले नहीं सुनते हैं। कई बार फोन किया गया, लेकिन प्लांट को ठीक करने नहीं आए।
इनसेट
जिला अस्पताल के सीएमएस को ऑक्सीजन प्लांट को ठीक करवाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लांट के लिए बजट की दोबारा डिमांड भेजने के लिए कहा गया है। भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही प्रकाश में नहीं आनी चाहिए।
डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
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शासन ने दिसंबर 2025 में खराब प्लांट को ठीक कराने के लिए 11 लाख रुपये से अधिक की धनराशि जिला अस्पताल को दी थी। प्लांट को ठीक कराकर सभी बेडों पर ऑक्सीजन की आपूर्ति के आदेश दिए गए थे, लेकिन चार माह तक बजट को दबाए रखने के बाद बीती 31 मार्च को सरकार को वापस कर दिया गया। बजट मिलने के बाद भी प्लांट को ठीक नहीं कराकर बाजार से धड़ल्ले से ऑक्सीजन की खरीद की जा रही है। हर माह 100 से अधिक छोटे और 40 से अधिक बड़े ऑक्सीजन सिलिंडरों को बाजार से भरवाया जा रहा है। पिछले मार्च माह में करीब चार हजार लीटर ऑक्सीजन बाजार से खरीदी गई।
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हर रोज भर्ती होते सांस की समस्या के 25 से 30 मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोज सांस की समस्या के करीब 25 से 30 मरीजों को भर्ती कराना पड़ता है। मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर या कंसंट्रेटर के भरोसे रखा जा रहा है। अस्पताल में भर्ती होने वाले सांस की समस्या के कम से कम एक मरीज की रोज मौत हो रही है।
इनसेट
आखिर साइरेक्स वाले क्यों नहीं सुनते
अस्पताल में लगे प्लांट को ठीक करने की जिम्मेदारी शासन स्तर से साइरेक्स कंपनी को दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि साइरेक्स वाले नहीं सुनते हैं। कई बार फोन किया गया, लेकिन प्लांट को ठीक करने नहीं आए।
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जिला अस्पताल के सीएमएस को ऑक्सीजन प्लांट को ठीक करवाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लांट के लिए बजट की दोबारा डिमांड भेजने के लिए कहा गया है। भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही प्रकाश में नहीं आनी चाहिए।
डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

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