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एसआईआर की आड़ में नागरिक अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : मदनी
Thu, 02 Jul 2026 02:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 02 Jul 2026 02:16 AM IST
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देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल मतदाता सूची के संशोधन का मामला नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले भी होता रहा है, लेकिन वर्तमान एसआईआर की कार्यप्रणाली और उसके संभावित परिणामों को लेकर व्यापक आशंकाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग विभिन्न दस्तावेज जमा करने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, फिर भी उनके नाम मतदाता सूची में बने रहने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना है, नागरिकता का निर्धारण करना नहीं। मौलाना मदनी ने दावा किया कि जमीयत ने शुरुआत से ही आशंका जताई थी कि एसआईआर कहीं एनआरसी का नया स्वरूप न बन जाए। विभिन्न राज्यों से मिल रही जानकारियां इन आशंकाओं को बल देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले भी होता रहा है, लेकिन वर्तमान एसआईआर की कार्यप्रणाली और उसके संभावित परिणामों को लेकर व्यापक आशंकाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग विभिन्न दस्तावेज जमा करने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, फिर भी उनके नाम मतदाता सूची में बने रहने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना है, नागरिकता का निर्धारण करना नहीं। मौलाना मदनी ने दावा किया कि जमीयत ने शुरुआत से ही आशंका जताई थी कि एसआईआर कहीं एनआरसी का नया स्वरूप न बन जाए। विभिन्न राज्यों से मिल रही जानकारियां इन आशंकाओं को बल देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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