{"_id":"69f658dbcaa7f7116703384a","slug":"40-potters-will-get-electric-potters-wheels-under-the-mati-kala-yojana-rampur-news-c-282-1-rmp1027-170014-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur News: माटी कला योजना से 40 कुम्हारों को मिलेंगे बिजली चालित चाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur News: माटी कला योजना से 40 कुम्हारों को मिलेंगे बिजली चालित चाक
विज्ञापन
विज्ञापन
रामपुर। माटी कला योजना के तहत जिले के कुम्हारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल तेज हो गई है। इस योजना के अंतर्गत 40 पात्र कुम्हारों को बिजली से चलने वाले चाक उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके कार्य में तेजी और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
जिला ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। अब तक कुम्हार हाथ से चलने वाले चाक पर निर्भर थे, जिससे उत्पादन सीमित रहता था। बिजली चालित चाक मिलने से कम समय में अधिक और बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक कारीगर निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित लाभार्थियों को निशुल्क या अनुदानित दर पर चाक वितरित किए जाएंगे। इस पहल से न केवल पारंपरिक माटी कला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को भी इस पेशे की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी। विभाग को उम्मीद है कि इससे जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और कारीगर आत्मनिर्भर बनेंगे।
-- -- -- -- -- --
माटी कला योजना से कुम्हारों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बिजली चालित चाक और पगमिल मशीन से उनके कार्य में तेजी आएगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा और कारीगरों की आय में सुधार होगा, साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
-भूपेंद्र सिंह, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
Trending Videos
जिला ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। अब तक कुम्हार हाथ से चलने वाले चाक पर निर्भर थे, जिससे उत्पादन सीमित रहता था। बिजली चालित चाक मिलने से कम समय में अधिक और बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक कारीगर निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित लाभार्थियों को निशुल्क या अनुदानित दर पर चाक वितरित किए जाएंगे। इस पहल से न केवल पारंपरिक माटी कला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को भी इस पेशे की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी। विभाग को उम्मीद है कि इससे जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और कारीगर आत्मनिर्भर बनेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
माटी कला योजना से कुम्हारों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बिजली चालित चाक और पगमिल मशीन से उनके कार्य में तेजी आएगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा और कारीगरों की आय में सुधार होगा, साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
-भूपेंद्र सिंह, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
