{"_id":"69c19bac2b902b0893022157","slug":"fatwas-to-return-to-darul-ulooms-website-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-171874-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: दारुल उलूम की वेबसाइट पर फिर लौटेंगे फतवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: दारुल उलूम की वेबसाइट पर फिर लौटेंगे फतवे
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:29 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर फतवे फिर से अपलोड करने का निर्णय लिया है। हालांकि भविष्य में होने वाले विवादों और कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए इस बार दारुल इफ्ता (फतवा विभाग) की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। संस्थान अब केवल सामान्य श्रेणी के फतवों को ही सार्वजनिक पोर्टल पर साझा करेगा।
संस्थान के प्रबंधतंत्र के अनुसार अब वेबसाइट पर केवल उन्हीं फतवों को जगह दी जाएगी, जो आम जनता के सामाजिक और धार्मिक जीवन से जुड़े सामान्य मुद्दों पर आधारित होंगे। निकाह (विवाह), तलाक, जमीन-जायदाद, विरासत (हिस्सा देना) और मानवाधिकार जैसे विषयों से संबंधित फतवे वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। ऐसे सवाल जो बेहद संवेदनशील, व्यक्तिगत या जरूरी प्रकृति के हैं, उन्हें अब सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। ऐसे फतवों को सीधे पूछने वाले व्यक्ति को उनके ईमेल या बताए गए निजी पते पर भेजा जाएगा। संस्था प्रबंधन का मानना है कि इस नई चयनात्मक अपलोड नीति से जहां आम लोगों को जरूरी जानकारी मिलती रहेगी। वहीं, अनावश्यक विवादों पर भी लगाम लगेगी। (संवाद)
-- -- -- -- -
क्यों लिया गया यह फैसला
बीते कुछ वर्षों में दारुल उलूम की वेबसाइट पर मौजूद कई पुराने फतवों को लेकर भारी विवाद हुआ था। गजवा-ए-हिंद और बच्चा गोद लेने जैसे विषयों पर जारी फतवों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की थी। इन विवादों के चलते संस्था ने अपनी वेबसाइट पर नए फतवे अपलोड करना बंद कर दिया था। करीब दो वर्ष बाद अब संस्थान बदले हुए परिवेश के अनुसार खुद को ढालते हुए पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन बना रहा है।
-- -- -- -- -
वेबसाइट पर मौजूद हैं 45 हजार से अधिक फतवे
वर्तमान में दारुल इफ्ता की वेबसाइट पर विभिन्न श्रेणियों के लगभग 45 हजार फतवे मौजूद हैं। ये फतवे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और अरबी भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय को मार्गदर्शन मिलता है। संस्थान अब लाखों हस्तलिखित फतवों को भी डिजिटल कर रहा है। ताकि ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सके।
-- -- -- -- --
यह रहे थे विवादित फतवे
-फरवरी 2024-गजवा-ए-हिंद
इसे राष्ट्रविरोधी और बच्चों में कट्टरता फैलाने वाला माना गया।
-जनवरी 2022-बच्चा गोद लेना
फतवे में कहा गया कि गोद लिया बच्चा असली बच्चा नहीं है और उसे विरासत में हिस्सा नहीं मिलेगा।
-अप्रैल 2016-भारत माता की जय
इसे ''तौहीद'' (ईश्वर की एकता) के खिलाफ बताते हुए नारे न लगाने की सलाह दी गई थी।
-मई 2010-महिलाओं का कार्यस्थल
मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐसी जगहों पर नौकरी करना हराम बताया गया जहां पुरुषों से बातचीत करनी पड़े।
Trending Videos
संस्थान के प्रबंधतंत्र के अनुसार अब वेबसाइट पर केवल उन्हीं फतवों को जगह दी जाएगी, जो आम जनता के सामाजिक और धार्मिक जीवन से जुड़े सामान्य मुद्दों पर आधारित होंगे। निकाह (विवाह), तलाक, जमीन-जायदाद, विरासत (हिस्सा देना) और मानवाधिकार जैसे विषयों से संबंधित फतवे वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। ऐसे सवाल जो बेहद संवेदनशील, व्यक्तिगत या जरूरी प्रकृति के हैं, उन्हें अब सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। ऐसे फतवों को सीधे पूछने वाले व्यक्ति को उनके ईमेल या बताए गए निजी पते पर भेजा जाएगा। संस्था प्रबंधन का मानना है कि इस नई चयनात्मक अपलोड नीति से जहां आम लोगों को जरूरी जानकारी मिलती रहेगी। वहीं, अनावश्यक विवादों पर भी लगाम लगेगी। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
क्यों लिया गया यह फैसला
बीते कुछ वर्षों में दारुल उलूम की वेबसाइट पर मौजूद कई पुराने फतवों को लेकर भारी विवाद हुआ था। गजवा-ए-हिंद और बच्चा गोद लेने जैसे विषयों पर जारी फतवों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की थी। इन विवादों के चलते संस्था ने अपनी वेबसाइट पर नए फतवे अपलोड करना बंद कर दिया था। करीब दो वर्ष बाद अब संस्थान बदले हुए परिवेश के अनुसार खुद को ढालते हुए पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन बना रहा है।
वेबसाइट पर मौजूद हैं 45 हजार से अधिक फतवे
वर्तमान में दारुल इफ्ता की वेबसाइट पर विभिन्न श्रेणियों के लगभग 45 हजार फतवे मौजूद हैं। ये फतवे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और अरबी भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय को मार्गदर्शन मिलता है। संस्थान अब लाखों हस्तलिखित फतवों को भी डिजिटल कर रहा है। ताकि ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सके।
यह रहे थे विवादित फतवे
-फरवरी 2024-गजवा-ए-हिंद
इसे राष्ट्रविरोधी और बच्चों में कट्टरता फैलाने वाला माना गया।
-जनवरी 2022-बच्चा गोद लेना
फतवे में कहा गया कि गोद लिया बच्चा असली बच्चा नहीं है और उसे विरासत में हिस्सा नहीं मिलेगा।
-अप्रैल 2016-भारत माता की जय
इसे ''तौहीद'' (ईश्वर की एकता) के खिलाफ बताते हुए नारे न लगाने की सलाह दी गई थी।
-मई 2010-महिलाओं का कार्यस्थल
मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐसी जगहों पर नौकरी करना हराम बताया गया जहां पुरुषों से बातचीत करनी पड़े।