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Saharanpur News: 127 नलकूपों के टेंडर में समिति ने पकड़ी 2.35 करोड़ की खामी
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सहारनपुर। नगर निगम में 127 मिनी नलकूपों के संचालन और रखरखाव के टेंडर में बड़ा वित्तीय खेल होने से पहले ही पकड़ लिया गया। समिति को टेंडर दरों की जांच में गड़बड़ी मिली, जिसके बाद कुल बजट में से 2.35 करोड़ कम किए गए। इससे जलकल विभाग की तरफ से जारी की गई टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
महानगर में जलापूर्ति के लिए नगर निगम के 254 नलकूप स्थापित हैं। इनमें 127 बड़े और इतने ही छोटे नलकूप हैं। बड़े नलकूपों पर स्काडा सिस्टम लगाने का काम जल निगम द्वारा किया जा रहा है, जबकि 127 मिनी नलकूपों के लिए नगर निगम के जलकल अनुभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया चलाई जा रही है। प्रत्येक नलकूप को स्काडा सिस्टम से जोड़ने और उसके संचालन व रखरखाव के लिए 23,150 रुपये निर्धारित किए गए थे, जो सात साल के लिए करीब 24 करोड़ बैठते हैं। टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए समिति बनाई गई थी, जिसमें लेखाधिकारी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक के अलावा जलकल अनुभाग के महाप्रबंधक सहित कई अधिकारी शामिल थे। जब टेंडर की फाइल समिति के पास पहुंची तो पाया कि उसमें टेंडर के रेट अधिक हैं, जिससे नगर निगम को नुकसान होगा। इसके बाद समिति ने टेंडर की शर्तों पर गहन मंथन करने के बाद करीब 2.35 करोड़ रुपये कम कराए हैं।
ऑपरेटरों को झटका
अभी तक सभी 254 नलकूपों का संचालन ठेके पर रखे गए ऑपरेटरों के माध्यम से किया जाता है। वहीं नलकूपों की चौकीदारी और देखरेख करते हैं। इसकी एवज में ठेका फर्म उन्हें मानदेय देती है। बताया जा रहा है कि स्काडा सिस्टम लगने के बाद ये सभी ऑपरेटर हटा दिए जाएंगे। इस संबंध में ऑपरेटरों का प्रतिनिधिमंडल कुछ ही दिन पहले नगर निगम के अधिकारियों से मिल चुका है।
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एक ही आईपी एड्रेस से तीन फर्मों ने किया आवेदन
टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जानकारी मिली है कि पहली बार में तीन फर्म आईं, जिनका आईपी एड्रेस एक ही था। इसके बाद प्रक्रिया दोबारा निकाली गई है, जिसमें एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट यानी सावधि जमा रसीद) को लेकर पेंच फंसा है।
यह होता है स्काडा
स्काडा का पूरा नाम सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन यानी पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण है। यह एक कंप्यूटर आधारित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम है, जिसका उपयोग उद्योगों में मशीनों और प्रक्रियाओं की दूर से निगरानी और नियंत्रण करने के लिए किया जाता है।
नलकूपों के नियमित संचालन के लिए स्काडा सिस्टम स्थापित किया जाना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए समिति गठित है। उसी के द्वारा रेट में संशोधन किया गया है, जो अच्छी बात है। - शिपू गिरि, नगर आयुक्त
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महानगर में जलापूर्ति के लिए नगर निगम के 254 नलकूप स्थापित हैं। इनमें 127 बड़े और इतने ही छोटे नलकूप हैं। बड़े नलकूपों पर स्काडा सिस्टम लगाने का काम जल निगम द्वारा किया जा रहा है, जबकि 127 मिनी नलकूपों के लिए नगर निगम के जलकल अनुभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया चलाई जा रही है। प्रत्येक नलकूप को स्काडा सिस्टम से जोड़ने और उसके संचालन व रखरखाव के लिए 23,150 रुपये निर्धारित किए गए थे, जो सात साल के लिए करीब 24 करोड़ बैठते हैं। टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए समिति बनाई गई थी, जिसमें लेखाधिकारी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक के अलावा जलकल अनुभाग के महाप्रबंधक सहित कई अधिकारी शामिल थे। जब टेंडर की फाइल समिति के पास पहुंची तो पाया कि उसमें टेंडर के रेट अधिक हैं, जिससे नगर निगम को नुकसान होगा। इसके बाद समिति ने टेंडर की शर्तों पर गहन मंथन करने के बाद करीब 2.35 करोड़ रुपये कम कराए हैं।
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ऑपरेटरों को झटका
अभी तक सभी 254 नलकूपों का संचालन ठेके पर रखे गए ऑपरेटरों के माध्यम से किया जाता है। वहीं नलकूपों की चौकीदारी और देखरेख करते हैं। इसकी एवज में ठेका फर्म उन्हें मानदेय देती है। बताया जा रहा है कि स्काडा सिस्टम लगने के बाद ये सभी ऑपरेटर हटा दिए जाएंगे। इस संबंध में ऑपरेटरों का प्रतिनिधिमंडल कुछ ही दिन पहले नगर निगम के अधिकारियों से मिल चुका है।
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एक ही आईपी एड्रेस से तीन फर्मों ने किया आवेदन
टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जानकारी मिली है कि पहली बार में तीन फर्म आईं, जिनका आईपी एड्रेस एक ही था। इसके बाद प्रक्रिया दोबारा निकाली गई है, जिसमें एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट यानी सावधि जमा रसीद) को लेकर पेंच फंसा है।
यह होता है स्काडा
स्काडा का पूरा नाम सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन यानी पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण है। यह एक कंप्यूटर आधारित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम है, जिसका उपयोग उद्योगों में मशीनों और प्रक्रियाओं की दूर से निगरानी और नियंत्रण करने के लिए किया जाता है।
नलकूपों के नियमित संचालन के लिए स्काडा सिस्टम स्थापित किया जाना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए समिति गठित है। उसी के द्वारा रेट में संशोधन किया गया है, जो अच्छी बात है। - शिपू गिरि, नगर आयुक्त