West UP Weather: मानसून मेहरबान, मेरठ देहात में झमाझम बारिश, शहर में कम बरसे बदरा, अगले 48 घंटे राहत के आसार
मेरठ में मानसून सक्रिय होने से देहात में झमाझम और शहर में रिमझिम बारिश हुई। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटे तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ में मानसून की सक्रियता के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। गुरुवार सुबह से आसमान पर घने बादल छाए रहे। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई, जबकि शहर में रुक-रुक कर रिमझिम फुहारों ने भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत दिलाई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और दिनभर मौसम सुहावना बना रहा।
पिछले कई दिनों से तेज धूप और उमस से परेशान लोगों ने बारिश का स्वागत किया। सुबह और दोपहर के समय शहर की सड़कों पर लोगों को राहत महसूस हुई, वहीं ठंडी हवाओं ने मौसम को और अधिक खुशनुमा बना दिया।
यह भी पढ़ें: UP: युवती ने जहर खाकर दी जान, लैब टेक्नीशियन ने कलाई काटने के बाद लगाई फांसी, दरवाजा तोड़कर निकाले शव
मानसून की पहली अच्छी बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। खेतों में पर्याप्त नमी आने से धान, मक्का, बाजरा और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा, जिससे किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी।
प्रदूषण घटा, हवा हुई साफ
शहर में बारिश की तीव्रता भले ही कम रही, लेकिन लगातार बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से वातावरण में मौजूद धूल बैठ गई। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला और प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ।
अगले 48 घंटे तक बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले 24 से 48 घंटे तक मानसूनी गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। इस दौरान कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ इलाकों में तेज वर्षा हो सकती है। तापमान सामान्य से नीचे रहने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम. शमीम ने बताया कि मानसून का शुरुआती चरण फिलहाल अनुकूल दिखाई दे रहा है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो इससे कृषि के साथ-साथ भूजल स्तर और जलाशयों को भी लाभ मिलेगा।