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Saharanpur News: मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल में खून की किल्लत, मरीजों पर संकट
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जिला अस्पताल स्थित रक्तदान केंद्र
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- ए पॉजिटिव, ए, एबी और ओ नेगेटिव नहीं बचा, रोजाना 40 से 50 यूनिट की खपत
- आपूर्ति सिर्फ 15 से 20 यूनिट, ए पॉजिटिव की ज्यादा मांग, मिल रहा है बहुत कम
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। रक्तदान के प्रति बढ़ती बेरुखी और मुफ्त के लिए बढ़ते दबाव से सरकारी ब्लड बैंक खाली होने के कगार पर है। सरकारी ब्लड बैंकों को शिविर की संजीवनी नहीं मिली तो आपात स्थिति आने पर संकट और बढ़ सकता है, क्योंकि, जिला अस्पताल में ए पॉजिटिव, ए, बी और ओ नेगेटिव ब्लड नहीं बचा है। मेडिकल कॉलेज में भी ओ नेगेटिव व एबी नेगेटिव की दो-दो यूनिट ही बची हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 600 यूनिट तक रखने की है। रविवार तक ब्लड बैंक में 174 यूनिट ब्लड था। ब्लड बैंक को प्रतिदिन 15 से 20 यूनिट ब्लड की आपूर्ति होती है, जबकि 30 से 40 यूनिट की खपत है। थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को हर महीने 200 से 220 यूनिट की जरूरत होती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए प्रति महीने 150 से 200 यूनिट खून जाता है। इस समय एक पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की ज्यादा मांग है, जबकि एक यूनिट भी नहीं आ रहा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी के मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
-- यह है मेडिकल कॉलेज की स्थिति
एचओडी डॉ. छविराज सिंह का कहना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में सोमवार तक 86 यूनिट ब्लड रहा। ओ नेगेटिव व एबी निगेटिव की दो-दो यूनिट है। ए पॉजिटिव 13 यूनिट, बी पॉजिटिव 18, बी नेगेटिव नौ, एबी पॉजिटिव 21 और ओ पॉजिटिव के भी 21 यूनिट है। प्रतिदिन 20 से 40 यूनिट जाती है।
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-- जिला अस्पताल में किस ग्रुप की कितनी यूनिट
ए पॉजिटिव - 00
बी पॉजिटिव - 65
ओ पॉजिटिव - 100
एबी पॉजिटिव - 02
ए निगेटिव - 00
बी नेगेटिव - 07
ओ नेगेटिव - 00
एबी नेगेटिव - 00
-- -- --
-- वर्जन
जिस ग्रुप का ब्लड नहीं है, ऐसे में संस्थाओं से रक्तदान शिविर के लिए अपील की जा रही है, ताकि थैलेसीमिया, घायलों और गर्भवती महिलाओं को नियमित ब्लड मिल सके। रक्तदान करने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। रक्तदान से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है। - डॉ. रविप्रकाश, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
- आपूर्ति सिर्फ 15 से 20 यूनिट, ए पॉजिटिव की ज्यादा मांग, मिल रहा है बहुत कम
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। रक्तदान के प्रति बढ़ती बेरुखी और मुफ्त के लिए बढ़ते दबाव से सरकारी ब्लड बैंक खाली होने के कगार पर है। सरकारी ब्लड बैंकों को शिविर की संजीवनी नहीं मिली तो आपात स्थिति आने पर संकट और बढ़ सकता है, क्योंकि, जिला अस्पताल में ए पॉजिटिव, ए, बी और ओ नेगेटिव ब्लड नहीं बचा है। मेडिकल कॉलेज में भी ओ नेगेटिव व एबी नेगेटिव की दो-दो यूनिट ही बची हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 600 यूनिट तक रखने की है। रविवार तक ब्लड बैंक में 174 यूनिट ब्लड था। ब्लड बैंक को प्रतिदिन 15 से 20 यूनिट ब्लड की आपूर्ति होती है, जबकि 30 से 40 यूनिट की खपत है। थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को हर महीने 200 से 220 यूनिट की जरूरत होती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए प्रति महीने 150 से 200 यूनिट खून जाता है। इस समय एक पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की ज्यादा मांग है, जबकि एक यूनिट भी नहीं आ रहा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी के मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
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एचओडी डॉ. छविराज सिंह का कहना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में सोमवार तक 86 यूनिट ब्लड रहा। ओ नेगेटिव व एबी निगेटिव की दो-दो यूनिट है। ए पॉजिटिव 13 यूनिट, बी पॉजिटिव 18, बी नेगेटिव नौ, एबी पॉजिटिव 21 और ओ पॉजिटिव के भी 21 यूनिट है। प्रतिदिन 20 से 40 यूनिट जाती है।
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बी नेगेटिव - 07
ओ नेगेटिव - 00
एबी नेगेटिव - 00
जिस ग्रुप का ब्लड नहीं है, ऐसे में संस्थाओं से रक्तदान शिविर के लिए अपील की जा रही है, ताकि थैलेसीमिया, घायलों और गर्भवती महिलाओं को नियमित ब्लड मिल सके। रक्तदान करने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। रक्तदान से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है। - डॉ. रविप्रकाश, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल