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Saharanpur News: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में की देरी तो काटने होंगे कोर्ट के चक्कर

Mon, 10 Aug 2026 12:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:56 AM IST
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Delay in getting birth and death certificates will lead to court visits.
सहारनपुर। जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में लेटलतीफी करने वालों के लिए प्रक्रिया और जटिल होने जा रही है। यदि जन्म या मृत्यु के दो वर्ष बाद प्रमाण पत्र बनवाएंगे तो उसके लिए आपको केवल संबंधित विभाग के पास नहीं, बल्कि कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
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नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र अनुभाग में प्रत्येक माह जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों के लिए दो हजार से अधिक आवेदन होते हैं। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले से समय निर्धारित है। इसके बावजूद लोग लापरवाही के चलते प्रमाण पत्र बनवाने में देर कर देते हैं। उसके बाद उनके प्रमाण पत्र बनने से पहले एक ओर जहां नगर निगम अपने स्तर से सत्यापन कराता है। वहीं दूसरी ओर उप जिलाधिकारी स्तर से भी जांच कराई जाती है, लेकिन अब यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए और जटिल हो गई है, जो समय से प्रमाण पत्र नहीं बनवाते। सरकार ने ऐसा पंजीकरण के नियमों को सख्त बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए किया है।
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-यह बदले नियम
यदि किसी के जन्म की या मृत्यु की जानकारी एक साल के बाद और दो साल के अंदर दी जाती है तो ऐसे व्यक्ति का जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनकी ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति और जांच के बाद ही बन सकेगा। इसके अलावा यदि बच्चे का जन्म हुए और व्यक्ति के निधन को दो साल से अधिक का समय बीत चुका है तो ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही पंजीकरण हो सकेगा।
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-अभी तक यह थी प्रक्रिया
यदि किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति के निधन के 21 दिन के अंदर प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जाता है तो प्रमाण पत्र तुरंत जारी होता है। जन्म प्रमाण पत्र के लिए संबंधित अस्पताल से ऑनलाइन ब्योरा भेजा जाता है। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए श्मशान या कब्रिस्तान की रसीद लानी होती है। 21 दिन के बाद और एक साल से पहले के मामलों में फाइल जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास जाती है। एक वर्ष के बाद प्रमाण पत्र बनवाने पर नगर निगम के साथ ही उप-विभागीय मजिस्ट्रेट स्तर से भी जांच की जाती है।
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