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Saharanpur News: फिटनेस सर्टिफिकेट पर ब्रेक, वीएलटीडी की अनिवार्यता से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:51 AM IST
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सहारनपुर। परमिट के दायरे में आने वाले व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) की अनिवार्यता ने फिटनेस सर्टिफिकेट पर ब्रेक लगा दिया है। उपकरण के नहीं होने से वाहनों के ट्रांसफर, परमिट और फिटनेस का काम अटक गया है। ऐसे में फिटनेस के लिए वाहन उत्तराखंड के बहादराबाद में पहुंच रहे। यहां पर वीएलटीडी की बाध्यता नहीं है।
एक अप्रैल से वर्ष 2019 के बाद वाले व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य किया गया है। संभागीय परिवहन कार्यालय में रोजाना वाहन मालिक पहुंच रहे हैं, लेकिन बिना डिवाइस वाहनों की फिटनेस नहीं की जा रही है। इसके चलते एक अप्रैल से पहले जहां रोजाना 40 से अधिक वाहनों की फिटनेस होती थी, वह अब 20 से 25 तक रह गई है। इसका कारण वाहनों में वीएलटीडी नहीं होना और फिटनेस फीस बढ़ना है। इसी के चलते अब मालिकों ने वाहनों की फिटनेस कराने के लिए उत्तराखंड के बहादराबाद में फिटनेस सेंटर का रुख किया है। यहां पर न वीएलटीडी की अनिवार्यता है और न ही फीस। फिटनेस फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं है।
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-- वीएलटीडी लगवाने में 10 से 15 हजार का खर्च
ट्रांसपोर्टर ललित पोपली बताते हैं कि नए नियमों की वजह से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। वाहन मालिक को वीएलटीडी लगवाने के लिए 10 से 15 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके लिए जिन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है। वहां तक जाने या उनको यहां बुलाने से खर्च का बोझ और बढ़ रहा है। यहां तक ट्रकों से पुराना जीपीएस भी उतरना पड़ रहा है।
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परमिट के दायरे में आने वाले व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस बिना वीएलटीडी नहीं हो रही है। इसका असर फिटनेस पर भी पड़ा है। उत्तराखंड में वीएलटीडी की अनिवार्यता नहीं है। ऐसे में मालिक उत्तराखंड के बहादराबाद में जाकर वाहनों की फिटनेस करा रहे हैं।
रोहित कुमार सिंह, संभागीय निरीक्षक
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एक अप्रैल से वर्ष 2019 के बाद वाले व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य किया गया है। संभागीय परिवहन कार्यालय में रोजाना वाहन मालिक पहुंच रहे हैं, लेकिन बिना डिवाइस वाहनों की फिटनेस नहीं की जा रही है। इसके चलते एक अप्रैल से पहले जहां रोजाना 40 से अधिक वाहनों की फिटनेस होती थी, वह अब 20 से 25 तक रह गई है। इसका कारण वाहनों में वीएलटीडी नहीं होना और फिटनेस फीस बढ़ना है। इसी के चलते अब मालिकों ने वाहनों की फिटनेस कराने के लिए उत्तराखंड के बहादराबाद में फिटनेस सेंटर का रुख किया है। यहां पर न वीएलटीडी की अनिवार्यता है और न ही फीस। फिटनेस फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं है।
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ट्रांसपोर्टर ललित पोपली बताते हैं कि नए नियमों की वजह से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। वाहन मालिक को वीएलटीडी लगवाने के लिए 10 से 15 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके लिए जिन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है। वहां तक जाने या उनको यहां बुलाने से खर्च का बोझ और बढ़ रहा है। यहां तक ट्रकों से पुराना जीपीएस भी उतरना पड़ रहा है।
परमिट के दायरे में आने वाले व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस बिना वीएलटीडी नहीं हो रही है। इसका असर फिटनेस पर भी पड़ा है। उत्तराखंड में वीएलटीडी की अनिवार्यता नहीं है। ऐसे में मालिक उत्तराखंड के बहादराबाद में जाकर वाहनों की फिटनेस करा रहे हैं।
रोहित कुमार सिंह, संभागीय निरीक्षक