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Saharanpur News: आधे-अधूरे बस्ते के साथ स्कूल पहुंचेंगे नौनिहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:42 AM IST
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सहारनपुर। शैक्षणिक सत्र आज से शुरू हो रहा है, लेकिन अभी तक जनपद में परिषदीय विद्यालयों की पूरी किताबें नहीं पहुंची हैं। कक्षा छह से आठ की 50 फीसदी ही किताबें प्राप्त होने की सूचना है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधे-अधूरे बस्ते के साथ ही स्कूल जाना होगा। हालांकि एक अप्रैल को स्थानीय अवकाश होने के चलते जनपद के स्कूल दो अप्रैल से खुलेंगे।
जनपद में 1,446 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.65 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। ऐसे में आठवीं तक के विद्यार्थियों की सभी किताबें शासन से आती हैं। इस बार भी किताबें आई हैं, लेकिन वह करीब 70 फीसदी ही हैं। कक्षा एक से आठ तक की किसी भी कक्षा की पूरी किताबें नहीं हैं। ऐसे में उनके बस्ते अधूरे हैं। हिंदी की किताब है तो गणित की नहीं है। किसी कक्षा में गणित की हैं तो विज्ञान की किताबें नहीं पहुंची हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार किताबें समय से आई हैं, लेकिन यह भी बात सच है कि वह 70 से 80 ही फीसदी हैं। किताबें सभी बीआरसी के माध्यम से विद्यालयों में भेजी जा रही हैं। चूंकि ज्यादा पहले किताबों का वितरण नहीं किया जा सकता।
इसलिए ज्यादातर विद्यालयों में किताबों का वितरण नए सत्र में ही होगा, जिससे बच्चों के पास से किताबें गुम न हों।
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जनपद में 1,446 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.65 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। ऐसे में आठवीं तक के विद्यार्थियों की सभी किताबें शासन से आती हैं। इस बार भी किताबें आई हैं, लेकिन वह करीब 70 फीसदी ही हैं। कक्षा एक से आठ तक की किसी भी कक्षा की पूरी किताबें नहीं हैं। ऐसे में उनके बस्ते अधूरे हैं। हिंदी की किताब है तो गणित की नहीं है। किसी कक्षा में गणित की हैं तो विज्ञान की किताबें नहीं पहुंची हैं।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार किताबें समय से आई हैं, लेकिन यह भी बात सच है कि वह 70 से 80 ही फीसदी हैं। किताबें सभी बीआरसी के माध्यम से विद्यालयों में भेजी जा रही हैं। चूंकि ज्यादा पहले किताबों का वितरण नहीं किया जा सकता।
इसलिए ज्यादातर विद्यालयों में किताबों का वितरण नए सत्र में ही होगा, जिससे बच्चों के पास से किताबें गुम न हों।