सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Expressway picks up pace, restaurant business hit by recession

Saharanpur News: एक्सप्रेसवे ने पकड़ी रफ्तार, रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ी मंदी की मार

संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 10 Mar 2026 01:17 AM IST
विज्ञापन
Expressway picks up pace, restaurant business hit by recession
विज्ञापन
छुटमलपुर। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर जहां वाहनों ने रफ्तार पकड़ी है वहीं इसके किनारे स्थित ढाबा और रेस्टोरेंट कारोबारी मंदी की चपेट में आ गए हैं। दशकों से रात दिन गुलजार रहने वाले ढाबे और रेस्टोरेंट एक्सप्रेसवे किनारे रेलिंग लगने और फ्लाईओवर से वाहनों के फर्राटा भरने के कारण ग्राहकों को तरस गए हैं। ऐसे में ज्यादातर ढाबों पर ताले लटक गए हैं। कुछ ने हिम्मत करके अपना कारोबार दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया है और कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने काम ही बदल दिया है।
Trending Videos


देहरादून हाईवे पर गागलहेड़ी से सुंदरपुर तक करीब 25 किमी के दायरे में 50 से ज्यादा ढाबे और रेस्टोरेंट थे। इनमें हरोड़ा, सोना सैयद माजरा, चमारीखेड़ा, छुटमलपुर, रसूलपुर, शेरपुर खानाजादपुर, दामोदराबाद में इनकी भरमार थी। एक्सप्रेसवे चलने से पहले दिन की बात तो छोड़िए रात में भी इन पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी। आधी रात के बाद तक यह गुलजार रहते थे, लेकिन अब यह नजारा बदल गया है। इसकी वजह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगाई गई रेलिंग और इस पर बने फ्लाईओवर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक्सप्रेसवे का हालांकि अभी अभी तक विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है, लेकिन इस पर पिछले दो माह से वाहन फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में यह ढाबे और रेस्टोरेंट सर्विस रोड या फिर फ्लाईओवर के नीचे आ गए हैं। अब इन पर ग्राहकों का टोटा रहता है। दैनिक खर्च न निकाल पाने के कारण ज्यादातर ने अपने काम बंद कर दिए। इनमें कई तो ऐसे हैं जिन्होंने करोड़ों रुपये खर्च कर महंगे दामों पर जमीन खरीदी और फिर इतनी ही लागत से बड़ा सेटअप खड़ा किया। अब यह कारोबारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
----------------

- पांच दशक से रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े छुटमलपुर निवासी इंद्रजीत सिंह अरोड़ा बताते हैं कि एक्सप्रेसवे ने उन्हें पलायन को मजबूर कर दिया। तीन साल में तीन ही जगह उन्हें कारोबार शिफ्ट करना पड़ा। अब गणेशपुर टोल के पास रेस्टोरेंट बनाया है। रेस्ट एरिया चालू होने पर यहां भी वाहनाें की एंट्री बंद होने का डर सता रहा है।
- नागल क्षेत्र निवासी चंदन सिंह ने छह साल पहले करोड़ों रुपये लगाकर चमारीखेड़ा टोल के पास बड़ा रेस्टोरेंट बनाया था। रिजल्ट भी बेहतर मिला था, लेकिन रेलिंग लगने से सारी लागत डूबती दिखाई दी तो इसे बैंक्वेट हाल में तब्दील करना पड़ा।
- गांव रेहड़ी निवासी राजकुमार सैनी पिछले दस साल से चमारीखेड़ा में ढाबा चला रह थे। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे चलते ही ग्राहकों का ऐसा टोटा पड़ा कि उन्हें इसे बंद ही करना पड़ा।
- झबरेड़ा निवासी सोनू ने बताया कि वह पिछले 35 साल से छुटमलपुर क्षेत्र में ढाबा चला रहा है। एक्सप्रेसवे ने सारा कारोबार खत्म कर दिया है। ऐसे में यहां से ढाबा बंद कर लाखनौर शिफ्ट होना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed