{"_id":"6a7cd1388169d733b30da1e3","slug":"granted-e-hospital-status-yet-the-digital-system-is-limited-merely-to-generating-registration-slips-saharanpur-news-c-30-1-sah1001-181604-2026-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: ई-हॉस्पिटल का दर्जा मिला, पर्चे बनाने तक सिमटी डिजिटल व्यवस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: ई-हॉस्पिटल का दर्जा मिला, पर्चे बनाने तक सिमटी डिजिटल व्यवस्था
Thu, 13 Aug 2026 01:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिये मरीजों के इलाज का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड करने की योजना जिले में जमीन पर नहीं उतर सकी है। यह योजना केवल ओपीडी पर्चे बनाने तक ही सीमित रह गई। हाल यह है कि कंप्यूटर होने के बावजूद मरीजों की बीमारियों का ब्योरा पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं हो सका है।
एसबीडी जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, देवबंद, नकुड़, रामपुर मनिहारान, पुवांरका और बेहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ई-हॉस्पिटल से जोड़ा गया। ई-सॉफ्टवेयर की मूल अवधारणा यह थी कि डॉक्टर द्वारा कंप्यूटर पर लिखी गई दवा और जांच की पर्ची सीधे संबंधित विभाग तक पहुंच जाएगा, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत है। परिणाम यह है कि लाखों आभा आईडी केवल एक पहचान संख्या बनकर रह गई है। विभाग का दावा है कि आभा आईडी से मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा, जिससे मरीज के भर्ती होने पर या ओपीडी पर किसी भी अस्पताल में डॉक्टर पुरानी जांच, दवाओं और उपचार का रिकॉर्ड देख सकेंगे, लेकिन जिले में मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। यहां आज भी इलाज का अधिकांश रिकॉर्ड फाइलों और पर्चों तक सीमित है।
-- -- --
-- 75 हजार से अधिक मरीजों की बन चुकी आभा आईडी
महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. इंद्रा सिंह ने बताया कि अस्पताल में अब तक 75 हजार से अधिक मरीजों की आभा आईडी बन चुकी है। फार्मेसी, ओपीडी और पैथोलॉजी को आभा से जोड़ दिया है। अभी कुछ अन्य विभाग रह गए हैं, जिन्हें जल्द ही जोड़ दिया जाएगा। यह विशेष प्राथमिकता में शामिल हैं।
विज्ञापन
-- -- --
चरणबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अभी आभा आईडी से मरीजों के ऑनलाइन पर्चे बनाए जा रहे हैं। पैथोलॉजी को भी आभा से लिंक कर दिया है। अन्य विभागों को जल्द ही जोड़ा जाएगा। इसके लिए उपकरण और स्टाफ की जरूरत पड़ेगी।
- डॉ. रविप्रकाश, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
विज्ञापन
एसबीडी जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, देवबंद, नकुड़, रामपुर मनिहारान, पुवांरका और बेहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ई-हॉस्पिटल से जोड़ा गया। ई-सॉफ्टवेयर की मूल अवधारणा यह थी कि डॉक्टर द्वारा कंप्यूटर पर लिखी गई दवा और जांच की पर्ची सीधे संबंधित विभाग तक पहुंच जाएगा, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत है। परिणाम यह है कि लाखों आभा आईडी केवल एक पहचान संख्या बनकर रह गई है। विभाग का दावा है कि आभा आईडी से मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा, जिससे मरीज के भर्ती होने पर या ओपीडी पर किसी भी अस्पताल में डॉक्टर पुरानी जांच, दवाओं और उपचार का रिकॉर्ड देख सकेंगे, लेकिन जिले में मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। यहां आज भी इलाज का अधिकांश रिकॉर्ड फाइलों और पर्चों तक सीमित है।
विज्ञापन
महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. इंद्रा सिंह ने बताया कि अस्पताल में अब तक 75 हजार से अधिक मरीजों की आभा आईडी बन चुकी है। फार्मेसी, ओपीडी और पैथोलॉजी को आभा से जोड़ दिया है। अभी कुछ अन्य विभाग रह गए हैं, जिन्हें जल्द ही जोड़ दिया जाएगा। यह विशेष प्राथमिकता में शामिल हैं।
विज्ञापन
चरणबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अभी आभा आईडी से मरीजों के ऑनलाइन पर्चे बनाए जा रहे हैं। पैथोलॉजी को भी आभा से लिंक कर दिया है। अन्य विभागों को जल्द ही जोड़ा जाएगा। इसके लिए उपकरण और स्टाफ की जरूरत पड़ेगी।
- डॉ. रविप्रकाश, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल