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Rampur News: शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख की हत्या में चारों आरोपी बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:44 AM IST
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पांच साल पहले गोली मारकर की गई थी हत्या, बयानों में विरोधाभास के कारण बरी हुए आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की पांच साल पहले हुई हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने इस मामले में भाजपा नेता समेत चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। तीन आरोपी इस वक्त जमानत पर चल रहे हैं, जबकि एक आरोपी अब भी जेल में है। इस फैसले के बाद भाजपा नेता की रिहाई का रास्ता भी साफ हो गया है।
यह मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ज्वाला नगर स्थित आगापुर रोड का है। घटना 20 मई 2020 की रात नौ बजे की है। आगापुर रोड निवासी शिव सेना जिला प्रमुख अनुराग शर्मा रात में घर के पास ही टहल रहे थे। इस दौरान बाइक पर आए दो युवकों ने उनके पीठ में दो गोली मार दी।
घटना के बाद आनन-फानन में अनुराग को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। इस मामले में उनकी सभासद पत्नी शालिनी शर्मा की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए भाजपा नेता छत्रपाल सिंह यादव, ज्वाला नगर निवासी हिमांशु उर्फ बाबू, राज किशोर और पवन यादव को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की विवेचना करने के बाद मामले चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। बृहस्पतिवार को इस कोर्ट में इस मुकदमे का फैसला सुनाया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अनुराग की पत्नी शालिनी शर्मा समेत 12 गवाहों को पेश किया गया। साथ ही आरोपियों को सजा देने की अपील की,जबकि बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों को रंजिश के आधार पर फंसाया गया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले में आरोपी हिमांशु उर्फ बाबू, राज किशोर, पवन यादव और छत्रपाल सिंह को बरी कर दिया। बताया कि इस वक्त छत्रपाल सिंह जेल में हैं। केस से बरी होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
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हत्या के बाद फैला था तनाव, दो दिन तक चलता रहा था हंगामा
कोरोना काल के दौरान हुई थी शिवसेना नेता की हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की हत्या के बाद सिविल लाइंस क्षेत्र में तनाव फैल गया था। उनके समर्थकों ने ज्वाला नगर से लेकर अस्पताल तक जमकर हंगामा किया था। पुलिस को काफी मशक्कत के बाद स्थिति संभालनी पड़ी थी। शव यात्रा के दौरान भी आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर हंगामा हुआ था।
20 मई 20 की रात में ज्वाला नगर में आगापुर रोड पर शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त कोरोना काल चल रहा था और पूरे जिले में लॉकडाउन भी लगा हुआ था। इस घटना के बाद तमाम लोेगों की भीड़ सड़क पर उतर आई थी। ज्वाला नगर से लेकर जिला अस्पताल तक लोगों की भीड़ जमा थी। अस्पताल में समर्थकों ने यह कहकर हंगामा करना शुरू कर दिया था कि अनुराग की मौत नहीं हुई है, उनकी सांस चल चल रही है।
हंगामा देखकर जिला अस्पताल के डॉक्टर भाग खड़े हुए थे। उनके समर्थकों ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी थी और उनको एंबुलेंस में डालकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में जाने लगे। मामले की जानकारी के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
तत्कालीन डीएम ने पुलिस को निर्देश दिया था कि एंबुलेंस को फिर से अस्पताल में लाया जाए। इसके बाद पुलिस दोबारा से एंबुलेंस को जिला अस्पताल लेकर आई जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उनको फिर से मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के बाद भाजपा के साथ ही अन्य हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया था। अगले दिन जब उनका अंतिम संस्कार हुआ तो उसमें भी लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर सड़क पर उतर आई थी। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रही थी।
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पुलिस की कमजोर विवेचना और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का मिला फायदा
रामपुर। अनुराग शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने शुरुआत में तो काफी तेजी दिखाई थी लेकिन जब आरोपियों को जेल भेज दिया गया तब पुलिस सुस्त पड़ गई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते हुए पुलिस अफसरों समेत 12 लोगों को गवाह बनाया। कोर्ट में गवाहों के बयान में विरोधाभास दिखा। बचाव पक्ष को इस बात का भी फायदा मिला जिसमें चश्मदीद गवाह ने अपने बयान में आरोपियों के नाम तो लिए लेकिन इस मामले की प्राथमिकी अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई। संवाद
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12 गवाहों पर भारी पड़ी बचाव पक्ष की दलीलें
रामपुर। अनुराग शर्मा हत्याकांड में अभियोेजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए थे लेकिन गवाहों के बयानों में विरोधाभास रहा। यही वजह रही कि बचाव पक्ष की दलीलों के आगे गवाहों के गवाही टिक नहीं सकी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार बचाव पक्ष की ओर से गवाहों से जिरह की गई जिसमें बयानों में विरोधाभास रहा। संवाद
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फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दूंगी : शालिनी
रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की पत्नी एवं पूर्व सभासद शालिनी शर्मा का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह संतुष्ट नहीं हैं। वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि उनको लोगों का सपोर्ट मिल गया होता तो वह यह केस नहीं हारतीं। अभी यह लड़ाई जारी रहेगी। संवाद
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रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की पांच साल पहले हुई हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने इस मामले में भाजपा नेता समेत चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। तीन आरोपी इस वक्त जमानत पर चल रहे हैं, जबकि एक आरोपी अब भी जेल में है। इस फैसले के बाद भाजपा नेता की रिहाई का रास्ता भी साफ हो गया है।
यह मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ज्वाला नगर स्थित आगापुर रोड का है। घटना 20 मई 2020 की रात नौ बजे की है। आगापुर रोड निवासी शिव सेना जिला प्रमुख अनुराग शर्मा रात में घर के पास ही टहल रहे थे। इस दौरान बाइक पर आए दो युवकों ने उनके पीठ में दो गोली मार दी।
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घटना के बाद आनन-फानन में अनुराग को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। इस मामले में उनकी सभासद पत्नी शालिनी शर्मा की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए भाजपा नेता छत्रपाल सिंह यादव, ज्वाला नगर निवासी हिमांशु उर्फ बाबू, राज किशोर और पवन यादव को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की विवेचना करने के बाद मामले चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। बृहस्पतिवार को इस कोर्ट में इस मुकदमे का फैसला सुनाया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अनुराग की पत्नी शालिनी शर्मा समेत 12 गवाहों को पेश किया गया। साथ ही आरोपियों को सजा देने की अपील की,जबकि बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों को रंजिश के आधार पर फंसाया गया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले में आरोपी हिमांशु उर्फ बाबू, राज किशोर, पवन यादव और छत्रपाल सिंह को बरी कर दिया। बताया कि इस वक्त छत्रपाल सिंह जेल में हैं। केस से बरी होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
हत्या के बाद फैला था तनाव, दो दिन तक चलता रहा था हंगामा
कोरोना काल के दौरान हुई थी शिवसेना नेता की हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की हत्या के बाद सिविल लाइंस क्षेत्र में तनाव फैल गया था। उनके समर्थकों ने ज्वाला नगर से लेकर अस्पताल तक जमकर हंगामा किया था। पुलिस को काफी मशक्कत के बाद स्थिति संभालनी पड़ी थी। शव यात्रा के दौरान भी आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर हंगामा हुआ था।
20 मई 20 की रात में ज्वाला नगर में आगापुर रोड पर शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त कोरोना काल चल रहा था और पूरे जिले में लॉकडाउन भी लगा हुआ था। इस घटना के बाद तमाम लोेगों की भीड़ सड़क पर उतर आई थी। ज्वाला नगर से लेकर जिला अस्पताल तक लोगों की भीड़ जमा थी। अस्पताल में समर्थकों ने यह कहकर हंगामा करना शुरू कर दिया था कि अनुराग की मौत नहीं हुई है, उनकी सांस चल चल रही है।
हंगामा देखकर जिला अस्पताल के डॉक्टर भाग खड़े हुए थे। उनके समर्थकों ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी थी और उनको एंबुलेंस में डालकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में जाने लगे। मामले की जानकारी के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
तत्कालीन डीएम ने पुलिस को निर्देश दिया था कि एंबुलेंस को फिर से अस्पताल में लाया जाए। इसके बाद पुलिस दोबारा से एंबुलेंस को जिला अस्पताल लेकर आई जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उनको फिर से मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के बाद भाजपा के साथ ही अन्य हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया था। अगले दिन जब उनका अंतिम संस्कार हुआ तो उसमें भी लॉकडाउन के नियमों को तोड़कर सड़क पर उतर आई थी। साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रही थी।
पुलिस की कमजोर विवेचना और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का मिला फायदा
रामपुर। अनुराग शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने शुरुआत में तो काफी तेजी दिखाई थी लेकिन जब आरोपियों को जेल भेज दिया गया तब पुलिस सुस्त पड़ गई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते हुए पुलिस अफसरों समेत 12 लोगों को गवाह बनाया। कोर्ट में गवाहों के बयान में विरोधाभास दिखा। बचाव पक्ष को इस बात का भी फायदा मिला जिसमें चश्मदीद गवाह ने अपने बयान में आरोपियों के नाम तो लिए लेकिन इस मामले की प्राथमिकी अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई। संवाद
12 गवाहों पर भारी पड़ी बचाव पक्ष की दलीलें
रामपुर। अनुराग शर्मा हत्याकांड में अभियोेजन की ओर से 12 गवाह पेश किए गए थे लेकिन गवाहों के बयानों में विरोधाभास रहा। यही वजह रही कि बचाव पक्ष की दलीलों के आगे गवाहों के गवाही टिक नहीं सकी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार बचाव पक्ष की ओर से गवाहों से जिरह की गई जिसमें बयानों में विरोधाभास रहा। संवाद
फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दूंगी : शालिनी
रामपुर। शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की पत्नी एवं पूर्व सभासद शालिनी शर्मा का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह संतुष्ट नहीं हैं। वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि उनको लोगों का सपोर्ट मिल गया होता तो वह यह केस नहीं हारतीं। अभी यह लड़ाई जारी रहेगी। संवाद
