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Saharanpur News: सपनों का कर्ज बना बोझ, 1.23 लाख लोग 1770 करोड़ रुपये के तले दबे

Fri, 31 Jul 2026 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 31 Jul 2026 12:45 AM IST
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Saharanpur News
सहारनपुर। काम-धंधे व सपनों को पूरा करने के लिए जिले के लोगों ने बैंकों से कर्ज लिया। बैंकों से कर्ज तो ले लिया लेकिन उन्हें वापस नहीं किया। जिले के 1.23 लाख लोग कर्ज के पहाड़ के तले दबे हैं। इन लोगों पर 1770 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए है।
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जिले में विभिन्न बैंकों की 300 से अधिक शाखाएं हैं। लोगों ने अपने सपने और रोजगार शुरू करने के लिए बैंकों से कर्ज तो ले लिया लेकिन उसे चुका नहीं पाए। इसके चलते बैंकों के 1770.22 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इनकी वसूली नहीं हो पा रही है। काफी कर्जदार ऐसे हैं, जो अपने पते पर नहीं मिले, जबकि काफी लोगों को बैंक नोटिस भी दे चुका है। इसके बाद भी लोगों ने अपना कर्जा नहीं चुकाया। बैंकों से ऋण लेकर अदा न करने के सबसे अधिक मामले किसान क्रेडिट कार्ड के हैं। इनके एनपीए खातों की संख्या 44,600 है।
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इन पर बैंकों का करीब 894.56 करोड़ रुपये बकाया है। इसी तरह कृषि क्षेत्र से संबंधित अन्य ऋण लेने वाले लोगों की संख्या 29443 है। इन पर बैंकों का 268 करोड़ रुपये शेष है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई उद्योग पर भी बैंकों का करोड़ों रुपये बकाया है। इस क्षेत्र के 21630 लोगों पर 208 करोड़ रुपये बैंकों का बकाया है। इसी तरह अन्य प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों में भी 1.01 लाख लोगों पर 1411.01 करोड़ रुपये बैंक का बकाया है।
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अब वसूली पर बैंकों का जोर
बैंकों से ऋण लेने के बाद उसे वापस न करने वालों पर बैंक भी सख्ती कर रहे हैं। नोटिस के साथ ही वसूली प्रक्रिया भी तेजी लाई जा रही है। बैंकिंग अधिकारी बताते हैं कि डिजिटल और आसान ऋण के कारण बड़ी संख्या में ऋण वितरित किए गए। बाद में किस्तों में देरी होने लगी। जिन खाताधारकों ने एक भी किस्त जमा नहीं की। उन्हें एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया है।


वर्जन
बैंकों द्वारा दिए गए ऋण की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। बकायेदारों को भी नोटिस दिए जा रहे हैं। ग्राहक भी यदि बैंक से ऋण लें, तो समय से उसे अवश्य जमा कराएं। इससे बैंकों में वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।
- नवनीत शर्मा, एलडीएम
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