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Saharanpur News: बनाना था पुल, कागजों में दर्शा दी पुलिया, लगी आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:58 AM IST
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सहारनपुर। 267 करोड़ रुपये से बन रहे 135 एमएलडी के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण में एक बार फिर से आपत्ति लग गई। इसकी वजह है कि धरातल पर पुल बनना है, लेकिन एनओसी के लिए कागजों में पुलिया दर्शा दी गई है। मामला पकड़ में आने पर सिंचाई विभाग ने फिर आपत्ति लगा दी है।
एसटीपी का प्रस्ताव करीब साढ़े पांच वर्ष पहले भेजा गया था, जिसके बाद मंजूरी मिल गई थी, लेकिन जमीन फाइनल न होने की वजह से कार्य समय से शुरू नहीं हो सका था। करीब दस महीने पहले काम शुरू किया गया था। आपत्ति लगने की मुख्य वजह एसटीपी परिसर में ढमोला नदी पर बनने वाला पुल है। दरअसल, सिंचाई विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने एनओसी के लिए फाइल ऊपर भेजी थी, जो शासन में जाने से पहले ओखला स्थित चीफ कार्यालय गई।
चीफ ने देखा कि एसटीपी परिसर में बनने वाले करीब 20 फीट चौड़े पुल को कार्यदायी संस्था ने बॉक्स कवर्ड (छोटी पुलिया) दर्शाया हुआ है, जबकि हकीकत यह है कि यह एक मजबूत और बड़ा पुल होगा, जो एसटीपी के वाहनों के इस्तेमाल के लिए बनेगा। इससे भारी वाहन गुजरेंगे, लेकिन एनओसी के दस्तावेजों में इसे छिपाया गया। ऐसे में फाइल शासन में जाने की बजाय चीफ कार्यालय से आपत्ति लगकर वापस आ गई है। इसकी वजह से कार्य प्रभावित हो रहा है। कार्यदायी संस्था कार्य तो कर रही है, लेकिन नदी के दायरे से बाहर का काम निपटा रही है। ढमोला में होने वाले कार्य आपत्ति हटने और एनओसी मिलने के बाद होंगे।
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पहले भी लग चुकी आपत्ति
एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है। करीब चार महीने पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना करते हुए पाया था कि एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई काफी कम कर दी गई है, जो बाढ़ जैसी स्थिति के लिए ठीक नहीं है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में काम रोक दिया गया था। इसके बाद ढमोला नदी की चौड़ाई पीछे के बराबर छोड़ने की वजह से एसटीपी की जमीन कम हो गई थी, जिसमें प्रशासन के सहयोग से जमीन पूरी कर काम शुरू कराया गया था।
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बार-बार आ रही अड़चन
एसटीपी के टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा था। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद डीपीआर दोबारा तैयार करनी पड़ी थी। उसके बाद दो बार आपत्ति लग चुकी है। बता दें कि एसटीपी का कार्य 31 अक्तूबर 2027 तक पूरा होना है।
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हिंडन और यमुना तक होगा असर
पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा। एसटीपी के जरिए शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर होगा।
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एसटीपी परिसर में ढमोला नदी पर बनने वाले पुल को लेकर चीफ कार्यालय से आपत्ति लगी है। कार्यदायी संस्था ने बड़े पुल को बॉक्स कवर्ड दर्शाया था, जिस पर आपत्ति लगी है।
- राम बाबू, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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एसटीपी का प्रस्ताव करीब साढ़े पांच वर्ष पहले भेजा गया था, जिसके बाद मंजूरी मिल गई थी, लेकिन जमीन फाइनल न होने की वजह से कार्य समय से शुरू नहीं हो सका था। करीब दस महीने पहले काम शुरू किया गया था। आपत्ति लगने की मुख्य वजह एसटीपी परिसर में ढमोला नदी पर बनने वाला पुल है। दरअसल, सिंचाई विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने एनओसी के लिए फाइल ऊपर भेजी थी, जो शासन में जाने से पहले ओखला स्थित चीफ कार्यालय गई।
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चीफ ने देखा कि एसटीपी परिसर में बनने वाले करीब 20 फीट चौड़े पुल को कार्यदायी संस्था ने बॉक्स कवर्ड (छोटी पुलिया) दर्शाया हुआ है, जबकि हकीकत यह है कि यह एक मजबूत और बड़ा पुल होगा, जो एसटीपी के वाहनों के इस्तेमाल के लिए बनेगा। इससे भारी वाहन गुजरेंगे, लेकिन एनओसी के दस्तावेजों में इसे छिपाया गया। ऐसे में फाइल शासन में जाने की बजाय चीफ कार्यालय से आपत्ति लगकर वापस आ गई है। इसकी वजह से कार्य प्रभावित हो रहा है। कार्यदायी संस्था कार्य तो कर रही है, लेकिन नदी के दायरे से बाहर का काम निपटा रही है। ढमोला में होने वाले कार्य आपत्ति हटने और एनओसी मिलने के बाद होंगे।
पहले भी लग चुकी आपत्ति
एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है। करीब चार महीने पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना करते हुए पाया था कि एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई काफी कम कर दी गई है, जो बाढ़ जैसी स्थिति के लिए ठीक नहीं है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में काम रोक दिया गया था। इसके बाद ढमोला नदी की चौड़ाई पीछे के बराबर छोड़ने की वजह से एसटीपी की जमीन कम हो गई थी, जिसमें प्रशासन के सहयोग से जमीन पूरी कर काम शुरू कराया गया था।
बार-बार आ रही अड़चन
एसटीपी के टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा था। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद डीपीआर दोबारा तैयार करनी पड़ी थी। उसके बाद दो बार आपत्ति लग चुकी है। बता दें कि एसटीपी का कार्य 31 अक्तूबर 2027 तक पूरा होना है।
हिंडन और यमुना तक होगा असर
पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा। एसटीपी के जरिए शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर होगा।
एसटीपी परिसर में ढमोला नदी पर बनने वाले पुल को लेकर चीफ कार्यालय से आपत्ति लगी है। कार्यदायी संस्था ने बड़े पुल को बॉक्स कवर्ड दर्शाया था, जिस पर आपत्ति लगी है।
- राम बाबू, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग