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Saharanpur News: एक्सप्रेसवे पर रफ्तार बढ़ी, मोहंड पीछे छूटा
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मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद
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- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद मोहंड के ग्रामीण परेशान
- पुराना हाईवे वन विभाग के किया अधीन, शाम होते ही लगा दिए जाते हैं बैरिकेड
बिहारीगढ़। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के संचालन से जहां विकास को पंख लगेंगे, वहीं एक गांव ऐसा भी जिसके बाशिंदे इसकी वजह से पिछड़ेपन का दंश झेलने को मजबूर हो गए। बात हो रही है देहरादून सीमा से सटे मोहंड गांव की। कभी दिन भर वाहनों से गुलजार रहने वाले मोहंड की सड़कों पर अब सन्नाटा पसरा है। पुराना हाईवे बंद होने से वह वन विभाग के अधीन हो गया, जहां पर वन विभाग शाम होते ही बैरिकेडिंग लगाकर चेकिंग शुरू कर देता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के कारण वह गांव में कैद होकर रह गए।
दरअसल, एक माह पहले तक मोहंड वाहनों और देहरादून मसूरी जाने वाले पर्यटकों से गुलजार रहता था। कई राज्यों की बसें यहां से गुजरती थी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एलिवेटेड रोड खुलने के साथ ही इस पर वाहनों का संचालन बंद हो गया। इससे कारोबार ठप हो गया और यहां के लोगों का बाहरी दुनिया से जैसे संपर्क सा कट गया। पुराना हाईवे वन विभाग को सौंप दिया गया है। ऐसे में दिन ढलते ही इस पर बैरिकेड्स लगाकर वन कर्मचारी चेकिंग शुरू कर देते हैं। गांव में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ की जाती है। वहीं, वाहन न मिलने से देहरादून, सहारनपुर सहित बिहारीगढ़ और छुटमलपुर में पढ़ने जाने वाले विद्यार्थियों और यहां मजदूरी करने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। उन्हें गणेशपुर तक सात किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
-- - कुछ ऐसा है ग्रामीणों का दर्द
- मास्टर अमी सिंह सोम का कहना है कि मोहंड, सोढ़ीनगर, वन गुर्जर खोल की साढ़े चार हजार की आबादी को सरकार अनदेखा कर रही है। ग्रामीण कैद से होकर रह गए हैं।
- मोहंड निवासी पूर्व प्रधान गुलसनव्वर का कहना है कि यातायात व्यवस्था ठप होने से मजदूर व छात्रों को भारी परेशानी हो रही है। विकास की इस दौड़ में गांव पिछड़ गया।
- राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि वाहनों की आवाजाही न होने के कारण जंगली जानवर घरों के सामने तक आ रहे हैं। मोहंड के व्यापारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।
- राव अशफाक का कहना है कि मेहमानों ने भी आना बंद कर दिया है। यहां तक बस नहीं आती है। गणेशपुर के बाद सात किमी पैदल चलना पड़ता है।
-- - शाम सात बजे के बाद आने जाने वालों से पूछताछ की जाती है। इसकी वजह यह है कि कहीं कोई संदिग्ध व्यक्ति जंगल या वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचा दें। सुरक्षा के लिहाज से ऐसा किया जा रहा है। - लव सिंह, वन क्षेत्राधिकारी मोहंड
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- पुराना हाईवे वन विभाग के किया अधीन, शाम होते ही लगा दिए जाते हैं बैरिकेड
बिहारीगढ़। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के संचालन से जहां विकास को पंख लगेंगे, वहीं एक गांव ऐसा भी जिसके बाशिंदे इसकी वजह से पिछड़ेपन का दंश झेलने को मजबूर हो गए। बात हो रही है देहरादून सीमा से सटे मोहंड गांव की। कभी दिन भर वाहनों से गुलजार रहने वाले मोहंड की सड़कों पर अब सन्नाटा पसरा है। पुराना हाईवे बंद होने से वह वन विभाग के अधीन हो गया, जहां पर वन विभाग शाम होते ही बैरिकेडिंग लगाकर चेकिंग शुरू कर देता है। ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के कारण वह गांव में कैद होकर रह गए।
दरअसल, एक माह पहले तक मोहंड वाहनों और देहरादून मसूरी जाने वाले पर्यटकों से गुलजार रहता था। कई राज्यों की बसें यहां से गुजरती थी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एलिवेटेड रोड खुलने के साथ ही इस पर वाहनों का संचालन बंद हो गया। इससे कारोबार ठप हो गया और यहां के लोगों का बाहरी दुनिया से जैसे संपर्क सा कट गया। पुराना हाईवे वन विभाग को सौंप दिया गया है। ऐसे में दिन ढलते ही इस पर बैरिकेड्स लगाकर वन कर्मचारी चेकिंग शुरू कर देते हैं। गांव में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ की जाती है। वहीं, वाहन न मिलने से देहरादून, सहारनपुर सहित बिहारीगढ़ और छुटमलपुर में पढ़ने जाने वाले विद्यार्थियों और यहां मजदूरी करने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। उन्हें गणेशपुर तक सात किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
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- मास्टर अमी सिंह सोम का कहना है कि मोहंड, सोढ़ीनगर, वन गुर्जर खोल की साढ़े चार हजार की आबादी को सरकार अनदेखा कर रही है। ग्रामीण कैद से होकर रह गए हैं।
- मोहंड निवासी पूर्व प्रधान गुलसनव्वर का कहना है कि यातायात व्यवस्था ठप होने से मजदूर व छात्रों को भारी परेशानी हो रही है। विकास की इस दौड़ में गांव पिछड़ गया।
- राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि वाहनों की आवाजाही न होने के कारण जंगली जानवर घरों के सामने तक आ रहे हैं। मोहंड के व्यापारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।
- राव अशफाक का कहना है कि मेहमानों ने भी आना बंद कर दिया है। यहां तक बस नहीं आती है। गणेशपुर के बाद सात किमी पैदल चलना पड़ता है।

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद

मोहंड मार्ग पर वन विभाग द्वारा यात्रियों से पूछताछ के लिए बनाई गई पिकेट। संवाद