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Saharanpur News: बुजुर्गों के आदर्शों पर चलने तक दारुल उलूम का अस्तित्व कायम
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:27 AM IST
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देवबंद। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम में वार्षिक पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शूरा के सदस्य व जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि दारुल उलूम का अस्तित्व तभी तक है जब तक वह बुजुर्गों के बताए रास्ते और आदर्शों पर चल रहा है।
दारुल उलूम के लाइब्रेरी हाल में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरुआत कारी अब्दुल रऊफ बुलंदशहरी की तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। इसमें दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के हर कोने में की जा रही धार्मिक सेवाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से दारुल उलूम और उसके जाने-माने विद्वानों के जरिए की जा रही है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे बेकार और फालतू कामों से पूरी तरह बचें और अपना पूरा ध्यान तालीम हासिल करने पर लगाएं। मौलाना मदनी ने किताबों के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि एक छात्र का किताबों से रिश्ता कभी नहीं टूटना चाहिए, बल्कि हर छात्र को अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए अपनी निजी लाइब्रेरी बनानी चाहिए।
उन्होंने मौजूदा हालात का हवाला देते हुए छात्रों को नसीहत दी कि वे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बेवजह इस्तेमाल से बचें क्योंकि इस समय दीनी मदारिस सांप्रदायिक शक्तियों के निशाने पर हैं, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत है। कार्यक्रम में शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी की ओर से पिछले वर्ष की शैक्षिक रिपोर्ट पेश की गई, साथ ही मेधावी छात्रों को पुस्तकें और नकद धनराशि देकर सम्मानित किया गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी की दुआ पर कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस मौके पर नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मुफ्ती राशिद आजमी, मौलाना नेमतुल्लाह आजमी, मौलाना सलमान नक्शबंदी, मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना शौकत बस्तवी आदि मौजूद रहे।
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दारुल उलूम के लाइब्रेरी हाल में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरुआत कारी अब्दुल रऊफ बुलंदशहरी की तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। इसमें दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के हर कोने में की जा रही धार्मिक सेवाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से दारुल उलूम और उसके जाने-माने विद्वानों के जरिए की जा रही है।
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उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे बेकार और फालतू कामों से पूरी तरह बचें और अपना पूरा ध्यान तालीम हासिल करने पर लगाएं। मौलाना मदनी ने किताबों के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि एक छात्र का किताबों से रिश्ता कभी नहीं टूटना चाहिए, बल्कि हर छात्र को अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए अपनी निजी लाइब्रेरी बनानी चाहिए।
उन्होंने मौजूदा हालात का हवाला देते हुए छात्रों को नसीहत दी कि वे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बेवजह इस्तेमाल से बचें क्योंकि इस समय दीनी मदारिस सांप्रदायिक शक्तियों के निशाने पर हैं, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत है। कार्यक्रम में शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी की ओर से पिछले वर्ष की शैक्षिक रिपोर्ट पेश की गई, साथ ही मेधावी छात्रों को पुस्तकें और नकद धनराशि देकर सम्मानित किया गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी की दुआ पर कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस मौके पर नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मुफ्ती राशिद आजमी, मौलाना नेमतुल्लाह आजमी, मौलाना सलमान नक्शबंदी, मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना शौकत बस्तवी आदि मौजूद रहे।