UP: भाजपा को रोकने के लिए अन्य पार्टियों से भी गठबंधन के लिए तैयार : ओवैसी
AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि दूसरे राजनीतिक दल हम पर आरोप लगाते हैं कि हमारी पार्टी सांप्रदायिक पार्टी है। हम कभी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। भाजपा को रोकने के लिए अन्य पार्टियों से गठबंधन करने के लिए तैयार हूं। मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि आपकी नाक के नीचे चोरी हो गई, जो करोड़ रुपये की लागत से स्कैनर लगना था। वह आस्था के लिए नहीं, बल्कि लूट के लिए लगाया गया।
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विस्तार
सांसद असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को चिलकाना रोड पर आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और सपा पर निशाना साधा। कहा कि आपने सबसे अधिक बार कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता में बैठाया। इसके बावजूद सबसे अधिक बेरोजगार हमारे समाज में है। भाजपा सरकार जुल्म कर रही है। जहां पर भी मस्जिद को तोड़ने की बात होगी। हम अपनी आवाज संविधान के दायरे में उठाएंगे। यदि जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना सांप्रदायिक है तो मैं जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहूंगा। मैं फिरकापरस्त नहीं, बल्कि इंसाफ परस्त हूं। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने अपना झंडा और अपना नेता बनाया है उन्हें ही इंसाफ मिला है, जो समाज अपना झंडा और नेता नहीं बना सका और न ही अपना नेतृत्व तैयार कर पाया उसे इंसाफ नहीं मिलता। कहा कि सहारनपुर में लकड़ी की नक्काशी का काम होता था। वह भी अब जयपुर चला गया है।
जौहर विवि पर रखी अपनी बात
जनसभा को संबोधित करने से पहले मीडिया से बात की। कहा कि सरकार जौहर विवि को निशाना साध रही है। उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर काफी कम है। 19-20 फीसदी मुस्लिम आबादी में से मात्र साढ़े तीन फीसदी ही स्नातक की शिक्षा हासिल कर पाते हैं। जौहर विवि को नियमित किया जा सकता है। इससे तीन हजार छात्रों का भविष्य दांव पर है। सरकार नहीं चाहती की मुस्लिम पढ़े। सहारनपुर में ग्लोकल विवि थी। इसकी आज क्या हालत है।
सरकार किस आधार पर दे रही मस्जिद तोड़ने का आदेश
जनसभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि मस्जिद 1955 से उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। किस आधार पर सरकार मस्जिद को तोड़ने का आदेश दे रही है। इसका इस्तेमाल 70 वर्षों से मस्जिद के रूप में हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी वक्फ बाय यूजर के सिद्धांत को मान्यता दी है। नए मामलों में यह लागू नहीं होता, लेकिन पुराने मामलों में यह व्यवस्था लागू रहती है। इसके बाद भी मस्जिद को नोटिस दिया जा रहा है। सरकार जुल्म कर रही है।